रंगभरी एकादशी: काशी में रसिया लाएंगे मथुरा से, रंग और फूलों की होली का होगा आयोजन

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रंगभरी एकादशी: काशी में रसिया लाएंगे मथुरा से, रंग और फूलों की होली का होगा आयोजन

सारांश

रंगभरी एकादशी पर काशी में एक अद्भुत उत्सव मनाया जाता है, जहां भक्त बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का स्वागत करते हैं। इस दिन मथुरा के रसिया काशी पहुंचकर रंग और फूलों की होली खेलेंगे। जानिए इस उत्सव का महत्व और मान्यताएं।

Key Takeaways

  • रंगभरी एकादशी काशी का एक प्रमुख त्योहार है।
  • इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्वागत किया जाता है।
  • मथुरा के रसिया भी इस दिन काशी में रंग खेलते हैं।
  • यह दिन भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
  • मंदिरों को सजाया जाता है और भव्य डोला निकाला जाता है।

वाराणसी, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। रंगभरी एकादशी के अवसर पर शिवनगरी काशी में एक अनोखी रंग-बिरंगी खुशी का माहौल बनता है। यह त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जो होली (फगुआ) से ठीक चार दिन पहले आता है। मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को उनके मायके से काशी लाते हैं।

इस उत्सव की खुशी में पूरा शहर भक्ति, रंग और फूलों से सजे रहता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंगभरी एकादशी को भगवान शिव माता गौरा के साथ गौना बारात लेकर काशी पहुंचते हैं। यह परंपरा बहुत पुरानी है। इसी कारण इस दिन काशीवासी बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का विशेष स्वागत करते हैं। शहर के हर कोने में 'नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव' का जयकारा गूंज उठता है। जहां अन्य स्थानों पर होली की तैयारियां होती हैं, वहीं काशी में भक्त बाबा और माता से अनुमति लेकर होली खेलना आरंभ कर देते हैं। लोग गुलाल, अबीर और फूलों की वर्षा से उनका स्वागत करते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है, दीप जलाए जाते हैं और चारों ओर खुशी का वातावरण रहता है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भव्य डोला निकाला जाता है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का डोला गलियों से गुजरता है और सम्पूर्ण क्षेत्र रंगों में सराबोर हो जाता है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। स्पर्श दर्शन की व्यवस्था नहीं होगी। इस बार एक खास बात यह है कि मथुरा-ब्रज की रास परंपरा भी काशी में देखने को मिलेगी। ब्रज के रसिया और रंग खेलने वाले यहां पहुंचेंगे और रास का आयोजन करेंगे।

काशी के निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी के अनुसार, काशीवासी देवी-देवताओं के साथ मिलकर बाबा और माता के आगमन की खुशी मनाते हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार भक्त रंग चढ़ाकर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं। इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को उनके ससुराल का भ्रमण भी कराते हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से, रंगभरी एकादशी पर शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और जीवन की कई समस्याएं दूर होती हैं। काशी के हर मंदिर को इस दिन सजाया जाता है।

Point of View

जो न केवल भक्तों के लिए एक सांस्कृतिक अनुभव है, बल्कि यह शहर की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है। इस दिन की मान्यताएं और उत्सव का आयोजन काशीवासियों के लिए एक विशेष महत्व रखता है।
NationPress
28/02/2026

Frequently Asked Questions

रंगभरी एकादशी कब मनाई जाती है?
रंगभरी एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है।
इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है?
इस दिन भगवान शिव माता पार्वती की पूजा का विशेष विधान है, जिससे मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
काशी में रंगभरी एकादशी कैसे मनाई जाती है?
काशी में भक्त बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य स्वागत करते हैं और फूलों एवं रंगों के साथ होली खेलते हैं।
क्या इस दिन मथुरा से रसिया आते हैं?
हाँ, इस दिन मथुरा के रसिया काशी में रंग खेलने के लिए आते हैं।
क्या इस दिन मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं?
जी हाँ, इस दिन सभी मंदिरों को सजाया जाता है और भव्य डोला निकाला जाता है।
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