रांची RSS कार्यालय पेट्रोल बम हमला: मुख्य आरोपी सैफ हवालात से फरार, मुठभेड़ में गोली लगने के बाद दोबारा गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के झारखंड प्रांत कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले का मामला 18 जून 2025 को नाटकीय मोड़ पर पहुँच गया, जब इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी सैफ पुलिस हिरासत से फरार हो गया। बाद में मांडर क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में गोली लगने के बाद उसे पुनः गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
हवालात से फरार होने की घटना
पुलिस के अनुसार, सैफ को कोतवाली थाना परिसर के हवालात में रखा गया था। गुरुवार दोपहर वह पुलिस कस्टडी से भाग निकला। इसके तुरंत बाद पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुट गईं। यह घटना उस समय और संवेदनशील हो गई जब आरोपी ने भागने के दौरान कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया और फायरिंग शुरू कर दी।
मुठभेड़ और पुनः गिरफ्तारी
मांडर क्षेत्र में आरोपी को घेरने की कोशिश के दौरान पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सैफ घायल हो गया। उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया। इस प्रकार मूल हमले के बाद यह मामला एक और गंभीर कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया। गौरतलब है कि यह उस थाने की हिरासत से फरारी है जहाँ आरोपी को सुरक्षित माना जा रहा था।
मूल हमले का घटनाक्रम
चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित RSS झारखंड प्रांत कार्यालय पर देर रात पेट्रोल बम से हमला किया गया था। सीसीटीवी फुटेज में दो युवक कार्यालय परिसर की ओर बम फेंकते दिखाई दिए। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और कार्यालय को भी बड़ा भौतिक नुकसान नहीं पहुँचा, हालाँकि परिसर में मौजूद लोगों की जान को खतरा उत्पन्न हुआ।
एफआईआर और यूएपीए की धाराएँ
RSS के झारखंड प्रांत प्रमुख नरसिंह कुमार की शिकायत पर चुटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में इसे एक गंभीर साजिश बताते हुए गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कार्रवाई की माँग की गई थी। पुलिस ने मामले में यूएपीए की धाराएँ भी जोड़ी हैं। अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जाँच का दायरा और आगे की राह
जाँच एजेंसियाँ हमले के पीछे की साजिश, आरोपियों के आपसी संपर्क और संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। RSS की ओर से कार्यालय परिसर के आसपास स्थायी पुलिस पिकेट स्थापित करने और सुरक्षा बढ़ाने की माँग की गई है। संगठन का कहना है कि परिसर में नियमित रूप से कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहते हैं, इसलिए भविष्य में ऐसी घटनाएँ बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं। अधिकारियों के अनुसार मामले की जाँच जारी है और सभी पहलुओं की गहन छानबीन की जा रही है।