याददाश्त की दिक्कत वाले CM सम्राट चौधरी! रोहिणी आचार्या का तीखा पलटवार
सारांश
Key Takeaways
- बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में 24 अप्रैल को CM सम्राट चौधरी की सरकार ने विश्वासमत हासिल किया।
- रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर CM पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उनकी याददाश्त में केमिकल लोचा है।
- सम्राट चौधरी के 14 करोड़ मतदाता वाले दावे पर सवाल उठाया गया क्योंकि बिहार की कुल जनसंख्या ही लगभग 13 करोड़ है।
- रोहिणी आचार्या ने मुरेठा प्रतिज्ञा तोड़ने और किडनी दान पर ओछी टिप्पणी का मुद्दा उठाया।
- रोहिणी ने कहा कि NDA का असली CM चेहरा कोई और था जिसे साजिश के तहत हटाया गया।
- यह सियासी टकराव 2025-26 के बिहार चुनावी चक्र की तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
पटना, 24 अप्रैल — बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने शुक्रवार को विश्वासमत हासिल किया, लेकिन इसके साथ ही प्रदेश की राजनीति में एक नई सियासी जंग छिड़ गई। राजद नेता और लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री पर तीखा पलटवार किया और कहा कि सम्राट चौधरी की याददाश्त के साथ केमिकल लोचा है।
विश्वासमत के बाद भड़की सियासी बहस
बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर जोरदार सियासी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 14 करोड़ जनता का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है। इसी बयान पर रोहिणी आचार्या ने तत्काल पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि क्या बिहार में 14 करोड़ मतदाता हैं।
गौरतलब है कि बिहार की कुल जनसंख्या लगभग 13 करोड़ है और पंजीकृत मतदाताओं की संख्या इससे काफी कम है। ऐसे में यह आंकड़ा तथ्यात्मक रूप से विवादास्पद बन गया।
रोहिणी आचार्या के तीखे सवाल
सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्या ने अपनी पोस्ट में कहा कि सम्राट चौधरी सदन में अपनी उम्र और डिग्री की बात तो करते दिखे, लेकिन उन्हें सत्यापित करने के लिए कोई तार्किक या तथ्यपरक तर्क नहीं दे सके। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या NDA ने चुनाव सम्राट चौधरी के नाम और चेहरे पर लड़ा था।
रोहिणी ने यह भी याद दिलाया कि सम्राट चौधरी ने कभी नीतीश कुमार को हटाने के लिए मुरेठा यानी पगड़ी बांधकर प्रतिज्ञा ली थी, लेकिन बाद में बिना प्रतिज्ञा पूरी किए वह मुरेठा खोल भी लिया। यह एक गंभीर राजनीतिक विरोधाभास है जो उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
किडनी दान वाली टिप्पणी पर भी निशाना
रोहिणी आचार्या ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री खुद पर हो रहे व्यक्तिगत हमलों से तिलमिला उठे, लेकिन वे यह भूल गए कि उन्होंने खुद एक बेटी द्वारा अपने पिता को किडनी दान करने पर बेहद ओछी टिप्पणी की थी। यह संदर्भ सीधे तौर पर रोहिणी आचार्या द्वारा अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने की घटना से जुड़ा है।
न्यायिक प्रक्रिया और लालू वाले बयान पर पलटवार
रोहिणी आचार्या ने सम्राट चौधरी के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि लालू यादव ने उन्हें जेल भिजवाया। रोहिणी ने कहा कि भाजपा के लोग खुद कहते हैं कि कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया विधि-विधान के अनुरूप चलती है, किसी के इशारे पर नहीं। यानी अगर सम्राट चौधरी को न्यायपालिका पर भरोसा है, तो उन्हें यह बचकाना आरोप नहीं लगाना चाहिए।
सत्ता और जनादेश पर बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री के सत्ता किसी की बपौती नहीं होती वाले बयान पर रोहिणी आचार्या ने तंज कसते हुए कहा कि जनता जिसे चुनकर भेजती है, वही सत्ता में आता है — लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री को तो जनता ने चुना ही नहीं था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का चेहरा कोई और था, जिसे साजिश के जरिए बेबस और लाचार कर हटाया गया।
यह बयान स्पष्ट रूप से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की परिस्थितियों की ओर इशारा करता है, जो बिहार की राजनीति में एक बड़ा और विवादास्पद अध्याय रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण — क्या है असली दांव
यह पूरा घटनाक्रम महज एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं है — यह राजद की रणनीति का हिस्सा है। रोहिणी आचार्या जैसे युवा और आक्रामक चेहरे को आगे कर राजद यह संदेश देना चाहता है कि वह विपक्ष में रहते हुए भी सरकार को घेरने में सक्षम है। आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा में यह सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।