क्या आप जानते हैं राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का महत्व? डॉ. राजवर्धन झा आजाद की अपील

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क्या आप जानते हैं राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का महत्व? डॉ. राजवर्धन झा आजाद की अपील

सारांश

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा, जो २५ अगस्त से ८ सितंबर तक मनाया जाता है, लोगों को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। डॉ. राजवर्धन झा आजाद ने इस पखवाड़े के तहत कॉर्नियल ब्लाइंडनेस की गंभीरता और नेत्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Key Takeaways

  • नेत्रदान का महत्व समझें।
  • कॉर्नियल ब्लाइंडनेस की समस्या को पहचानें।
  • हर साल होने वाले नेत्रदान पखवाड़ा में भाग लें।
  • लोगों को जागरूक करने के लिए प्रयास करें।
  • अंधेपन के खिलाफ लड़ाई में मदद करें।

पटना, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर वर्ष २५ अगस्त से ८ सितंबर तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत १९८५ में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य समाज में नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना एवं कॉर्नियल ब्लाइंडनेस की समस्या को कम करना है। इस दौरान अनेक आई बैंक, चिकित्सक, और सामाजिक संस्थाएं लोगों को प्रेरित करते हैं कि मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान कर दूसरों को रोशनी दें।

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के अकादमिक एवं शोध सलाहकार, आईजीआईएमएस पटना के प्रोफेसर एमेरिटस, और डॉ. आरपी सेंटर, एम्स नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. राजवर्धन झा आजाद ने बताया कि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है।

डॉ. राजवर्धन झा आजाद ने कहा कि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस तब होती है जब आंख की पारदर्शी परत यानी कॉर्निया अपनी चमक खो देती है, जिससे व्यक्ति की दृष्टि बाधित हो जाती है। भारत में वर्ष २०२० तक अनुमानित एक करोड़ से अधिक लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हो चुके हैं और हर साल इसमें २५ से ३० हजार नए मरीज जुड़ते हैं। ऐसे में देश में हर वर्ष लगभग १ से १.५ लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।

नेत्रदान की कमी को गंभीर बताते हुए डॉ. आजाद ने कहा कि वर्तमान में भारत में केवल २५ से ३० हजार प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं, जबकि आवश्यकता इससे कई गुना अधिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि लाखों लोग सिर्फ इसलिए अंधेपन से जूझते रहते हैं, क्योंकि उन्हें दान किया गया कॉर्निया उपलब्ध नहीं हो पाता।

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत ही सरल है। मृत व्यक्ति से कॉर्निया निकालकर जरूरतमंद मरीज की आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस सर्जरी से मरीज की फिर से देखने की क्षमता मिल सकती है।

डॉ. आजाद ने कहा कि नेत्रदान पखवाड़ा इसी कमी को पूरा करने का प्रयास है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि इस महादान में बढ़-चढ़कर भाग लें, ताकि जिन आंखों से जीवन देखा गया, वे किसी और को भी रोशनी दे सकें।

Point of View

यह स्पष्ट है कि नेत्रदान का महत्व समाज में अंधेपन की समस्या को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमें इस दिशा में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि हर व्यक्ति को रोशनी मिल सके।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

नेत्रदान क्यों महत्वपूर्ण है?
नेत्रदान से अंधेपन का इलाज संभव है और लाखों लोगों को रोशनी मिल सकती है।
कॉर्नियल ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है?
यह प्रक्रिया सरल है, जिसमें मृत व्यक्ति से कॉर्निया निकालकर जरूरतमंद मरीज की आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है।