रांची से अगवा 4 वर्षीय बच्चा 48 घंटे में साहिबगंज से सकुशल बरामद, 5 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से 24 सितंबर 2026 को अगवा किए गए चार वर्षीय बच्चे को झारखंड पुलिस ने करीब 48 घंटे के भीतर साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से सकुशल बरामद कर लिया। इस सफल अभियान में पुलिस ने धनबाद और साहिबगंज में समन्वित कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह मामला एक अंतर-जिला अपहरण गिरोह से जुड़ा प्रतीत होता है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ अपहरण
24 सितंबर की सुबह बच्चा अपनी माँ के साथ रांची रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। परिजनों ने काफी तलाश के बाद घटना की सूचना पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक पारस राणा के नेतृत्व में तत्काल एक विशेष जाँच टीम गठित की गई।
पुलिस की जाँच और तकनीकी निगरानी
विशेष टीम ने स्टेशन परिसर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और साथ ही तकनीकी निगरानी व मानवीय सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया। जाँच के दौरान संकेत मिले कि बच्चे को रांची से बाहर ले जाया गया है। इसके बाद पुलिस ने संभावित ठिकानों की पहचान कर दूसरे जिलों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया।
धनबाद में पहली सफलता, साहिबगंज में बच्चा बरामद
26 सितंबर की देर रात पुलिस टीम को पहली महत्वपूर्ण सफलता धनबाद रेलवे स्टेशन के आसपास से एक संदिग्ध आरोपी को पकड़कर मिली। उससे हुई पूछताछ और प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने साहिबगंज पुलिस के सहयोग से तीनपहाड़ इलाके में घेराबंदी की। इसी कार्रवाई में चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया और बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे परिजनों को सौंपा जाएगा।
आगे की जाँच: गिरोह के और सदस्यों की तलाश
पुलिस अब गिरफ्तार पाँचों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जाँच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अपहरण के पीछे का उद्देश्य क्या था और इस गिरोह में कितने और लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य जिलों में उनकी गतिविधियों की भी जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में अंतर-जिला अपराध गिरोहों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता एक अहम चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि रेलवे स्टेशन जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों से बच्चों के अपहरण की घटनाएँ देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं।