3 नवंबर 2026
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पंजाब चुनाव: भाजपा-अकाली गठबंधन हुआ तो बनेगी एनडीए सरकार — रामदास आठवले, आरपीआई माँगेगी 4-5 सीटें

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पंजाब चुनाव: भाजपा-अकाली गठबंधन हुआ तो बनेगी एनडीए सरकार — रामदास आठवले, आरपीआई माँगेगी 4-5 सीटें

सारांश

पंजाब में फरवरी के संभावित चुनाव से पहले आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने चंडीगढ़ में ताश के पत्ते खोले — BJP-अकाली गठबंधन हुआ तो NDA जीतेगी, और RPI 4-5 सीटें माँगेगी; नहीं मिलीं तो 10-15 पर स्वतंत्र मैदान में उतरेगी।

मुख्य बातें

रामदास आठवले ने 3 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में कहा — भाजपा-अकाली गठबंधन बना तो पंजाब में एनडीए सरकार बनेगी।
आरपीआई गठबंधन में 4-5 सीटें माँगेगी; न मिलने पर 10-15 मजबूत सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।
पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों पर शेष सीटों पर एनडीए को पार्टी का समर्थन रहेगा।
आरपीआई 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय; नागालैंड में पार्टी का विधायक भी है।
मणिपुर लोकसभा चुनाव में आरपीआई उम्मीदवार को लगभग डेढ़ लाख वोट मिले थे।

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने 3 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में पार्टी बैठक के बाद स्पष्ट किया कि फरवरी में संभावित पंजाब विधानसभा चुनाव में यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन बनता है, तो राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी बताया कि आरपीआई (RPI-आठवले) गठबंधन में 4-5 सीटें माँगेगी, और अगर सीटें न मिलीं तो पार्टी 10-15 मजबूत सीटों पर स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारेगी।

बैठक में क्या हुआ फैसला

चंडीगढ़ में आयोजित आरपीआई की प्रमुख नेताओं की बैठक में पंजाब चुनाव रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। आठवले ने बताया कि पहले प्राथमिकता गठबंधन में 4-5 सीटें हासिल करने की होगी। यदि यह संभव न हुआ, तो पार्टी पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 10-15 ऐसी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी जहाँ जीत या प्रभावशाली मत प्राप्त करने की संभावना हो। शेष सीटों पर पार्टी एनडीए को समर्थन देगी।

आठवले ने दिया पार्टी का राष्ट्रीय परिचय

आठवले ने कहा कि वे 2016 से केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और उनकी पार्टी 2014 से महाराष्ट्र से एनडीए का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना 3 अक्टूबर 1957 को नागपुर में हुई थी और यह पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा पर आधारित है। उनके अनुसार, आज यह पार्टी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है।

पूर्वोत्तर में पार्टी की मौजूदगी

आठवले ने बताया कि नागालैंड में आरपीआई का विधायक है और पार्टी को वहाँ मान्यता प्राप्त है। असम, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम में भी पार्टी काम कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मणिपुर लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार को लगभग डेढ़ लाख वोट मिले थे।

पंजाब में गठबंधन की पृष्ठभूमि

आठवले ने याद दिलाया कि प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल और भाजपा ने पंजाब में लंबे समय तक मिलकर सरकार चलाई। बाद में कांग्रेस सत्ता में आई, और अब आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राज्य में कार्यरत है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में आगामी फरवरी के चुनावों को लेकर विभिन्न दलों की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है।

एनडीए को जिताने का संकल्प

आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले बारह वर्षों में भारत ने प्रगति की है और 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे के तहत देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए काम हुआ है। पंजाब की जनता को यह संदेश पहुँचाना आरपीआई की प्राथमिकता होगी। आगामी हफ्तों में भाजपा-अकाली गठबंधन की संभावनाओं पर बातचीत और आरपीआई की सीट-माँग पर निर्णय पंजाब की चुनावी दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि दोनों दल 2020 के कृषि कानूनों के बाद अलग हुए थे और उस दरार को पाटना आसान नहीं होगा। दूसरी तरफ, आरपीआई की पंजाब में ज़मीनी ताकत सीमित है, और 'मजबूत उम्मीदवारों' वाली 10-15 सीटों का दावा अभी परखा जाना बाकी है। इस बयान को पार्टी की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने की रणनीति के रूप में पढ़ा जाए तो ज़्यादा सटीक होगा — असली परीक्षा तब होगी जब सीट-बँटवारे की बातचीत शुरू होगी।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास आठवले ने पंजाब चुनाव को लेकर क्या कहा?
रामदास आठवले ने 3 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में कहा कि यदि भाजपा और अकाली दल का गठबंधन होता है तो पंजाब में एनडीए की सरकार बनेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरपीआई पहले 4-5 सीटें माँगेगी और न मिलने पर 10-15 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।
पंजाब में आरपीआई की चुनावी रणनीति क्या है?
आरपीआई की रणनीति तीन स्तरीय है — पहले गठबंधन में 4-5 सीटें माँगना, फिर न मिलने पर 10-15 मजबूत सीटों पर अकेले उम्मीदवार उतारना, और पंजाब की शेष 117 सीटों पर एनडीए को समर्थन देना।
पंजाब विधानसभा चुनाव कब होने की संभावना है?
आठवले के बयान के अनुसार पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में भी उसी दौरान चुनाव हो सकते हैं।
भाजपा और अकाली दल का गठबंधन पहले कब टूटा था?
प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल और भाजपा ने पंजाब में लंबे समय तक सरकार चलाई। बाद में दोनों दलों के रास्ते अलग हुए, जिसके बाद कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी सत्ता में आई, जो वर्तमान में सत्तारूढ़ है।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) की राष्ट्रीय उपस्थिति कैसी है?
आरपीआई की स्थापना 3 अक्टूबर 1957 को नागपुर में हुई थी। आठवले के अनुसार यह पार्टी अब 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है, नागालैंड में पार्टी का विधायक है, और मणिपुर लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार को लगभग डेढ़ लाख वोट मिले थे।
राष्ट्र प्रेस
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