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2014 से पहले भारत में हताशा और भ्रष्टाचार का दौर था: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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2014 से पहले भारत में हताशा और भ्रष्टाचार का दौर था: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रामायण सम्मेलन के मंच से 2014 से पहले के भारत को हताशा और भ्रष्टाचार का दौर बताया। ऑपरेशन सिंदूर, UPI की वैश्विक पहुँच और नक्सलवाद के अंत का हवाला देकर उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों का खाका खींचा — सांस्कृतिक आयोजन में राजनीतिक संदेश साफ़ था।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि 2014 से पहले भारत में हताशा, निराशा और भ्रष्टाचार का माहौल था।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब सीमा पार जाकर भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है — रक्षा मंत्री का दावा।
UPI को दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बताया; 10 से अधिक देश इसे अपना चुके हैं।
राम मंदिर के निर्माण में सात दशक की देरी को तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम बताया।
ये टिप्पणियाँ 'रामायण — एक महाकाव्य, अनेक कथाएं' नामक तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन पर कही गईं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत में हताशा और निराशा का माहौल था तथा भ्रष्टाचार एवं कुशासन के चलते आम नागरिकों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। उन्होंने कहा कि ऐसे विकट हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का रोडमैप तैयार किया गया।

सम्मेलन का संदर्भ और पृष्ठभूमि

राजनाथ सिंह 'रामायण — एक महाकाव्य, अनेक कथाएं: भारत और दुनिया में रामकथा' शीर्षक तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मंच से उन्होंने भारत की सभ्यतागत विरासत और वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को एक साथ रेखांकित किया। यह उल्लेखनीय है कि एक सांस्कृतिक-साहित्यिक आयोजन में रक्षा मंत्री ने राजनीतिक और शासन-सुधार के एजेंडे को भी प्रमुखता से उठाया।

12 वर्षों की उपलब्धियों का ब्यौरा

राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कोविड महामारी और अनेक वैश्विक संघर्षों का सामना किया, जिनसे विश्व अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। उन्होंने तर्क दिया कि भारत ने हर आपदा को अवसर में बदला और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम आगे बढ़ाए।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसने यह प्रदर्शित किया कि भारत अब सीमा पार जाकर भी दुश्मनों का सामना करने में सक्षम है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है।

वैश्विक नेतृत्व और तकनीकी पहचान

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज एक सभ्यतागत नेता के रूप में उभरा है। योग दिवस को पूरी दुनिया मनाने लगी है और भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रहा है।

उन्होंने UPI को दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय भुगतान प्रणाली बताते हुए कहा कि 10 से अधिक देश इसे अपना चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत की साख तेज़ी से बढ़ रही है।

युवाओं की भूमिका और जलवायु लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने देश के युवाओं को भारत की असली ताकत बताया। उन्होंने कहा कि युवा स्टार्टअप स्थापित कर यूनिकॉर्न कंपनियाँ बना रहे हैं और विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े कई लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं।

राम मंदिर और धर्मनिरपेक्षता पर टिप्पणी

रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भगवान राम का मंदिर बनने में सात दशक लग गए और राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने इसे तुष्टीकरण की राजनीति और पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता की उस अवधारणा का परिणाम बताया जो धर्म को राज्य एवं राजनीति के विरोधी के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि यह विचार भारतीय जीवन-दृष्टि के अनुकूल नहीं है और आज भारत भगवान राम के गुणों को आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि राजनाथ सिंह की यह टिप्पणियाँ एक ऐसे सांस्कृतिक आयोजन में आईं जो रामकथा की वैश्विक विरासत को रेखांकित करने के लिए आयोजित किया गया था — यानी राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श एक ही मंच पर मिलते नज़र आए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने आप में एक रणनीतिक चुनाव है। रामायण सम्मेलन जैसे आयोजन में राजनीतिक तुलनाएँ और धर्मनिरपेक्षता की आलोचना करना यह दर्शाता है कि सत्तापक्ष सभ्यतागत पहचान और शासन-प्रदर्शन के संदेश को एकीकृत करने की कोशिश कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर और नक्सलवाद के अंत के दावे सत्यापन की माँग करते हैं — दोनों पर विपक्ष और स्वतंत्र विश्लेषक अलग-अलग राय रखते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो प्रायः चूक जाती है, वह यह है कि इन भाषणों में राज्य-संस्थाओं की जवाबदेही का कोई ढाँचा नहीं दिया जाता — सफलता के दावे हैं, पर मापने का पैमाना नहीं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने 2014 से पहले के भारत के बारे में क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत में भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण हताशा और निराशा का माहौल था और आम लोगों का मनोबल टूट चुका था। उन्होंने इसके विपरीत मोदी सरकार के 12 वर्षों को उपलब्धियों का दौर बताया।
ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत अब सीमा पार जाकर भी दुश्मनों का सामना करने में सक्षम है। यह टिप्पणी उन्होंने नई दिल्ली में रामायण सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में की।
रामायण सम्मेलन क्या है जिसमें राजनाथ सिंह बोले?
'रामायण — एक महाकाव्य, अनेक कथाएं: भारत और दुनिया में रामकथा' एक तीन दिवसीय सम्मेलन है जो नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसके उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
राजनाथ सिंह ने राम मंदिर में देरी को किसका परिणाम बताया?
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राम मंदिर बनने में सात दशक लगे और यह तुष्टीकरण की राजनीति तथा पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता की उस अवधारणा का परिणाम था जो धर्म को राज्य के विरोध में देखती है। उन्होंने इसे भारतीय जीवन-दृष्टि के अनुकूल नहीं बताया।
UPI और वैश्विक नेतृत्व पर रक्षा मंत्री का क्या कहना था?
राजनाथ सिंह ने UPI को दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय भुगतान प्रणाली बताया और कहा कि 10 से अधिक देश इसे अपना चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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