12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश से बंगाल के नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता बनर्जी को जान से मारने की धमकी, भवानी भवन में दर्ज कराई शिकायत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश से बंगाल के नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता बनर्जी को जान से मारने की धमकी, भवानी भवन में दर्ज कराई शिकायत

सारांश

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता बनर्जी को 3 मई से 9 अगस्त के बीच बांग्लादेश के नंबरों से व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकियाँ मिलीं — और धमकी देने वालों ने ब्लॉगर अभिजीत रॉय जैसे अंजाम का हवाला दिया। यह बंगाल में दूसरे प्रमुख विपक्षी नेता पर निशाना साधने की घटना है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता बनर्जी को 3 मई से 9 अगस्त 2026 के बीच बांग्लादेश के नंबरों से व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकियाँ मिलीं।
11 अगस्त को उन्होंने भवानी भवन (पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
धमकी देने वालों ने कथित तौर पर अभिजीत रॉय जैसे अंजाम का हवाला दिया, जिनकी 2015 में ढाका में हत्या हुई थी।
इससे पहले पश्चिम बंगाल से जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हमिम मंडल और दो साथियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनका निशाना सुवेंदु अधिकारी थे।
पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है; धमकी के पीछे के संगठन की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता बनर्जी ने मंगलवार, 11 अगस्त को भवानी भवन (पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय, कोलकाता) पहुँचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्हें 3 मई से 9 अगस्त के बीच बांग्लादेश के नंबरों से व्हाट्सएप पर लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिली थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

धमकियों का सिलसिला और स्वरूप

रिपोर्टों के अनुसार, रिताब्रता बनर्जी को 3 मई 2026 से 9 अगस्त 2026 के बीच कई बार व्हाट्सएप कॉल पर जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। हर बार कॉल करने वाले का नंबर बांग्लादेश का था। धमकी देने वालों ने कथित तौर पर कहा कि उनका हश्र बांग्लादेश के स्वतंत्र विचारों वाले ब्लॉगर अभिजीत रॉय जैसा होगा, जिनकी 26 फरवरी 2015 को ढाका में हत्या कर दी गई थी।

शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष ने इन धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया, परंतु लगातार कॉल आने के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का निर्णय लिया।

अभिजीत रॉय हत्याकांड से कथित संबंध

अभिजीत रॉय की हत्या 26 फरवरी 2015 को ढाका विश्वविद्यालय के निकट अमर एकुशे पुस्तक मेले से लौटते समय की गई थी। उनकी पत्नी रफिदा अहमद बोन्या भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुई थीं। जाँच में यह साबित हुआ कि इस हत्या के पीछे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अंसार अल इस्लाम के सदस्य थे। अटकलें हैं कि रिताब्रता बनर्जी को धमकी देने के पीछे भी इसी संगठन से जुड़े तत्व हो सकते हैं — हालाँकि पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

जैश-ए-मोहम्मद गिरफ्तारी से जुड़ा संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल से आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हमिम मंडल और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पता चला था कि उनका निशाना विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी थे। आतंकवादियों ने उनके कार्यक्रमों, यात्रा मार्गों और कोलकाता स्थित उनके आवास की रेकी की थी। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब बंगाल के किसी प्रमुख विपक्षी नेता को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच

पुलिस सूत्रों ने बताया कि भवानी भवन में औपचारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है और यह पता लगाने के लिए जाँच शुरू की गई है कि धमकी भरे कॉल के पीछे कौन-सा व्यक्ति या संगठन है। निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में कोलकाता में अभिजीत रॉय की हत्या का संदर्भ देते हुए इस तरह के खतरों पर चिंता जताई थी।

आगे क्या

पुलिस बांग्लादेश के नंबरों की साइबर ट्रेसिंग और संबंधित एजेंसियों से समन्वय के ज़रिए धमकी के स्रोत की पहचान करने में जुटी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले में राज्य पुलिस के साथ मिलकर काम करती हैं, क्योंकि धमकियाँ अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब रिताब्रता बनर्जी — दोनों अलग-अलग राजनीतिक खेमों से हैं, लेकिन दोनों पर खतरा सीमा पार से आया है। सवाल यह है कि राज्य पुलिस अंतरराष्ट्रीय साइबर-धमकी के मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कितनी तेज़ी से करती है। अभिजीत रॉय हत्याकांड का संदर्भ देना — चाहे धमकी देने वाले का इरादा डराने का हो — यह दिखाता है कि ये धमकियाँ परिष्कृत मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति हैं, जिन्हें केवल थाने की शिकायत से नहीं, बल्कि ठोस खुफिया कार्रवाई से निपटा जाना चाहिए।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिताब्रता बनर्जी को किस तरह की धमकियाँ मिली हैं?
रिताब्रता बनर्जी को 3 मई से 9 अगस्त 2026 के बीच बांग्लादेश के नंबरों से व्हाट्सएप कॉल पर जान से मारने की धमकियाँ मिलीं। धमकी देने वालों ने कथित तौर पर कहा कि उनका हश्र ब्लॉगर अभिजीत रॉय जैसा होगा।
रिताब्रता बनर्जी ने पुलिस से कब और कहाँ संपर्क किया?
उन्होंने 11 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित भवानी भवन — पश्चिम बंगाल पुलिस के मुख्यालय — में जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जाँच शुरू हो गई है।
अभिजीत रॉय कौन थे और उनका इस मामले से क्या संबंध है?
अभिजीत रॉय बांग्लादेश के स्वतंत्र विचारों वाले ब्लॉगर थे, जिनकी 26 फरवरी 2015 को ढाका में हत्या कर दी गई थी। जाँच में प्रतिबंधित संगठन अंसार अल इस्लाम के सदस्यों को दोषी पाया गया था। रिताब्रता बनर्जी को मिली धमकियों में उनके नाम का उल्लेख किया गया, हालाँकि पुलिस ने अभी किसी संगठन की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है।
क्या पहले भी बंगाल के विपक्षी नेताओं को ऐसे खतरे मिले हैं?
हाँ, हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हमिम मंडल और उसके दो साथियों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पता चला था कि उनका निशाना नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी थे और उन्होंने उनके आवास तथा यात्रा मार्गों की रेकी भी की थी।
इस मामले में पुलिस आगे क्या कदम उठाएगी?
पुलिस बांग्लादेश के नंबरों की साइबर ट्रेसिंग और संबंधित एजेंसियों से समन्वय के ज़रिए धमकी के स्रोत की पहचान करने में जुटी है। चूँकि धमकियाँ अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आई हैं, इसलिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी अहम होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले