राजस्थान: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर फ्रॉड, डीडवाना पुलिस ने तीन आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) ने 30 सितंबर 2026 को एक संयुक्त अभियान में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में संचालित अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया। कोलिया गांव स्थित एक मकान पर छापेमारी में तीन कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण तथा बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए गए।
ऑपरेशन का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर को सूचना मिली कि कोलिया गांव में श्याम जी मार्ग पर एक घर के पीछे बने कमरे से कथित तौर पर अवैध ऑनलाइन गेमिंग का काम चल रहा था। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए डीडवाना पुलिस स्टेशन ऑफिसर मोहन सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा।
यह अभियान एसपी प्यारेलाल शिवरान के निर्देश पर और एएसपी हिमांशु शर्मा व सर्कल ऑफिसर उमेश गुप्ता की देखरेख में संचालित किया गया।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
पुलिस ने तीन कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया — दिनेश जेवालिया (32), निवासी कोलिया; घनश्याम जेवालिया (22), निवासी कोलिया; और गिरधारी थालोड (26), निवासी चिंडालिया (मकराना पुलिस स्टेशन क्षेत्र)।
छापेमारी में ₹96,820 नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 10 चेकबुक, 10 बैंक डायरी, 1 इंटरनेट डोंगल और 2 पेमेंट स्कैनर बरामद हुए। एक डायरी भी जब्त की गई जिसमें कथित तौर पर ऑनलाइन फ्रॉड और बड़ी रकम से जुड़े सट्टेबाजी के लेन-देन का विवरण दर्ज था।
धोखाधड़ी का तरीका
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ग्रामीणों और अन्य लोगों को छोटे-मोटे भुगतान का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल के लिए हासिल करते थे। इन खातों को साइबर फ्रॉड से जुड़ी राशि प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' के रूप में कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि पीड़ितों को ऑनलाइन गेमिंग के अवसरों और अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता था। इसके अलावा, कथित तौर पर नकली सिम कार्ड और WhatsApp, Telegram व Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ फर्जी ऐप्स का उपयोग लेन-देन के लिए किया जाता था। यह उसी पैटर्न का हिस्सा है जो देश भर में 'म्यूल अकाउंट'-आधारित साइबर अपराध गिरोहों में देखा जा रहा है।
आगे की जांच
पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ शुरू कर दी है। जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेजों और खाता रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच जारी है, ताकि नेटवर्क के दायरे का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान हो सके। पुलिस के अनुसार, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के विश्लेषण से फर्जी बैंक खाते बनाने और संचालित करने वाले बड़े नेटवर्क के बारे में और खुलासे होने की संभावना है।