आरएसएस कार्यालय पेट्रोल बम हमला: एनआईए ने लोहरदगा में सुबह 4 बजे एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 16 जुलाई 2026 को तड़के झारखंड के लोहरदगा जिले में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की — यह कार्रवाई रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच का हिस्सा है। एजेंसी की विशेष टीम ने संदिग्धों के परिसरों से डिजिटल उपकरण, दस्तावेज़ और अन्य संभावित साक्ष्य ज़ब्त किए।
छापेमारी का घटनाक्रम
एनआईए की विशेष टीम सुबह करीब 4 बजे स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ लोहरदगा पहुंची। टीम ने अलग-अलग स्थानों पर समन्वित तरीके से तलाशी अभियान चलाया, जिसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और अन्य दस्तावेज़ों की जांच की गई। सूत्रों के अनुसार, कुछ सामग्री को आगे की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के लिए ज़ब्त भी किया गया।
न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों के ठिकानों पर भी कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस मामले में न्यायिक हिरासत में बंद सैफ अंसारी और अमन अंसारी से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली। अमन अंसारी के आवास पर कार्रवाई के दौरान मुख्य दरवाज़ा नहीं खुलने पर एनआईए ने बिजली विभाग की क्रेन की सहायता से भवन के ऊपरी हिस्से से प्रवेश कर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल के आसपास जमा हो गए।
जांच की दिशा और साक्ष्य संग्रह
बताया जा रहा है कि एजेंसी हमले के पीछे सक्रिय नेटवर्क, संदिग्ध संपर्कों और कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने के लिए साक्ष्य एकत्र कर रही है। बरामद डिजिटल सामग्री का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि घटना में शामिल संदिग्धों के बीच किस प्रकार का संपर्क और समन्वय था। एनआईए ने फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
मूल हमले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि रांची स्थित आरएसएस प्रांत कार्यालय पर 16 जून 2026 की रात पेट्रोल बम से हमला किया गया था। इस मामले की जांच शुरुआत में स्थानीय एजेंसियों ने की थी, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया। इससे पहले 19 जून 2026 को भी एजेंसी लोहरदगा में कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। 16 जुलाई की कार्रवाई को उसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है — यानी हमले के एक महीने बाद भी जांच का दायरा सिकुड़ने की बजाय बढ़ता दिख रहा है।
आगे क्या होगा
ज़ब्त डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच के बाद एनआईए की अगली कार्रवाई तय होगी। यह मामला न केवल झारखंड बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी संवेदनशील है, क्योंकि हमले का निशाना एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन का कार्यालय था।