पश्चिम एशिया के तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार चौथे सप्ताह भी गिरावट में

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पश्चिम एशिया के तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार चौथे सप्ताह भी गिरावट में

सारांश

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है। जानें कैसे यह स्थिति निफ्टी और सेंसेक्स को प्रभावित कर रही है।

Key Takeaways

  • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर गहरा प्रभाव है।
  • निफ्टी और सेंसेक्स में लगातार गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
  • कच्चे तेल की कीमतें उच्च बने रहने से महंगाई की चिंता बढ़ी है।
  • विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार पर दबाव डाला है।
  • निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

मुंबई, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिसके चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क चौथे सप्ताह भी गिरावट के साथ बंद हुए।

इस सप्ताह निफ्टी में 0.16 प्रतिशत की कमी आई, हालाँकि अंतिम कारोबारी दिन यह 0.49 प्रतिशत बढ़कर 23,114.50 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स ने सप्ताह के अंत में 325.72 अंकों यानी 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,532.96 पर समापन किया, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही।

सप्ताह की शुरुआत में दोनों सूचकांकों ने सपाट रुख अपनाया, लेकिन बाद में मेटल शेयरों में खरीदारी के कारण बाजार में कुछ तेजी देखने को मिली।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और भारत के व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार पर भी नजर आ रहा है।

सेक्टर के हिसाब से निफ्टी आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक) सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहे। इसके अलावा, मेटल शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

हालांकि, व्यापक बाजार में मिश्रित रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.06 प्रतिशत की हल्की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस बीच, भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुँच गया। इसकी मुख्य वजह डॉलर की बढ़ती मांग, विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिक्री और वैश्विक मुद्रा बाजार का दबाव रहा।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क बना रहेगा। ऊंचे कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव बाजार की भावना पर दबाव बनाए हुए हैं। पिछले 13 सत्रों में विदेशी निवेशकों ने कुल 81,263 करोड़ रुपए की निकासी की है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ा है।

विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,850 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस है, इसके बाद 24,000 और 24,150 अगले महत्वपूर्ण स्तर होंगे। वहीं, नीचे की ओर 22,950 और 22,700 को मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है।

बाजार अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 13 प्रतिशत नीचे आ चुका है, जो व्यापक बाजार में एक बड़े करेक्शन की ओर इशारा करता है।

बैंक निफ्टी के लिए 53,000 से 52,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 54,000 से 55,000 के बीच रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

Point of View

भारतीय शेयर बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव का गहरा प्रभाव है। ऐसा प्रतीत होता है कि विदेशी निवेशकों की निकासी और उच्च तेल की कीमतें बाजार की स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय शेयर बाजार की गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की उच्च कीमतें भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रही हैं।
निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट का क्या असर होगा?
इस गिरावट से निवेशकों की धारणा प्रभावित होगी, और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
क्या भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है?
हाँ, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया है और यह 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।
क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?
हां, विदेशी निवेशकों की निकासी और तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?
निफ्टी के लिए 23,850 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस है।
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