राजस्थान ने पंजाब के जल रॉयल्टी के दावे को असंवैधानिक बताते हुए किया खारिज
सारांश
Key Takeaways
- पंजाब के सीएम ने 1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी की मांग की थी।
- राजस्थान ने इसे असंवैधानिक बताया।
- जल बंटवारे पर कई समझौते हुए हैं।
- राजस्थान को पानी बीकानेर नहर से मिलता है।
- पंजाब मामले को अदालत में ले जाने का इरादा रखता है।
जयपुर, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान राज्य सरकार ने शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा की गई 1.44 लाख करोड़ रुपए की पानी की रॉयल्टी की मांग को खारिज कर दिया। सरकार ने इसे संवैधानिक और कानूनी रूप से गलत ठहराया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1920 में ब्रिटिश सरकार, बीकानेर रियासत और बहावलपुर (जो अब पाकिस्तान में है) के बीच हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा था कि राजस्थान को अपनी बकाया राशि चुकानी होगी, अन्यथा वह पानी प्राप्त नहीं कर सकेगा।
इस पर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि उस समझौते के अंतर्गत शुल्क ब्रिटिश सरकार को देना था, न कि पंजाब को।
उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद 1955, 1959 और 1981 में रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर समझौते हुए थे। इन समझौतों में रॉयल्टी या अतिरिक्त शुल्क का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए पंजाब की मांग गलत और गैर-कानूनी है।
रावत ने संविधान के अनुच्छेद 262 का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों के बीच बहने वाली नदियों का पानी एक राष्ट्रीय संसाधन है, जिस पर संसद का अधिकार होता है। इसे किसी सामान की तरह खरीदा या बेचा नहीं जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक राज्य द्वारा साझा नदी के पानी पर रॉयल्टी मांगना संविधान और कानून के खिलाफ है। साथ ही, राजस्थान सरकार अपने किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
पानी के बंटवारे के संबंध में उन्होंने बताया कि 1955 के समझौते में राजस्थान को 8.00 एमएएफ और 1981 के समझौते में 8.60 एमएएफ पानी दिया गया था। इनमें भी रॉयल्टी का कोई प्रावधान नहीं है।
राजस्थान को बीकानेर नहर, राजस्थान फीडर, भाखड़ा मेन लाइन और सरहिंद फीडर से पानी मिलता है। इन सभी का संचालन भारत सरकार के अधीन भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) करता है।
राजस्थान द्वारा मांग खारिज किए जाने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार इस मामले को अदालत में ले जाएगी।
उन्होंने कहा, “जो कुछ भी कहना है, वे अदालत में कहें।”
मान ने पहले यह भी दावा किया था कि राजस्थान 1960 तक पंजाब को पानी की रॉयल्टी देता था, लेकिन उसके बाद उसने भुगतान बंद कर दिया। उनके अनुसार, 1960 से 2026 तक की बकाया राशि अब बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपए हो गई है। पंजाब से पानी इंदिरा गांधी नहर के जरिए राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों तक पहुंचता है।