रांची RSS कार्यालय पेट्रोल बम हमला: आरोपी का दुबई कनेक्शन, TТН से जुड़े संपर्कों की जांच
सारांश
मुख्य बातें
रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के मामले में सुरक्षा एजेंसियों की जांच अब संभावित विदेशी कनेक्शन की दिशा में मुड़ गई है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से एक व्यक्ति लंबे समय तक दुबई में रह चुका है और उसके कुछ संदिग्ध विदेशी संपर्कों की जानकारी सामने आई है, जिनके कथित तौर पर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
दुबई कनेक्शन और TТН की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के दुबई प्रवास के दौरान कुछ ऐसे व्यक्तियों से संपर्क होने की जानकारी मिली है, जिनके संबंध कथित तौर पर तहरीक-ए-तालिबान हिंद (TТН) नामक संगठन से होने की बात सामने आई है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। एजेंसियां इन संपर्कों के संभावित आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका की जांच कर रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम और गिरफ्तारियां
पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो को बुधवार शाम दिल्ली की ओर भागने के दौरान पकड़ा गया, जबकि तीसरा आरोपी बाद की कार्रवाई में पकड़ा गया। गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक गुरुवार दोपहर रांची के कोतवाली थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को चकमा देकर बाथरूम की खिड़की से कूदकर फरार हो गया था। करीब डेढ़ घंटे बाद रांची के मांडर में एक मुठभेड़ के बाद उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया। रांची के एसएसपी राकेश रंजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी खुद मुठभेड़ स्थल पर पहुंचे थे।
हमले की तैयारी और साजिश
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने घटना से पहले RSS कार्यालय की रेकी की थी। पेट्रोल बम तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई कांच की बोतलें, पेट्रोल और अन्य सामग्री स्थानीय बाजार से खरीदी गई थी। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर मोलोटोव कॉकटेल तैयार कर निवारणपुर स्थित कार्यालय को निशाना बनाया।
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से दो लोहरदगा जिले के निवासी हैं, जबकि तीसरा रांची का रहने वाला बताया जा रहा है।
डिजिटल साक्ष्य और विदेशी फंडिंग की पड़ताल
एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड, बैंक खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि स्थानीय स्तर पर आरोपियों को किस तरह की मदद मिली और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
आगे क्या होगा
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती जांच में मिले इनपुट महत्वपूर्ण हैं, लेकिन मामले के सभी पहलुओं की पुष्टि के बाद ही किसी बड़े नेटवर्क या अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने से इनकार नहीं किया गया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में संगठित आतंकी नेटवर्क और उनके स्थानीय सहयोगियों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी पहले से कड़ी है।