27 अगस्त 2026
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मीर आलम टैंक को वर्ल्ड-क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की राह पर हैदराबाद, CM रेवंत रेड्डी ने किया औचक निरीक्षण

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मीर आलम टैंक को वर्ल्ड-क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की राह पर हैदराबाद, CM रेवंत रेड्डी ने किया औचक निरीक्षण

सारांश

हैदराबाद का मीर आलम टैंक अब सिर्फ एक जलाशय नहीं — तेलंगाना सरकार इसे सिंगापुर के 'गार्डन्स बाय द बे' की तर्ज पर वर्ल्ड-क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की राह पर है। ₹430 करोड़ का आइकॉनिक केबल-स्टे ब्रिज और तीन द्वीपों का सौंदर्यीकरण — CM रेवंत रेड्डी का यह दांव हैदराबाद के पर्यटन मानचित्र को नए सिरे से लिखने का इरादा रखता है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 27 अगस्त 2026 को मीर आलम टैंक , हैदराबाद में विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया।
₹430 करोड़ की लागत से 2.65 किलोमीटर लंबा और 22.2 मीटर चौड़ा केबल-स्टे ब्रिज निर्माणाधीन है, जो 2027 के अंत तक पूरा होने का लक्ष्य है।
ब्रिज शास्त्रीपुरम को चिंतलमेट रोड से जोड़ेगा और हैदराबाद का दूसरा आइकॉनिक ब्रिज बनेगा।
टैंक के भीतर तीन द्वीपनुमा क्षेत्रों को सिंगापुर के 'गार्डन्स बाय द बे' की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव।
अधिकारियों को वॉटर स्पोर्ट्स , सीवेज रोकथाम और नहर चौड़ीकरण के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के अधिकारी शामिल रहे।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 27 अगस्त 2026 को हैदराबाद के ऐतिहासिक मीर आलम टैंक में चल रहे विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इस जलाशय को हैदराबाद का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने क्या देखा और क्या निर्देश दिए

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने निरीक्षण के दौरान फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत की गई विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टैंक क्षेत्र को वर्ल्ड-क्लास डिज़ाइन और पर्यटकों के अनुकूल सुविधाओं के साथ विकसित किया जाए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सीवेज का पानी टैंक में न जाए और नहर को चौड़ा किया जाए ताकि बाढ़ का पानी आसानी से मूसी नदी में प्रवाहित हो सके।

पर्यटन और वॉटर स्पोर्ट्स की संभावनाएँ

अधिकारियों को वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य पर्यटन गतिविधियों की संभावनाएँ तलाशने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने टैंक के भीतर मौजूद तीन द्वीपनुमा क्षेत्रों को आकर्षक ढंग से विकसित करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन्हें सिंगापुर के प्रसिद्ध 'गार्डन्स बाय द बे' की तर्ज पर विकसित किया जाए, जहाँ पक्षी-अभयारण्य और झरने भी हों।

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि मीर आलम टैंक, हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित होने के कारण, एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की असाधारण क्षमता रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सरकार मूसी रिवरफ्रंट समेत कई जलाशयों के पुनरुद्धार पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

आइकॉनिक सस्पेंशन ब्रिज परियोजना

मीर आलम टैंक पर निर्माणाधीन केबल-स्टे ब्रिज इस परियोजना का केंद्रबिंदु है। ₹430 करोड़ की लागत वाला यह ब्रिज 2.65 किलोमीटर लंबा और 22.2 मीटर चौड़ा होगा, जो शास्त्रीपुरम को चिंतलमेट रोड से जोड़ेगा। इसे 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।

गौरतलब है कि यह ब्रिज माधापुर के आईटी हब में स्थित दुर्गम चेरुवु ब्रिज के बाद हैदराबाद का दूसरा आइकॉनिक ब्रिज बनने की उम्मीद है, जो शहर के स्काईलाइन को एक नई पहचान देगा।

निरीक्षण में शामिल एजेंसियाँ

इस औचक निरीक्षण में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड और नगरपालिका अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि विकास कार्य इस प्रकार हो जिससे टैंक के आसपास का पर्यावरण और बुनियादी ढाँचा दोनों सुधरें और पर्यटकों को एक अविस्मरणीय अनुभव मिले।

आगे की राह

मीर आलम टैंक परियोजना तेलंगाना सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत हैदराबाद को एक वैश्विक पर्यटन और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित किया जाना है। यदि परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हैदराबाद के शहरी जलाशयों के इतिहास में अतिक्रमण, सीवेज प्रदूषण और अधूरे पुनरुद्धार की एक लंबी कहानी है। 'गार्डन्स बाय द बे' की तुलना तब तक महज़ एक आकर्षक नारा है जब तक सीवेज रोकने और नहर चौड़ीकरण जैसे बुनियादी काम ज़मीन पर नहीं उतरते। ₹430 करोड़ का केबल-स्टे ब्रिज एक दृश्यात्मक प्रतीक बन सकता है, परंतु असली कसौटी यह होगी कि क्या पर्यावरणीय सुधार और पर्यटन बुनियादी ढाँचा साथ-साथ चलते हैं — या सिर्फ ब्रिज बनकर रह जाता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीर आलम टैंक विकास परियोजना क्या है?
मीर आलम टैंक विकास परियोजना तेलंगाना सरकार की वह योजना है जिसके तहत हैदराबाद के इस ऐतिहासिक जलाशय को एक वर्ल्ड-क्लास पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। इसमें ₹430 करोड़ का केबल-स्टे ब्रिज, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएँ और तीन द्वीपनुमा क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण शामिल है।
मीर आलम टैंक पर बनने वाला ब्रिज कब तक पूरा होगा?
₹430 करोड़ की लागत वाले इस केबल-स्टे ब्रिज को 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह 2.65 किलोमीटर लंबा और 22.2 मीटर चौड़ा होगा, जो शास्त्रीपुरम को चिंतलमेट रोड से जोड़ेगा।
CM रेवंत रेड्डी ने निरीक्षण में अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को सभी कार्य तय समय-सीमा में पूरे करने, सीवेज को टैंक में जाने से रोकने, नहर चौड़ी करने और वॉटर स्पोर्ट्स की संभावनाएँ तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने तीन द्वीपनुमा क्षेत्रों को सिंगापुर के 'गार्डन्स बाय द बे' की तर्ज पर विकसित करने का सुझाव भी दिया।
मीर आलम टैंक हैदराबाद के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
मीर आलम टैंक हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित है, जिससे इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाने की अपार संभावना है। यह मूसी रिवरफ्रंट विकास की व्यापक योजना का भी हिस्सा है, जो शहर की पर्यटन और पर्यावरणीय छवि दोनों को सुधारने का लक्ष्य रखती है।
निरीक्षण में कौन-सी सरकारी एजेंसियाँ शामिल थीं?
निरीक्षण में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड और नगरपालिका अधिकारी शामिल रहे। इन एजेंसियों ने मुख्यमंत्री को विकास योजनाओं की फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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