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राजस्थान: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर फ्रॉड, डीडवाना पुलिस ने तीन आरोपी दबोचे

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राजस्थान: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर फ्रॉड, डीडवाना पुलिस ने तीन आरोपी दबोचे

सारांश

ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहा था असली खेल — साइबर फ्रॉड का। डीडवाना-कुचामन पुलिस ने कोलिया गांव में छापेमारी कर तीन आरोपियों को दबोचा, 51 एटीएम कार्ड और 4 लैपटॉप बरामद। 'म्यूल अकाउंट्स' के जरिए ग्रामीणों के खातों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ठगी का संदेह।

मुख्य बातें

डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और DST ने 30 सितंबर 2026 को कोलिया गांव में छापेमारी कर अंतर-राज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया।
तीन आरोपी — दिनेश जेवालिया (32) , घनश्याम जेवालिया (22) और गिरधारी थालोड (26) — गिरफ्तार।
बरामदगी में ₹96,820 नकद , 51 एटीएम कार्ड , 19 मोबाइल फोन और 4 लैपटॉप शामिल।
आरोपी कथित तौर पर ग्रामीणों के बैंक खातों को 'म्यूल अकाउंट्स' के रूप में इस्तेमाल करते थे।
नकली सिम कार्ड, WhatsApp, Telegram, Facebook और फर्जी ऐप्स से लेन-देन का संदेह।
जब्त डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी; बड़े नेटवर्क का खुलासा संभव।

डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) ने 30 सितंबर 2026 को एक संयुक्त अभियान में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में संचालित अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया। कोलिया गांव स्थित एक मकान पर छापेमारी में तीन कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण तथा बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए गए।

ऑपरेशन का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर को सूचना मिली कि कोलिया गांव में श्याम जी मार्ग पर एक घर के पीछे बने कमरे से कथित तौर पर अवैध ऑनलाइन गेमिंग का काम चल रहा था। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए डीडवाना पुलिस स्टेशन ऑफिसर मोहन सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा।

यह अभियान एसपी प्यारेलाल शिवरान के निर्देश पर और एएसपी हिमांशु शर्मा व सर्कल ऑफिसर उमेश गुप्ता की देखरेख में संचालित किया गया।

गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

पुलिस ने तीन कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया — दिनेश जेवालिया (32), निवासी कोलिया; घनश्याम जेवालिया (22), निवासी कोलिया; और गिरधारी थालोड (26), निवासी चिंडालिया (मकराना पुलिस स्टेशन क्षेत्र)।

छापेमारी में ₹96,820 नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 10 चेकबुक, 10 बैंक डायरी, 1 इंटरनेट डोंगल और 2 पेमेंट स्कैनर बरामद हुए। एक डायरी भी जब्त की गई जिसमें कथित तौर पर ऑनलाइन फ्रॉड और बड़ी रकम से जुड़े सट्टेबाजी के लेन-देन का विवरण दर्ज था।

धोखाधड़ी का तरीका

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ग्रामीणों और अन्य लोगों को छोटे-मोटे भुगतान का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल के लिए हासिल करते थे। इन खातों को साइबर फ्रॉड से जुड़ी राशि प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' के रूप में कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि पीड़ितों को ऑनलाइन गेमिंग के अवसरों और अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता था। इसके अलावा, कथित तौर पर नकली सिम कार्ड और WhatsApp, Telegram व Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ फर्जी ऐप्स का उपयोग लेन-देन के लिए किया जाता था। यह उसी पैटर्न का हिस्सा है जो देश भर में 'म्यूल अकाउंट'-आधारित साइबर अपराध गिरोहों में देखा जा रहा है।

आगे की जांच

पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ शुरू कर दी है। जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेजों और खाता रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच जारी है, ताकि नेटवर्क के दायरे का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान हो सके। पुलिस के अनुसार, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के विश्लेषण से फर्जी बैंक खाते बनाने और संचालित करने वाले बड़े नेटवर्क के बारे में और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ 'म्यूल अकाउंट' नेटवर्क के लिए आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि 51 एटीएम कार्ड और 10 चेकबुक जैसी बरामदगी दर्शाती है कि यह महज तीन लोगों का काम नहीं था — असली नेटवर्क कहीं बड़ा हो सकता है। मुख्यधारा की कवरेज गिरफ्तारी तक सिमट जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि कितने निर्दोष ग्रामीण अनजाने में इस फ्रॉड के माध्यम बने और उन पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीडवाना पुलिस ने किस साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया?
डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और DST ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में चल रहे एक अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह कथित तौर पर किराए के बैंक खातों और नकली सिम कार्डों से फ्रॉड की रकम का लेन-देन करता था।
'म्यूल अकाउंट' क्या होता है और इस मामले में इसका इस्तेमाल कैसे हुआ?
'म्यूल अकाउंट' वह बैंक खाता होता है जो किसी अन्य व्यक्ति से लेकर फ्रॉड की रकम आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले में आरोपी कथित तौर पर ग्रामीणों को छोटे भुगतान का लालच देकर उनके खाते हासिल करते थे और उनमें साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम ट्रांसफर की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
तीन गिरफ्तार आरोपी हैं — दिनेश जेवालिया (32), निवासी कोलिया; घनश्याम जेवालिया (22), निवासी कोलिया; और गिरधारी थालोड (26), निवासी चिंडालिया, मकराना पुलिस स्टेशन क्षेत्र।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने ₹96,820 नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 10 चेकबुक, 10 बैंक डायरी, 1 इंटरनेट डोंगल और 2 पेमेंट स्कैनर बरामद किए। एक डायरी भी जब्त की गई जिसमें कथित फ्रॉड लेन-देन का विवरण था।
इस मामले में आगे की जांच कहाँ तक पहुँची है?
पुलिस ने केस दर्ज कर तीनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। जब्त डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच जारी है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और बड़े सिंडिकेट का खुलासा होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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