आरएसएस की ऑल-इंडिया बैठक में 'जनसांख्यिकीय असंतुलन' पर चिंता, सामाजिक सद्भाव को बताया खतरा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे संबद्ध संगठनों ने 21 अगस्त 2026 को विशाखापत्तनम के निकट गुदिलोवा में संपन्न तीन दिवसीय ऑल-इंडिया कोऑर्डिनेशन मीटिंग में जनसांख्यिकीय असंतुलन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। संघ के नेताओं के अनुसार, कुछ समुदायों की जनसंख्या में तेज वृद्धि और अन्य समुदायों में गिरावट से कतिपय इलाकों में सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो रहा है।
बैठक में क्या हुई चर्चा
आरएसएस के संयुक्त महासचिव सी.आर. मुकुंद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में आबादी में बदलाव और असंतुलन पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा, 'प्रजनन दर का कम होना एक मुद्दा है, लेकिन आबादी में असंतुलन भी है, जिस पर हमने चर्चा की है। इसका कुछ इलाकों में सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ रहा है।'
मुकुंद ने यह भी स्पष्ट किया कि दुनिया के कई देश बढ़ती उम्र की आबादी और घटती प्रजनन दर की समस्या से जूझ रहे हैं। भारत में फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार अगले 3-4 दशकों में भारत को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
युवाओं से जुड़ाव पर ज़ोर
बैठक में युवा पीढ़ी को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। मुकुंद ने बताया कि इस वर्ष लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने संघ के 21 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। उन्होंने कहा कि देशभर में प्रतिदिन लगने वाली 'शाखाओं' में शामिल होने वाले स्वयंसेवकों में 60 प्रतिशत से अधिक युवा होते हैं।
संघ का मानना है कि युवाओं के साथ उपदेशात्मक संवाद की बजाय सीधा और सार्थक जुड़ाव ज़रूरी है, ताकि उनमें देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति अपनत्व की भावना विकसित हो सके।
जंतर-मंतर विरोध और सिस्टम की खामियाँ
जंतर-मंतर पर युवाओं के हालिया विरोध-प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर मुकुंद ने कहा कि उनके अनुसार यह व्यवस्था में कुछ कमियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आरएसएस और उससे जुड़े संगठन चाहते हैं कि सिस्टम सुचारु रूप से काम करे और इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
नशीली दवाओं का बढ़ता खतरा
बैठक में युवाओं और छात्रों के बीच नशीली दवाओं की बढ़ती उपलब्धता पर भी गहरी चिंता जताई गई। इस बात पर सहमति बनी कि इस समस्या का समाधान केवल सरकार या पुलिस के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी से संभव है।
आगे की दिशा
मुकुंद ने संकेत दिया कि संघ से प्रेरित एनजीओ और अन्य संगठन जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में सोच-विचार और योजना बना रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब जनसंख्या नीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है और विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपने-अपने रुख स्पष्ट कर रहे हैं।