2029 में मोदी फिर PM बनेंगे, गांव की दादी भी कह रही हैं: रामदास आठवले का दावा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 7 जुलाई को शिरडी में दावा किया कि 2029 के आम चुनाव में भी नरेंद्र मोदी चौथी बार प्रधानमंत्री बनेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार केंद्र में लौटेगी। आठवले ने अपने दावे को जनभावना से जोड़ते हुए कहा कि गांव-गांव की बुजुर्ग महिलाएं भी यही मानती हैं।
मोदी पर आठवले का भरोसा
आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह स्वस्थ हैं और अगले आठ साल तक देश की सेवा करने में सक्षम हैं। उनके अनुसार, फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के समकक्ष कोई नेता नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सभी को साथ लेकर चलते हैं और विकास को प्राथमिकता देते हैं।
आठवले ने यह भी स्पष्ट किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि किसी एक को चुनना हो तो वे मोदी को प्राथमिकता देंगे।
उद्धव ठाकरे पर निशाना
आठवले ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके शेष विधायकों में से 14-15 विधायक भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे 'ऑपरेशन उद्धव ठाकरे' करार दिया। उनके अनुसार, उद्धव के 6 बागी सांसद पहले ही शिंदे गुट में जा चुके हैं और यह सिलसिला जारी है।
आठवले ने कहा कि 2019 में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल थी। उनका मानना है कि यदि उद्धव महायुति के साथ रहते, तो उन्हें इस तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।
महाड चवदार टैंक सत्याग्रह शताब्दी और सामाजिक समानता मार्च
आठवले ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नेतृत्व में हुए महाड चवदार टैंक सत्याग्रह के 100 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख किया। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए एक 'सामाजिक समानता मार्च' का आयोजन किया जा रहा है, जो पूरे महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा और 18 नवंबर को पुणे में संपन्न होगा।
आठवले के अनुसार, इस मार्च का उद्देश्य पिछले कुछ वर्षों में आए सामाजिक बदलावों पर विचार करना और समाज में एकता को सुदृढ़ करना है। यह आयोजन अंबेडकरवादी आंदोलन की विरासत को जीवित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है और 2029 के चुनावों को लेकर सभी दलों में रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। NDA की ओर से इस तरह के दावे सत्ता-पक्ष की आत्मविश्वास की राजनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।