पश्चिमी राजस्थान सूखा: गहलोत ने भजनलाल से माँगी तत्काल राहत, बाड़मेर में मवेशियों की मौत की खबर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 8 अक्टूबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान में गहराते सूखे की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा हमला बोला और माँग की कि राज्य सरकार तत्काल सूखा प्रभावित क्षेत्रों की आधिकारिक घोषणा करे तथा राहत कार्य बिना देरी शुरू किए जाएँ। गहलोत ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है, जबकि जमीन पर पशु भूख-प्यास से जूझ रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बाड़मेर और जैसलमेर के सूखा प्रभावित इलाकों में हालात गंभीर बताए जा रहे हैं। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 30 सितंबर 2026 को बाड़मेर में चारे के डिपो खोलने की घोषणा की थी, लेकिन आठ दिन बीत जाने के बाद भी न तो चारे के डिपो खुले और न ही पशु शिविर शुरू किए गए। स्थानीय ग्रामीणों के हवाले से उन्होंने बताया कि बाड़मेर के गदरा रोड इलाके के 20 से अधिक गाँवों में मवेशियों की मौत की सूचना मिली है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इलाकों में मवेशी प्लास्टिक और कचरा खाने पर मजबूर हो रहे हैं — जो स्थिति की भयावहता को उजागर करता है। सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों के अनुसार, चारे की कीमतें तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
प्रशासनिक अड़चन और आचार संहिता का हवाला
गहलोत के अनुसार, गदरा रोड के स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया था कि 23 पटवार सर्किलों में चारा शिविर शुरू करने के प्रस्ताव भेजे गए, किंतु उन्हें अब तक मंजूरी नहीं मिली। प्रशासन देरी की वजह 'आदर्श आचार संहिता' बता रहा है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब सूखे की स्थिति पहले से स्पष्ट थी, तो आचार संहिता लागू होने से पहले आवश्यक तैयारियाँ क्यों नहीं की गईं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहत कार्य शुरू करने के लिए राज्य चुनाव आयोग से अनुमति ली गई।
गौशाला अनुदान और पेंडिंग बिल
गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार गौशालाओं को बड़े जानवरों के लिए प्रतिदिन केवल ₹50 दे रही है, जबकि गौशाला संचालकों का कहना है कि प्रति जानवर वास्तविक दैनिक खर्च ₹100 से ₹150 के बीच है। उन्होंने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 9 सितंबर 2026 तक लगभग ₹383 करोड़ के ग्रांट बिल लंबित थे।
गौरतलब है कि जैसलमेर के भाजपा विधायक ने भी सरकार से तत्काल सूखा घोषित करने की माँग की थी, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य भर के समाचारपत्रों में सूखे की गंभीर स्थिति की खबरें लगातार छप रही हैं।
गहलोत की माँगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तीन प्रमुख कदम उठाने की अपील की — पहला, तत्काल सूखे की आधिकारिक घोषणा; दूसरा, प्रभावित क्षेत्रों में चारे के डिपो और पशु शिविर खोलना; और तीसरा, प्रभावित गाँवों में टैंकरों के जरिए पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना। उन्होंने कहा कि जो पार्टी गायों के कल्याण की बात करती है, उसे जमीनी हालात से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
आगे क्या
पश्चिमी राजस्थान में सूखे की स्थिति पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि भजनलाल सरकार सूखा घोषणा और राहत कार्यों पर कब और क्या कदम उठाती है, तथा राज्य चुनाव आयोग आचार संहिता के बीच राहत की अनुमति देता है या नहीं।