राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर पांडुम 2026 के विजेताओं से की मुलाकात, जनजातीय संस्कृति और विकास को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में बस्तर मंडल के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पांडुम 2026 के विजेता, बस्तर के परगना मांझी और चलाकी, तथा पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियाँ शामिल थीं। राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का सम्मान किया और उनसे विस्तृत संवाद किया।
मुलाकात में कौन-कौन रहे मौजूद
इस महत्त्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा गया कि राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का सम्मान किया और उनसे बातचीत की।
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मिली सराहना
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में बस्तर की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि 'बस्तर पांडुम' जैसे सांस्कृतिक आयोजनों ने युवा पीढ़ी को उनकी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पुरखों की थाती से पुनः जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि ऐसे उत्सव केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं हैं — ये पर्यटन को गति देते हैं और स्थानीय समुदायों के लिए रोज़गार के नए द्वार खोलते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदाय की प्रतिभा जब देश-दुनिया के सामने आती है, तो क्षेत्र की पहचान और अधिक सुदृढ़ होती है।
बस्तर में बदलाव पर राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर में आए सकारात्मक परिवर्तनों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, "बस्तर में आया बदलाव पूरे देश के लिए खुशी और गर्व की बात है।" उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के लोग अपनी सामूहिक शक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर विकास, शांति और समृद्धि की नई ऊँचाइयाँ अर्जित करेंगे।
केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता
राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार हर परिस्थिति में बस्तर और छत्तीसगढ़ के विकास के साथ दृढ़ता से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और स्वरोज़गार को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बस्तर क्षेत्र में नक्सल-विरोधी अभियानों के बाद शांति और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज़ हुई है, और जनजातीय संस्कृति को मुख्यधारा में लाने के प्रयास बढ़े हैं।