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रांची से अगवा 4 वर्षीय बच्चा 48 घंटे में साहिबगंज से सकुशल बरामद, 5 आरोपी गिरफ्तार

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रांची से अगवा 4 वर्षीय बच्चा 48 घंटे में साहिबगंज से सकुशल बरामद, 5 आरोपी गिरफ्तार

सारांश

रांची रेलवे स्टेशन से अगवा चार साल के मासूम को झारखंड पुलिस ने महज 48 घंटों में साहिबगंज के तीनपहाड़ से सकुशल बरामद किया। धनबाद से शुरू हुई कार्रवाई में पाँच आरोपी दबोचे गए। पुलिस अब अंतर-जिला अपहरण गिरोह की पूरी कड़ी को उजागर करने में जुटी है।

मुख्य बातें

24 सितंबर 2026 को रांची रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर से 4 वर्षीय बच्चे का अपहरण हुआ।
पुलिस ने करीब 48 घंटे के भीतर बच्चे को साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से सकुशल बरामद किया।
धनबाद और साहिबगंज में समन्वित कार्रवाई में पाँच आरोपी गिरफ्तार किए गए।
प्रारंभिक जाँच में मामला अंतर-जिला अपहरण गिरोह से जुड़ा सामने आया है।
वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक पारस राणा के नेतृत्व में विशेष जाँच टीम गठित की गई थी।
पुलिस गिरोह के शेष सदस्यों और अपहरण के उद्देश्य की जाँच जारी रखे हुए है।

रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से 24 सितंबर 2026 को अगवा किए गए चार वर्षीय बच्चे को झारखंड पुलिस ने करीब 48 घंटे के भीतर साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से सकुशल बरामद कर लिया। इस सफल अभियान में पुलिस ने धनबाद और साहिबगंज में समन्वित कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह मामला एक अंतर-जिला अपहरण गिरोह से जुड़ा प्रतीत होता है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ अपहरण

24 सितंबर की सुबह बच्चा अपनी माँ के साथ रांची रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। परिजनों ने काफी तलाश के बाद घटना की सूचना पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक पारस राणा के नेतृत्व में तत्काल एक विशेष जाँच टीम गठित की गई।

पुलिस की जाँच और तकनीकी निगरानी

विशेष टीम ने स्टेशन परिसर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और साथ ही तकनीकी निगरानी व मानवीय सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया। जाँच के दौरान संकेत मिले कि बच्चे को रांची से बाहर ले जाया गया है। इसके बाद पुलिस ने संभावित ठिकानों की पहचान कर दूसरे जिलों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया।

धनबाद में पहली सफलता, साहिबगंज में बच्चा बरामद

26 सितंबर की देर रात पुलिस टीम को पहली महत्वपूर्ण सफलता धनबाद रेलवे स्टेशन के आसपास से एक संदिग्ध आरोपी को पकड़कर मिली। उससे हुई पूछताछ और प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने साहिबगंज पुलिस के सहयोग से तीनपहाड़ इलाके में घेराबंदी की। इसी कार्रवाई में चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया और बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे परिजनों को सौंपा जाएगा।

आगे की जाँच: गिरोह के और सदस्यों की तलाश

पुलिस अब गिरफ्तार पाँचों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जाँच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अपहरण के पीछे का उद्देश्य क्या था और इस गिरोह में कितने और लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य जिलों में उनकी गतिविधियों की भी जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में अंतर-जिला अपराध गिरोहों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता एक अहम चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि रेलवे स्टेशन जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों से बच्चों के अपहरण की घटनाएँ देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि रांची जैसे व्यस्त रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर से बच्चे का अपहरण हो कैसे गया। सीसीटीवी निगरानी और पुलिस गश्त की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा की कमियों को उजागर करती हैं। अंतर-जिला गिरोह का कोण यह भी संकेत देता है कि यह कोई अकेली वारदात नहीं हो सकती — बड़े नेटवर्क की जड़ें खोदना अब जाँच की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची रेलवे स्टेशन से अगवा बच्चा कहाँ और कैसे बरामद हुआ?
पुलिस ने बच्चे को साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से 26 सितंबर की देर रात और 27 सितंबर की सुबह के बीच बरामद किया। धनबाद से पकड़े गए एक संदिग्ध की निशानदेही पर साहिबगंज पुलिस के सहयोग से घेराबंदी कर यह सफलता मिली।
इस अपहरण कांड में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
कुल पाँच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। पहला संदिग्ध धनबाद रेलवे स्टेशन के आसपास से पकड़ा गया, जबकि शेष चार आरोपी साहिबगंज के तीनपहाड़ में घेराबंदी के दौरान गिरफ्तार हुए।
बच्चे के अपहरण के पीछे क्या उद्देश्य था?
पुलिस के अनुसार, अपहरण के पीछे का उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जाँचकर्ता मामले को एक अंतर-जिला अपहरण गिरोह से जुड़ा मान रहे हैं।
इस मामले की जाँच किसकी निगरानी में हुई?
वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर नगर पुलिस अधीक्षक पारस राणा के नेतृत्व में विशेष जाँच टीम गठित की गई। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचना तंत्र का उपयोग करते हुए अभियान चलाया।
अब बच्चे का क्या होगा और जाँच आगे कहाँ जाएगी?
बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान, आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य जिलों में उनकी गतिविधियों की जाँच जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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