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विश्व साइकिल दिवस 2026: राजकोट साइकिल क्लब के 170 सदस्य दे रहे फिटनेस और पर्यावरण का संदेश

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विश्व साइकिल दिवस 2026: राजकोट साइकिल क्लब के 170 सदस्य दे रहे फिटनेस और पर्यावरण का संदेश

सारांश

राजकोट साइकिल क्लब की कहानी सिर्फ फिटनेस की नहीं — यह सामाजिक बदलाव की है। 2015 में स्थापित RCC के 170 सदस्य, जिनमें 76 वर्षीय ऊषा माड़ी और 72 वर्षीय वीरजीभाई जैसे प्रेरक चेहरे शामिल हैं, विश्व साइकिल दिवस पर ‘साइकिल टू वर्क’ और ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं।

मुख्य बातें

राजकोट साइकिल क्लब (RCC) की स्थापना 2015 में हुई; वर्तमान में लगभग 170 सक्रिय सदस्य जुड़े हैं।
संस्थापक दिव्येश अधेरा ने हर सप्ताह कम से कम दो लीटर पेट्रोल बचाने का संकल्प लिया है।
76 वर्षीय ऊषाबेन राजदेव रोज़ाना 36 से 45 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं और किसी बीमारी की दवा नहीं लेतीं।
72 वर्षीय वीरजीभाई सतानी ने राजकोट से द्वारका सहित लंबी दूरी की साइकिल यात्राएं की हैं और रोज़ 30–40 किलोमीटर चलाते हैं।
साहू के अनुसार, साइकिलिंग ने उन्हें पिता के निधन के बाद हुए अवसाद से बाहर निकाला।

विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर गुजरात के राजकोट शहर की अग्रणी संस्था राजकोट साइकिल क्लब (RCC) ने फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। 2015 में स्थापित यह क्लब पिछले 11 वर्षों से साइकिलिंग को सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रहा है, और वर्तमान में इससे लगभग 170 सक्रिय सदस्य जुड़े हैं, जिनमें छात्र, डॉक्टर, उद्योगपति और वरिष्ठ साइकिलिस्ट शामिल हैं।

क्लब की सोच और 'साइकिल टू वर्क' अभियान

क्लब के संस्थापक दिव्येश अधेरा ने बताया कि RCC ने साइकिलिंग को केवल खेल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘साइकिल टू वर्क’ जैसी सामाजिक सोच से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचत के लिए किए गए आह्वान को साकार करने में साइकिल सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

अधेरा ने स्वयं हर सप्ताह कम से कम दो लीटर पेट्रोल बचाने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक छोटे-छोटे कामों के लिए साइकिल का उपयोग करे और आधा या एक लीटर पेट्रोल भी बचाए, तो इससे अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को बड़ा लाभ होगा।

72 वर्ष की उम्र में भी रोज़ 40 किलोमीटर

क्लब के वरिष्ठ सदस्य और जेरॉक्स मशीन व्यवसायी 72 वर्षीय वीरजीभाई सतानी ने बताया कि युवावस्था में उन्हें साइकिलिंग का विशेष शौक नहीं था, लेकिन राजकोट में आयोजित पहली मैराथन देखने के बाद वे प्रेरित हुए और 64 वर्ष की उम्र में RCC से जुड़े। उनके अनुसार, नियमित साइकिलिंग की वजह से उनके घुटनों का पुराना दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया है।

उन्होंने राजकोट से सालंगपुर, जूनागढ़ से जामवाला गीर और राजकोट से द्वारका तक लंबी दूरी की सफल साइकिल यात्राएं की हैं, और प्रतिदिन 30 से 40 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्कूल, कॉलेज और दैनिक कार्यों के लिए वाहनों की जगह साइकिल का उपयोग करें।

‘ऊषा माड़ी’: 76 की उम्र में रोज़ाना 45 किलोमीटर

क्लब की सबसे प्रेरणादायक सदस्यों में शामिल 76 वर्षीय ऊषाबेन राजदेव, जिन्हें क्लब में प्यार से ‘ऊषा माड़ी’ कहा जाता है, ने बताया कि मात्र 30 वर्ष की उम्र में पति के निधन के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। परिवार के पालन-पोषण के लिए उन्होंने 25 वर्षों तक बच्चों की ट्राइसाइकिल बेचने का व्यवसाय किया, और इसी दौरान साइकिल चलाना उनकी आदत बन गया।

ऊषाबेन ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से वे RCC से जुड़ी हैं और आज भी रोज़ाना 36 से 45 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं। उनके अनुसार, नियमित साइकिलिंग की वजह से उन्हें किसी बीमारी के लिए दवा तक लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

‘साइकिलिंग ने अवसाद से बाहर निकाला’

क्लब के सदस्य ए.के. साहू ने बताया कि वे पिछले सात वर्षों से साइकिलिंग कर रहे हैं। पिता के निधन के बाद वे गहरे अवसाद में चले गए थे, लेकिन साइकिलिंग ने उनके जीवन को नई दिशा दी — नया मित्र समूह मिला और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ।

साहू ने कहा कि आज लोग छोटे-छोटे कामों के लिए भी मोटर वाहनों का उपयोग करते हैं, जबकि साइकिल के प्रयोग से ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है। विश्व साइकिल दिवस पर RCC के सदस्यों की यह कहानियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि साइकिल आज भी एक स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य की कुंजी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असली बदलाव राजकोट जैसे शहरों के नागरिक-समूहों से आ रहा है। RCC का मॉडल इसलिए अहम है क्योंकि यह साइकिलिंग को सिर्फ ‘फिटनेस ट्रेंड’ नहीं, बल्कि ईंधन-निर्भरता और शहरी प्रदूषण के खिलाफ एक ठोस जवाब बनाता है। 72 और 76 वर्ष की उम्र में रोज़ाना 40 किलोमीटर चलाने वाले सदस्य उस मिथक को तोड़ते हैं कि साइकिलिंग केवल युवाओं का खेल है। यदि भारत के टियर-2 शहर इस मॉडल को अपनाएँ, तो ‘साइकिल टू वर्क’ नीतिगत बहस से ज़मीनी हकीकत बन सकती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट साइकिल क्लब (RCC) क्या है और कब स्थापित हुआ?
राजकोट साइकिल क्लब (RCC) गुजरात के राजकोट शहर की एक अग्रणी साइकिलिंग संस्था है, जिसकी स्थापना 2015 में दिव्येश अधेरा ने की थी। क्लब के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इसमें वर्तमान में लगभग 170 सक्रिय सदस्य जुड़े हैं।
विश्व साइकिल दिवस पर RCC क्या संदेश दे रहा है?
क्लब फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत का संदेश दे रहा है, और लोगों से ‘साइकिल टू वर्क’ अपनाने की अपील कर रहा है। संस्थापक दिव्येश अधेरा के अनुसार, यदि प्रत्येक नागरिक आधा या एक लीटर पेट्रोल भी बचाए, तो अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को बड़ा लाभ होगा।
ऊषा माड़ी कौन हैं और उनकी कहानी क्यों खास है?
ऊषा माड़ी यानी 76 वर्षीय ऊषाबेन राजदेव RCC की सबसे प्रेरणादायक सदस्यों में से एक हैं, जो आज भी रोज़ाना 36 से 45 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं। 30 वर्ष की उम्र में पति के निधन के बाद उन्होंने 25 वर्षों तक ट्राइसाइकिल बेचने का व्यवसाय करके बच्चों का पालन-पोषण किया।
क्या साइकिलिंग से वास्तव में स्वास्थ्य लाभ होते हैं?
क्लब के सदस्यों के अनुभवों के अनुसार, नियमित साइकिलिंग से बुजुर्गों के घुटनों का पुराना दर्द कम हुआ और बीमारियों के लिए दवा की आवश्यकता तक नहीं पड़ी। सदस्य ए.के. साहू ने बताया कि साइकिलिंग ने उन्हें पिता के निधन के बाद हुए अवसाद से बाहर निकालने में भी मदद की।
RCC से कौन लोग जुड़ सकते हैं?
क्लब से छात्र, डॉक्टर, उद्योगपति और वरिष्ठ नागरिक सहित किसी भी आयु वर्ग के लोग जुड़ सकते हैं। वर्तमान में इसके लगभग 170 सक्रिय सदस्य हैं, जिनमें 70 वर्ष से ऊपर के साइकिलिस्ट भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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