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राखी गुलजार: 15 अगस्त को जन्मी अभिनेत्री जिसे फिल्मों ने शोहरत दी, पर प्यार ने अधूरापन

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राखी गुलजार: 15 अगस्त को जन्मी अभिनेत्री जिसे फिल्मों ने शोहरत दी, पर प्यार ने अधूरापन

सारांश

15 अगस्त को जन्मी राखी गुलजार के लिए आज़ादी का दिन और जन्मदिन एक ही है — लेकिन उनकी ज़िंदगी में शोहरत और दर्द भी साथ-साथ चले। फिल्मों ने उन्हें सब कुछ दिया, पर गुलजार के साथ प्रेम कहानी अधूरी रह गई। राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्म श्री तक — एक अभिनेत्री का अनूठा सफ़र।

मुख्य बातें

राखी गुलजार का जन्म 15 अगस्त 1947 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में हुआ।
उन्होंने 1967 में बंगाली फिल्म 'बधू बरण' और 1970 में हिंदी फिल्म 'जीवन मृत्यु' से करियर शुरू किया।
1971 की फिल्म 'शर्मीली' में डबल रोल से उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली।
गीतकार-निर्देशक गुलजार से 1973 में विवाह हुआ; बेटी मेघना गुलजार प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक हैं।
1990 में 'राम लखन' के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार मिला।
2003 में 'शुभ मुहूर्त' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित।

हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री राखी गुलजार का जन्म 15 अगस्त 1947 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में हुआ — वही दिन जब भारत को आज़ादी मिली। यह महज़ एक संयोग नहीं, बल्कि एक ऐसे सफ़र की शुरुआत थी जिसने हिंदी सिनेमा को दशकों तक एक बेमिसाल अदाकारा दी। नायिका से लेकर माँ तक हर किरदार में उनकी मासूमियत और गहराई ने उन्हें भारतीय दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह दिलाई।

फिल्मी सफ़र की शुरुआत

राखी ने 1967 में बंगाली फिल्म 'बधू बरण' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। 1970 में हिंदी फिल्म 'जीवन मृत्यु' में धर्मेंद्र के साथ उनकी पहली प्रमुख हिंदी भूमिका आई, जिसने उनके करियर की नींव रखी। इसके बाद फिल्मों की कतार लगती गई और 70 का दशक उनके करियर का स्वर्णिम काल बन गया।

1971 में आई 'शर्मीली' ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई, जिसमें उन्होंने डबल रोल निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। इसके बाद 'लाल पत्थर', 'पारस', 'दाग', 'कभी-कभी', 'त्रिशूल', 'कसमें वादे', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाइयाँ दीं। शशि कपूर के साथ उनकी जोड़ी पर्दे पर विशेष रूप से पसंद की गई।

निजी जीवन: उतार-चढ़ाव की दास्तान

महज़ 16 साल की उम्र में राखी की शादी बंगाली फिल्म निर्देशक अजय विश्वास से हुई। यह रिश्ता लगभग दो वर्ष ही टिक सका और दोनों अलग हो गए। शादी के टूटने के बाद राखी ने खुद को संभाला और अपना पूरा ध्यान अभिनय पर केंद्रित कर दिया।

करियर की उड़ान के बीच ही उनकी ज़िंदगी में मशहूर गीतकार, कवि और निर्देशक गुलजार आए। दोनों की मुलाकात धीरे-धीरे प्रेम में बदली और 1973 में दोनों ने विवाह किया। इसी वर्ष उनकी बेटी मेघना गुलजार का जन्म हुआ, जो आगे चलकर फिल्म निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहीं।

गुलजार से दूरी और अनकही कहानी

राखी और गुलजार की प्रेम कहानी वैसी नहीं रही जैसी दोनों ने सोची थी। कहा जाता है कि शादी के बाद राखी फिर से फिल्मों में सक्रिय होना चाहती थीं, जबकि गुलजार की इच्छा थी कि वह फिल्मों से दूरी बनाए रखें। इसी मतभेद ने दोनों के बीच दरार पैदा की।

फिल्म 'आंधी' की कश्मीर में हुई शूटिंग के दौरान एक घटना के बाद दोनों के बीच विवाद और गहरा हो गया — हालाँकि इस किस्से के अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं। इसके बाद दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ती गईं। यह ऐसे समय में आया जब राखी अपने करियर के शीर्ष पर थीं, जिससे उनकी निजी और पेशेवर ज़िंदगी के बीच का तनाव और स्पष्ट हो गया।

माँ के किरदार में नई पहचान

नायिका के रूप में सफलता के बाद राखी ने माँ और सशक्त महिला किरदारों को भी उतनी ही प्रभावशाली तरीके से निभाया। 'राम लखन', 'बाजीगर', 'खलनायक', 'करण अर्जुन', 'बॉर्डर', 'सोल्जर' और 'एक रिश्ता' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में ज़िंदा हैं। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है कि उन्होंने हिंदी सिनेमा के हर दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा।

पुरस्कार और सम्मान

राखी को 1990 में 'राम लखन' के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार मिला। इससे पहले 'तपस्या' और 'दाग' के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर सम्मान प्राप्त हुआ। 2003 में बंगाली फिल्म 'शुभ मुहूर्त' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री) से नवाज़ा गया। इसी वर्ष भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया। राखी गुलजार का जीवन इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और दृढ़ता से हर चुनौती को पार किया जा सकता है — चाहे वह पर्दे पर हो या परदे के पीछे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस दौर की महिलाओं के संघर्ष और स्वाभिमान का दस्तावेज़ है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राखी गुलजार का जन्म कब और कहाँ हुआ?
राखी गुलजार का जन्म 15 अगस्त 1947 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में हुआ। उनका जन्मदिन भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ मेल खाता है।
राखी गुलजार और गुलजार की शादी कब हुई और क्यों टूटी?
राखी और गीतकार-निर्देशक गुलजार ने 1973 में विवाह किया। कहा जाता है कि फिल्मों में वापसी को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुए और धीरे-धीरे दूरियाँ बढ़ती गईं, हालाँकि दोनों ने सार्वजनिक रूप से इस पर विस्तार से कभी नहीं बोला।
राखी गुलजार को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले?
राखी को 1990 में 'राम लखन' के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार, 2003 में बंगाली फिल्म 'शुभ मुहूर्त' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और उसी वर्ष पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इससे पहले 'तपस्या' और 'दाग' के लिए भी फिल्मफेयर सम्मान मिला।
राखी गुलजार की सबसे यादगार फिल्में कौन-सी हैं?
राखी की यादगार फिल्मों में 'शर्मीली', 'दाग', 'कभी-कभी', 'त्रिशूल', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'राम लखन', 'बाजीगर', 'करण अर्जुन' और 'बॉर्डर' शामिल हैं। उन्होंने नायिका और माँ दोनों किरदारों में समान दक्षता दिखाई।
मेघना गुलजार कौन हैं और उनका राखी से क्या संबंध है?
मेघना गुलजार, राखी गुलजार और गीतकार-निर्देशक गुलजार की बेटी हैं, जिनका जन्म 1973 में हुआ। वे 'राज़ी', 'तलवार' और 'छपाक' जैसी चर्चित फिल्मों की निर्देशक हैं और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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