29 जून 2026
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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आठों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश, बैंकों को नोटिस जारी

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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आठों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश, बैंकों को नोटिस जारी

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में जाँच तेज़ हो गई है — आठों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश होंगे, छह बैंकों को नोटिस जारी हुए हैं और 70 से 80 लोग जाँच के दायरे में हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज हो चुका है।

मुख्य बातें

आठों आरोपी 29 जून 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अयोध्या की अदालत में पेश होंगे; अभी हिरासत नहीं माँगी जाएगी।
SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक सहित छह बैंकों को खातों और लॉकरों का विवरण देने का नोटिस।
70 से 80 लोग जाँच के दायरे में; सभी आरोपियों के मोबाइल FSL को भेजे जाएँगे।
SBI कर्मचारी रत्नेश और गगनदीप जाँच के दायरे में; SBI ने तीन महीने पहले दान-गणना कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी।
पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज; पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को नोटिस संभावित।
सर्वोच्च न्यायालय ने फोरेंसिक ऑडिट की माँग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों को सोमवार, 29 जून 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अयोध्या की अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी हिरासत नहीं माँगी जाएगी — पहले पूछताछ के लिए प्रश्नों की विस्तृत सूची तैयार की जाएगी, उसके बाद आने वाले दिनों में न्यायिक हिरासत की अर्जी दी जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक सहित लगभग छह बैंकों को नोटिस जारी कर गिरफ्तार आरोपियों, ट्रस्ट और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बैंक खातों व लॉकरों का विवरण माँगा है। अधिकारियों के अनुसार, 70 से 80 लोग जाँच के दायरे में हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

सभी आरोपियों के मोबाइल फोन फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) को भेजे जाएँगे। जाँचकर्ताओं का मानना है कि आरोपियों ने अपने फोन से चैट डिलीट की हैं और डिलीट डेटा रिकवर करने के प्रयास जारी हैं।

एसबीआई शाखा और बैंक कर्मचारियों की भूमिका

अयोध्या पुलिस ने नया घाट स्थित SBI शाखा का दौरा किया, जहाँ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्राथमिक बैंक खाता है। जाँचकर्ता बैंक अधिकारियों की संभावित भूमिका की जाँच कर रहे हैं और शाखा प्रबंधक का बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।

SBI के दो वेतनभोगी कर्मचारी — रत्नेश और गगनदीप — भी जाँच के दायरे में हैं। ये दोनों दान की गिनती करने और नकदी को सुरक्षित रूप से बैंक तक पहुँचाने के लिए जिम्मेदार छह आउटसोर्स कर्मचारियों की देखरेख करते थे। गौरतलब है कि वे सभी छह आउटसोर्स कर्मचारी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, SBI ने अनियमितताओं की आशंका के चलते लगभग तीन महीने पहले दान-गणना कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी। हालाँकि, मंदिर ट्रस्ट के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर उनकी बर्खास्तगी का विरोध किया था।

ट्रस्ट पदाधिकारियों पर जाँच की आँच

पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, जाँच आगे बढ़ने पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। इस मामले में एफआईआर ट्रस्ट के एक सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुई, जब प्रारंभिक SIT रिपोर्ट में कई अनियमितताएँ सामने आईं।

रविवार को गिरफ्तार आठों आरोपियों के आवासों की तलाशी के दौरान एक आरोपी के घर से गहने और दस्तावेज बरामद किए गए। मंदिर की दान पेटियों से चोरी हुई संपत्ति की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का रुख

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में अदालत की निगरानी में जाँच और फोरेंसिक ऑडिट की माँग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

आगे क्या होगा

जाँचकर्ता पूछताछ की सूची तैयार कर आने वाले दिनों में हिरासत की अर्जी देंगे। 70 से 80 संदिग्धों के बयान चरणबद्ध तरीके से दर्ज होंगे और FSL की फोरेंसिक रिपोर्ट जाँच की दिशा तय करेगी। यह मामला देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी ही तेज़ी से यह सवाल उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक अनियमितताएँ नज़रअंदाज़ कैसे होती रहीं — खासकर जब SBI ने खुद तीन महीने पहले चेतावनी दी थी। ट्रस्ट के कुछ अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों की बर्खास्तगी का विरोध किए जाने का कथित तथ्य, यदि सत्यापित होता है, तो यह महज़ वित्तीय लापरवाही नहीं बल्कि संस्थागत मिलीभगत की ओर इशारा करता है। सर्वोच्च न्यायालय का तत्काल सुनवाई से इनकार पुलिस जाँच पर भरोसे का संकेत हो सकता है, लेकिन 70-80 संदिग्धों की संख्या और बैंकों तक फैली जाँच बताती है कि यह मामला अभी बहुत लंबा खिंचेगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला क्या है?
यह अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान और चढ़ावे के कथित गबन का मामला है, जिसमें प्रारंभिक SIT रिपोर्ट में अनियमितताएँ सामने आने के बाद ट्रस्ट सदस्य की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। अब तक आठ मतगणना कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में कैसे पेश किया जाएगा?
29 जून 2026 को सभी आठों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अयोध्या की अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने कहा है कि अभी हिरासत नहीं माँगी जाएगी — पहले पूछताछ की विस्तृत सूची तैयार होगी।
इस मामले में कितने लोग जाँच के दायरे में हैं?
अधिकारियों के अनुसार 70 से 80 लोग जाँच के दायरे में हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। SBI के दो कर्मचारी रत्नेश और गगनदीप भी जाँच के घेरे में हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को राम मंदिर की वित्तीय अनियमितताओं पर अदालत की निगरानी में जाँच और फोरेंसिक ऑडिट की माँग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
क्या ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी जाँच के दायरे में हैं?
पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान पुलिस पहले ही दर्ज कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार, जाँच आगे बढ़ने पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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