रांची आरएसएस दफ्तर पेट्रोल बम हमला: मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ईडी की 4 राज्यों में एक साथ छापेमारी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 17 सितंबर 2026 को रांची के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक साथ चार राज्यों — दिल्ली, बिहार, झारखंड और कर्नाटक — में तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज मूल मामले से जुड़ी है और इसका मकसद हमले के संभावित वित्तीय नेटवर्क तथा फंडिंग स्रोतों का खुलासा करना है।
मुख्य घटनाक्रम
16 जून 2026 की रात रांची के निवारणपुर स्थित आरएसएस के प्रांतीय कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंके गए थे। शुरुआती जांच में रांची पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एनआईए ने मामला अपने हाथ में लेकर हमले की कथित साजिश, आरोपियों के नेटवर्क और अंतरराज्यीय कनेक्शन की विस्तृत जांच शुरू की। एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे आरसी-01/2026/एनआईए/आरएनसी के तौर पर दर्ज किया गया है।
ईडी की छापेमारी में क्या मिला
ईडी की टीमों ने चारों राज्यों में संदिग्धों से जुड़े परिसरों की तलाशी के दौरान दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य खंगाले। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले की साजिश रचने या उसे अंजाम देने के लिए किसी प्रकार की अवैध फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिया गया था या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद डिजिटल सामग्री की जांच जारी है।
एनआईए की पहले की कार्रवाई
गौरतलब है कि एनआईए इससे पहले भी कई राज्यों में तलाशी अभियान चला चुकी है। इसी महीने पटना में एजेंसी ने कुछ परिसरों की तलाशी ली थी और लाखों रुपये बरामद किए थे। जुलाई 2026 में एनआईए ने संकेत दिया था कि आरोपियों से पूछताछ के बाद जांच को अन्य लोगों और डिजिटल उपकरणों तक विस्तारित किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच के दौरान कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की बात भी सामने आई है। विभिन्न जांच रिपोर्टों में आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर और अन्य लोगों से संपर्क के दावे किए गए हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
आगे क्या होगा
ईडी की ताज़ा कार्रवाई के बाद जांच का फोकस अब हमले के संभावित वित्तीय नेटवर्क और फंडिंग के स्रोतों पर केंद्रित हो गया है। दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच-पड़ताल पूरी होने पर आगे की गिरफ्तारियों या आरोप-पत्र की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला देश की केंद्रीय एजेंसियों के लिए एक बहुस्तरीय जांच की मिसाल बनता जा रहा है।