रामदास आठवले का बड़ा सवाल: महायुति में आरपीआई है या नहीं? एमएलसी सीट और प्रतिनिधित्व की माँग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने 5 जून 2025 को मुंबई में यह सवाल उठाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है या नहीं। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में आरपीआई कार्यकर्ताओं को वह प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं।
गठबंधन में स्थिति पर अनिश्चितता
आठवले ने कहा, 'मेरे केंद्रीय मंत्रालय के पद से पता चलता है कि मेरी पार्टी एनडीए का हिस्सा है, लेकिन यह साफ नहीं है कि वह महायुति का हिस्सा है या नहीं। आरपीआई का नाम कहीं भी नहीं है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में मंत्रालय और तीसरी बार राज्यसभा सीट मिली है, लेकिन इसका श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं को जाता है जिन्हें महाराष्ट्र में कुछ भी नहीं मिल रहा।
उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा, 'उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में, जो भी पार्टियां भाजपा के साथ गठबंधन में हैं, उन्हें सीटें भी दी जाती हैं और कैबिनेट में जगह भी मिलती है।' यह तुलना गठबंधन धर्म पर एक सीधा सवाल है।
मुख्यमंत्री फडणवीस से वादे की याद
आठवले ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरपीआई को विधान परिषद (एमएलसी) में एक सीट देने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'मंत्रालय की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमएलसी में आरपीआई के लिए एक सीट देने का वादा किया था। हमें एमएलसी की सीटों में से एक सीट मिलनी चाहिए।'
इसके अलावा, उन्होंने दो 'महामंडल अध्यक्ष' पद और उनमें 40-50 सदस्य देने की भी माँग रखी, ताकि सभी जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को अवसर मिल सके। आठवले ने भरोसा जताया कि फडणवीस अपना वादा पूरा करेंगे और उनसे मिलने का समय भी माँगा गया है।
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अनदेखी
आठवले ने खुलासा किया कि लोकसभा चुनावों के दौरान वे शिरडी से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन यह माँग पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जिस तरह BJP ने अपने कई राज्यसभा सदस्यों को लोकसभा में भेजा, उसी तरह उनकी भी इच्छा थी। विधानसभा चुनावों में भी आरपीआई को कोई सीट नहीं मिली और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में भी पार्टी को नज़रअंदाज़ किया गया।
गौरतलब है कि शिरडी से आठवले पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं — उस दौर में जब उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी और वे हार गए थे। उनका मानना था कि BJP के साथ रहकर वे वहाँ से जीत सकते थे।
स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व की माँग
आठवले ने डीपीडीसी, जिला और तालुका समितियों के साथ-साथ BMC के अंतर्गत आने वाली विभिन्न समितियों में भी आरपीआई कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने की माँग की। उन्होंने कहा, 'इन सभी में आरपीआई के कम से कम एक सदस्य को मौका दिया जाए।'
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति सरकार को अपने घटक दलों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। आरपीआई की यह नाराज़गी गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर करती है। आगे के घटनाक्रम पर सबकी नज़र फडणवीस और आठवले की संभावित मुलाकात पर टिकी होगी।