4 अक्टूबर 2026
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आरबीआई नीति, Q2 नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव: अगले हफ्ते इन 5 कारकों पर टिकी बाजार की नजर

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आरबीआई नीति, Q2 नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव: अगले हफ्ते इन 5 कारकों पर टिकी बाजार की नजर

सारांश

लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ निफ्टी, सेंसेक्स 1,670 अंक टूटा। अगले हफ्ते RBI की नीति समीक्षा, Q2 नतीजे और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव — ये तीनों मिलकर तय करेंगे कि बाजार राहत रैली की राह पकड़ेगा या गिरावट जारी रहेगी।

मुख्य बातें

सेंसेक्स साप्ताहिक आधार पर 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ; निफ्टी 3% से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आया।
निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ — साप्ताहिक RSI 31.06 पर, ओवरसोल्ड जोन के करीब।
निफ्टी के लिए प्रमुख प्रतिरोध 22,800 और 23,000 ; समर्थन स्तर 22,350 और 22,180 ।
अगस्त में भारत की IIP वृद्धि 8% रही, जुलाई के 7.4% से अधिक; विनिर्माण में 9% और बिजली-गैस में 12.3% की बढ़त।
अगले सप्ताह RBI मौद्रिक नीति , Q2 कॉरपोरेट नतीजे , पश्चिम एशिया की स्थिति , कच्चा तेल और अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

भारतीय शेयर बाजार में 4 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुए कारोबारी सप्ताह में वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक अहम मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह निवेशकों की निगाहें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही (Q2) के कॉरपोरेट नतीजों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर केंद्रित रहेंगी, जो बाजार की अगली दिशा निर्धारित कर सकते हैं।

बीते सप्ताह बाजार का हाल

पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी पहले कारोबारी दिन से ही दिखाई दी। सोमवार को सेंसेक्स 1.52% लुढ़का और गुरुवार को भी सूचकांक में 0.79% की और गिरावट दर्ज की गई। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 3% से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार यह गिरावट बाजार में जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

गौरतलब है कि निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है — जो हालिया कारोबारी इतिहास में असाधारण मानी जाने वाली निरंतर कमजोरी है।

तकनीकी संकेत और अहम स्तर

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार साप्ताहिक RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लगभग 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और बाजार में कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि RSI अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर तकनीकी रिकवरी की संभावना बनती है।

निफ्टी के लिए निकट अवधि में 22,800 और 23,000 के स्तर प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेंगे। इन स्तरों से ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव घट सकता है। नीचे की ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) माने जा रहे हैं।

वैश्विक कारकों का असर

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार की धारणा पर वैश्विक कारकों का प्रभाव सर्वाधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंताएं और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क बना रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में उछाल से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल्स और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI जैसे अहम आर्थिक आंकड़े भी अगले सप्ताह जारी होने वाले हैं, जो वैश्विक बाजारों की धारणा को और अधिक प्रभावित कर सकते हैं।

घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति

हालांकि घरेलू आर्थिक संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) बढ़कर 8% हो गई, जो जुलाई के संशोधित 7.4% की तुलना में अधिक है। विनिर्माण क्षेत्र में 9% और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई।

ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड अपने हालिया उच्च स्तरों से नीचे आया है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है, जिससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है।

अगले सप्ताह के प्रमुख ट्रिगर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव घटने के संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में तीव्र राहत-रैली देखी जा सकती है। RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा में महंगाई पर उसका दृष्टिकोण और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों व वित्तीय बाजारों के लिए निर्णायक संकेत देंगे।

कुल मिलाकर अगले सप्ताह RBI नीति समीक्षा, Q2 कॉरपोरेट नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े — ये पाँचों मिलकर बाजार का रुख तय करेंगे। निवेशकों को इन घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसलिए है कि महंगाई पर केंद्रीय बैंक का स्वर बाजार को आगे की दिशा देगा। घरेलू IIP के मजबूत आंकड़े आश्वस्त करते हैं, लेकिन जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और अमेरिकी यील्ड्स स्थिर नहीं होतीं, तब तक विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद बेमानी है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़े ट्रिगर कौन से हैं?
अगले सप्ताह RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा, Q2 कॉरपोरेट नतीजे, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल्स व ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI डेटा प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। इन सभी घटनाक्रमों का असर एक साथ बाजार की दिशा तय करेगा।
पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 3% से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ।
निफ्टी के लिए अगले सप्ताह कौन से तकनीकी स्तर अहम रहेंगे?
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 22,800 और 23,000 प्रमुख प्रतिरोध स्तर हैं, जबकि नीचे की ओर 22,350 और 22,180 महत्वपूर्ण समर्थन स्तर माने जा रहे हैं। साप्ताहिक RSI लगभग 31.06 पर है, जो ओवरसोल्ड जोन के करीब है।
पश्चिम एशिया तनाव कम होने पर बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में तनाव घटने के संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में तेज राहत-रैली देखने को मिल सकती है। ब्रेंट क्रूड पहले ही अपने उच्च स्तरों से नीचे आ चुका है, जिससे ऊर्जा कीमतों को राहत मिली है।
भारत की अगस्त IIP वृद्धि कितनी रही और इसका बाजार पर क्या असर है?
अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) 8% रही, जो जुलाई के संशोधित 7.4% से अधिक है। विनिर्माण में 9% और बिजली-गैस आपूर्ति में 12.3% की बढ़त दर्ज हुई, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है और बाजार के लिए एक सकारात्मक पहलू है।
राष्ट्र प्रेस
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