बिहार: राज्यसभा चुनाव में अनुपस्थित कांग्रेस विधायक का एआईएमआईएम से समर्थन पर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- महागठबंधन की रणनीति पर सवाल उठाया गया है।
- कांग्रेस विधायक की अनुपस्थिति को हार से जोड़ा गया।
- एआईएमआईएम के समर्थन लेने पर चिंता जताई गई।
- राजनीतिक नैतिकता का सवाल खड़ा हुआ है।
- महागठबंधन में समन्वय की कमी दिखाई दे रही है।
पटना, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में राज्यसभा चुनाव में मतदान से अनुपस्थित रहने के नोटिस का जवाब देते हुए मनिहारी सीट से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने पार्टी नेतृत्व को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने महागठबंधन की रणनीति, विशेष रूप से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से समर्थन लेने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विधायक ने बताया कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में उनकी अनुपस्थिति को महागठबंधन उम्मीदवार की हार से जोड़कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि बिहार विधानसभा में महागठबंधन के पास राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक 41 विधायकों का आंकड़ा नहीं था। ऐसे में किसी अन्य दल का समर्थन लेना मजबूरी थी, लेकिन एनडीए को छोड़कर केवल एआईएमआईएम का समर्थन क्यों लिया गया, यह उन्हें स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल करने से इनकार किया गया था और उसे भाजपा की ‘बी टीम’ तथा सांप्रदायिक पार्टी करार दिया गया था। विधायक के अनुसार, उस समय एआईएमआईएम ने मात्र 5 सीटों की मांग की थी, फिर भी उसे गठबंधन से बाहर रखा गया।
राष्ट्रीय जनता दल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम से किन शर्तों पर समर्थन लिया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार, जिस दल को पहले वैचारिक आधार पर खारिज किया गया, उससे बाद में समर्थन लेना राजनीतिक नैतिकता और सिद्धांतों के खिलाफ है।
कांग्रेस विधायक ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा, आत्मसम्मान और राजनीतिक नैतिकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मतदान प्रक्रिया से दूर रहना उचित समझा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अनुपस्थिति के बावजूद महागठबंधन उम्मीदवार की हार सुनिश्चित थी।
इस घटनाक्रम ने महागठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।