RSS की 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' अब हर तीन साल में एक बार, नौ क्षेत्रों में वार्षिक बैठकें होंगी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' (ABPS) की बैठक की आवृत्ति को बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है — अब यह प्रत्येक वर्ष के बजाय हर तीन साल में एक बार आयोजित की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस प्रस्तावित पुनर्संरचना के तहत नागपुर में केंद्रीय ABPS बैठक तीन वर्षों में एक बार होगी, जबकि संगठन के नौ क्षेत्रों में हर वर्ष क्षेत्रीय प्रतिनिधि बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बदलाव का स्वरूप क्या है
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत नागपुर में होने वाली केंद्रीय बैठक मुख्य रूप से बड़े नीतिगत फैसलों तक सीमित रहेगी। विशेष रूप से, यह बैठक उन वर्षों में बुलाई जाएगी, जब सरकार्यवाह (महासचिव) का चुनाव होना होता है — जो संगठन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पद है। दिन-प्रतिदिन के संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा और स्थानीय प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श का काम अब नौ क्षेत्रीय बैठकों के जरिए होगा।
RSS अपनी स्थापना के बाद से परंपरागत रूप से हर वर्ष मार्च में ABPS की बैठक आयोजित करता आ रहा है। यह मंच विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा, नीतिगत प्रस्तावों को पारित करने और आगामी वर्ष की प्राथमिकताएं तय करने के लिए प्रमुख अवसर रहा है।
विकेंद्रीकरण की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, इस पुनर्गठन के पीछे मूल उद्देश्य संगठन की कार्यप्रणाली का विकेंद्रीकरण करना और जमीनी स्तर पर कार्यों में गति लाना है। हर साल नौ क्षेत्रों में आयोजित होने वाली ये बैठकें स्थानीय नेतृत्व को अधिक जिम्मेदारी और स्वायत्तता देंगी। गौरतलब है कि RSS का नेटवर्क देशभर के लाखों स्वयंसेवकों तक फैला हुआ है, और क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना दीर्घकालिक संगठनात्मक लक्ष्य रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब RSS विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा गतिविधियों में अपनी उपस्थिति और विस्तार को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
ABPS और ABKM का अंतर
इस पुनर्गठन के साथ ABPS और RSS की राष्ट्रीय कार्यकारी संस्था 'अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल' (ABKM) के बीच की भूमिकाओं पर भी नई दृष्टि से विचार किया जा रहा है। ABKM की बैठक आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में होती है, जिसमें पदाधिकारियों का एक सीमित समूह शामिल होता है और यह नीतिगत निर्णयों के लिए एक नियमित मंच का काम करती है। अब ABPS के तीन वर्षीय चक्र में जाने के बाद ABKM की भूमिका और अधिक सक्रिय हो सकती है।
RSS और भाजपा संबंध: व्यापक संदर्भ
विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों ने अक्सर RSS की संगठनात्मक बैठकों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ उसके संबंधों के परिप्रेक्ष्य में देखा है। हालांकि, ABPS मूलतः RSS की अपनी आंतरिक संगठनात्मक प्राथमिकताओं को तय करने का मंच रहा है — जो BJP की राजनीतिक रणनीति से अलग और व्यापक है। इस बदलाव को केवल राजनीतिक नजरिए से देखना RSS की संगठनात्मक परिपक्वता और गहराई को कम आँकना होगा।
आगे क्या होगा
प्रस्तावित संरचना के अंतर्गत अगली केंद्रीय ABPS बैठक सरकार्यवाह चुनाव के वर्ष में नागपुर में होगी। तब तक नौ क्षेत्रों में वार्षिक क्षेत्रीय बैठकें संगठन के मुख्य परिचालन मंच के रूप में काम करेंगी। यह पुनर्संरचना RSS को एक अधिक चुस्त, विकेंद्रीकृत और जमीनी संगठन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।