29 अगस्त 2026
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राजनाथ सिंह का आह्वान: 'बिलीव इन इंडिया' से मिलेगी 'मेक इन इंडिया' को ताकत, युवा बनाएंगे भारत को सुपरपावर

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राजनाथ सिंह का आह्वान: 'बिलीव इन इंडिया' से मिलेगी 'मेक इन इंडिया' को ताकत, युवा बनाएंगे भारत को सुपरपावर

सारांश

राजनाथ सिंह का संदेश सिर्फ दीक्षांत भाषण नहीं था — यह 'विकसित भारत 2047' के एजेंडे की युवा-केंद्रित पुनर्प्रस्तुति थी। 'बिलीव इन इंडिया' का नारा देते हुए उन्होंने स्टार्टअप, अंतरिक्ष और नवाचार की उपलब्धियों को सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जोड़ा और युवाओं को नौकरी लेने वाले नहीं, देने वाले बनने की चुनौती दी।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त 2026 को बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि 'मेक इन इंडिया' की सफलता का मूल आधार 'बिलीव इन इंडिया' की भावना है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 2015 के 81वें से 2025 में 38वें स्थान पर पहुँचा; भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बना।
आंबेडकर के मंत्र 'शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो' को युवाओं के लिए प्रासंगिक बताया।
भारत का अनुसंधान एवं विकास खर्च दोगुना हुआ; 34 वर्षों बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू।
राजनाथ सिंह ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को केंद्रीय बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त 2026 को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि 'मेक इन इंडिया' की असली शक्ति 'बिलीव इन इंडिया' की भावना में निहित है, और देश के युवा ही 2047 तक भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने की नींव रखेंगे। उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे डिग्री को मंजिल नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का द्वार मानें।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बाँटने के केंद्र नहीं होते — वे व्यक्तित्व और समाज के निर्माण की प्रयोगशालाएँ हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "शिक्षा के साथ संस्कार न हों, तो ज्ञान अधूरा रह जाता है। संस्कारों के साथ संवेदनशीलता न हो, तो व्यक्तित्व अधूरा रह जाता है। और ज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव न हो, तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।" उन्होंने कहा कि असली शिक्षा 'हेड, हार्ट और हैंड' — तीनों का समग्र विकास करती है।

डॉ. आंबेडकर की विरासत और युवाओं को संदेश

रक्षा मंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन-संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अन्याय और भेदभाव के बावजूद हिंसा का मार्ग नहीं चुना, बल्कि शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉ. आंबेडकर के तीन शब्दों के मंत्र — 'शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो' — की याद दिलाई। राजनाथ सिंह ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन केवल संख्या और भीड़ से नहीं, बल्कि बड़े संकल्प, ईमानदारी, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना से आता है।

भारत की वैज्ञानिक और नवाचार उपलब्धियाँ

राजनाथ सिंह ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि एक समय रॉकेट साइकिल और बैलगाड़ी पर ले जाए जाते थे, लेकिन आज भारत मंगल तक पहुँच चुका है, सौर मिशन शुरू हो चुका है और निजी अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 2015 के 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गया है और भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है।

सांस्कृतिक आत्मविश्वास और विकसित भारत का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी राष्ट्र को महान बनाने के लिए केवल GDP वृद्धि पर्याप्त नहीं — नागरिकों का अपनी भाषा, संस्कृति, सभ्यता और विरासत पर गर्व भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, "मेरा पक्का विश्वास है कि ऐसे नौजवानों के रहते हुए भारत को दुनिया की सुपरपावर बनने से कोई रोक नहीं सकता।" उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें और अपनी सफलता को वेतन से नहीं, समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से मापें।

शिक्षा नीति और अनुसंधान में निवेश

राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और वहनीयता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च दोगुना हो चुका है और 34 वर्षों के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय उनके अपने संसदीय क्षेत्र में स्थित है, जिसे उन्होंने अपने लिए सौभाग्य की बात बताया। आने वाले वर्षों में तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में युवाओं को और अधिक प्रोत्साहन देने का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में सुधार और स्टार्टअप की संख्या बढ़ने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन की दर अपेक्षाओं के अनुरूप क्यों नहीं रही। 'नौकरी लेने वाले नहीं, देने वाले बनो' — यह आह्वान तब तक अधूरा है जब तक उद्यमिता के लिए ज़मीनी ढाँचा — सस्ती पूँजी, नियामक सरलता और बाज़ार पहुँच — मज़बूत न हो। सांस्कृतिक आत्मविश्वास और GDP वृद्धि को जोड़ने की राजनाथ सिंह की थीसिस नई नहीं है, लेकिन इसे मापने का कोई ठोस पैमाना अभी तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने लखनऊ दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त 2026 को बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि 'मेक इन इंडिया' की ताकत 'बिलीव इन इंडिया' की भावना में है और युवा 2047 तक भारत को सुपरपावर बना सकते हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रसेवा को एक-दूसरे का पूरक बताया।
'बिलीव इन इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' में राजनाथ सिंह ने क्या संबंध बताया?
राजनाथ सिंह के अनुसार 'मेक इन इंडिया' की औद्योगिक सफलता की असली जड़ 'बिलीव इन इंडिया' — यानी भारत की सभ्यता, संस्कृति और सामर्थ्य पर आत्मविश्वास — में है। उन्होंने कहा कि आर्थिक शक्ति राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, लेकिन सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग क्या है?
राजनाथ सिंह के अनुसार भारत 2015 में वैश्विक नवाचार सूचकांक में 81वें स्थान पर था, जो 2025 में सुधरकर 38वें स्थान पर आ गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भी बन चुका है।
राजनाथ सिंह ने युवाओं को डॉ. आंबेडकर का कौन-सा मंत्र याद दिलाया?
रक्षा मंत्री ने युवाओं को डॉ. भीमराव आंबेडकर के तीन शब्दों के मंत्र — 'शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो' — की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अन्याय के विरुद्ध हिंसा नहीं, शिक्षा को हथियार बनाया।
राजनाथ सिंह ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 34 वर्षों के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई गई है और भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च दोगुना हो चुका है। शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और वहनीयता में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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