राज्यसभा चुनाव: यूपी-उत्तराखंड में BJP के बहुमत का दावा, प्रेम शुक्ला बोले — जीत तय
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 22 सितंबर 2026 को राज्यसभा की 11 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव कराने की घोषणा की — जिसमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट शामिल है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव भी होगा। घोषणा के तुरंत बाद राजनीतिक दलों ने अपने-अपने दावे पेश करने शुरू कर दिए।
भाजपा का दावा — जीत निश्चित
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि राज्यसभा में पार्टी की सीटों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में भाजपा का विधानसभा में बहुमत है, इसलिए परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेंगे। राज्यसभा चुनाव में राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं, जिससे सत्ताधारी दल को स्वाभाविक बढ़त मिलती है।
लखनऊ में भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर प्रदेश से 8 सीटें जीती थीं और इस बार भी वह अपना रिकॉर्ड बनाए रखने का पूरा भरोसा रखती है। त्रिपाठी ने दावा किया कि भाजपा उत्तर प्रदेश की अधिकांश सीटें एक बार फिर जीतेगी।
SIR विवाद पर भाजपा का स्पष्टीकरण
विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर विपक्षी आरोपों को खारिज करते हुए प्रेम शुक्ला ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को जवाब देने का पूरा अवसर मिलेगा और जब तक वे जवाब नहीं देते, उनके नाम सूची से नहीं हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।
सोनिया गांधी पर भाजपा का हमला
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के 1980 की मतदाता सूची में नाम होने और 1983 में नागरिकता मिलने से जुड़े कथित विवाद पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। प्रेम शुक्ला ने आरोप लगाया कि यदि सोनिया गांधी 1980 में भारतीय नागरिक नहीं थीं, तो वे मतदाता के रूप में पंजीकृत कैसे हो सकती थीं। कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
समाजवादी पार्टी पर पलटवार
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी (SP) पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर जाति के आधार पर लोगों की भावनाएँ भड़काने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा के कार्यकाल में एक खास जाति के लोगों का सरकारी नौकरियों पर वर्चस्व था, जबकि भाजपा सरकार ने मेरिट, प्रतिभा और क्षमता के आधार पर नियुक्तियाँ की हैं। यह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी रण की तीव्रता का संकेत देता है।
आगे क्या
राज्यसभा की इन सीटों पर चुनाव की तारीखें अभी घोषित होनी हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा के संख्या-बल को देखते हुए भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, हालाँकि विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएँ अभी सामने आनी बाकी हैं। पश्चिम बंगाल उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रतिक्रिया भी अपेक्षित है।