21 जुलाई 2026
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रामदास आठवले का बड़ा सवाल: महायुति में आरपीआई है या नहीं? एमएलसी सीट और प्रतिनिधित्व की माँग

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रामदास आठवले का बड़ा सवाल: महायुति में आरपीआई है या नहीं? एमएलसी सीट और प्रतिनिधित्व की माँग

सारांश

रामदास आठवले का सवाल — 'आरपीआई का नाम कहीं नहीं है' — महायुति की आंतरिक दरार को उजागर करता है। केंद्र में मंत्री पद के बावजूद महाराष्ट्र में एमएलसी सीट, महामंडल पद और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व न मिलना उनकी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

मुख्य बातें

रामदास आठवले ने 5 जून 2025 को कहा कि आरपीआई महायुति गठबंधन का हिस्सा है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमएलसी में एक सीट देने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।
आठवले ने दो महामंडल अध्यक्ष पद और 40-50 सदस्य देने की माँग रखी।
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में आरपीआई को कोई सीट नहीं दी गई; बीएमसी चुनावों में भी अनदेखी हुई।
आठवले ने डीपीडीसी , जिला-तालुका समितियों और बीएमसी समितियों में भी आरपीआई प्रतिनिधित्व की माँग की।
आठवले ने फडणवीस से मिलने का समय माँगा है और भरोसा जताया कि वादा पूरा होगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने 5 जून 2025 को मुंबई में यह सवाल उठाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है या नहीं। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में आरपीआई कार्यकर्ताओं को वह प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं।

गठबंधन में स्थिति पर अनिश्चितता

आठवले ने कहा, 'मेरे केंद्रीय मंत्रालय के पद से पता चलता है कि मेरी पार्टी एनडीए का हिस्सा है, लेकिन यह साफ नहीं है कि वह महायुति का हिस्सा है या नहीं। आरपीआई का नाम कहीं भी नहीं है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में मंत्रालय और तीसरी बार राज्यसभा सीट मिली है, लेकिन इसका श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं को जाता है जिन्हें महाराष्ट्र में कुछ भी नहीं मिल रहा।

उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा, 'उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में, जो भी पार्टियां भाजपा के साथ गठबंधन में हैं, उन्हें सीटें भी दी जाती हैं और कैबिनेट में जगह भी मिलती है।' यह तुलना गठबंधन धर्म पर एक सीधा सवाल है।

मुख्यमंत्री फडणवीस से वादे की याद

आठवले ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरपीआई को विधान परिषद (एमएलसी) में एक सीट देने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'मंत्रालय की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमएलसी में आरपीआई के लिए एक सीट देने का वादा किया था। हमें एमएलसी की सीटों में से एक सीट मिलनी चाहिए।'

इसके अलावा, उन्होंने दो 'महामंडल अध्यक्ष' पद और उनमें 40-50 सदस्य देने की भी माँग रखी, ताकि सभी जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को अवसर मिल सके। आठवले ने भरोसा जताया कि फडणवीस अपना वादा पूरा करेंगे और उनसे मिलने का समय भी माँगा गया है।

विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अनदेखी

आठवले ने खुलासा किया कि लोकसभा चुनावों के दौरान वे शिरडी से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन यह माँग पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जिस तरह BJP ने अपने कई राज्यसभा सदस्यों को लोकसभा में भेजा, उसी तरह उनकी भी इच्छा थी। विधानसभा चुनावों में भी आरपीआई को कोई सीट नहीं मिली और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में भी पार्टी को नज़रअंदाज़ किया गया।

गौरतलब है कि शिरडी से आठवले पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं — उस दौर में जब उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी और वे हार गए थे। उनका मानना था कि BJP के साथ रहकर वे वहाँ से जीत सकते थे।

स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व की माँग

आठवले ने डीपीडीसी, जिला और तालुका समितियों के साथ-साथ BMC के अंतर्गत आने वाली विभिन्न समितियों में भी आरपीआई कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने की माँग की। उन्होंने कहा, 'इन सभी में आरपीआई के कम से कम एक सदस्य को मौका दिया जाए।'

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति सरकार को अपने घटक दलों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। आरपीआई की यह नाराज़गी गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर करती है। आगे के घटनाक्रम पर सबकी नज़र फडणवीस और आठवले की संभावित मुलाकात पर टिकी होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास आठवले ने महायुति को लेकर क्या कहा?
आठवले ने कहा कि उनके केंद्रीय मंत्री पद से यह तो पता चलता है कि आरपीआई एनडीए का हिस्सा है, लेकिन महायुति गठबंधन में उनकी पार्टी का नाम कहीं नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा।
आरपीआई की महाराष्ट्र में क्या माँगें हैं?
आरपीआई ने एमएलसी में एक सीट, दो महामंडल अध्यक्ष पद, 40-50 सदस्यों की नियुक्ति, और डीपीडीसी, जिला-तालुका समितियों तथा बीएमसी समितियों में कम से कम एक-एक सदस्य को मौका देने की माँग की है।
देवेंद्र फडणवीस ने आरपीआई से क्या वादा किया था?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरपीआई को विधान परिषद (एमएलसी) में एक सीट देने का वादा किया था। आठवले के अनुसार यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है और उन्होंने फडणवीस से मिलने का समय माँगा है।
क्या आठवले ने लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी?
हाँ, आठवले ने बताया कि वे शिरडी से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन यह माँग पूरी नहीं हुई। वे पहले भी शिरडी से चुनाव लड़ चुके हैं — उस समय जब पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी।
आरपीआई और महायुति गठबंधन का इतिहास क्या है?
आरपीआई भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सहयोगी पार्टी रही है। आठवले केंद्र में तीसरी बार राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, लेकिन राज्य स्तर पर पार्टी को विधानसभा, लोकसभा और बीएमसी चुनावों में कोई सीट नहीं मिली।
राष्ट्र प्रेस
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