आरएसएस की अखिल भारतीय समन्वय बैठक विशाखापट्टनम में 19-21 अगस्त, जनसांख्यिकीय बदलाव व नशा मुक्ति पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 19 से 21 अगस्त 2026 तक विशाखापट्टनम के निकट गुड़िलोवा स्थित विज्ञान विहार विद्यालय में आयोजित होगी, जिसमें जनसांख्यिकीय बदलाव, नशा मुक्ति, पंच परिवर्तन और भारतीय विकास मॉडल जैसे अहम राष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। 18 अगस्त को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक के एजेंडे की विस्तृत जानकारी दी।
बैठक का स्वरूप और उद्देश्य
आंबेकर ने स्पष्ट किया कि यह कोई कार्यकारी या निर्णय लेने वाली बैठक नहीं है, बल्कि इसका प्रमुख उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय संगठनों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और आपसी समन्वय को सुदृढ़ करना है। यह बैठक प्रतिवर्ष आयोजित होती है और संघ की प्रेरणा से कार्यरत 32 संगठनों के प्रतिनिधि इसमें भाग लेते हैं।
बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और संघ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। कुल मिलाकर 49 महिलाओं सहित 253 प्रमुख कार्यकर्ता और संघ के पदाधिकारियों को मिलाकर 327 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
प्रमुख एजेंडा बिंदु
बैठक में देश की वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और चुनौतियों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से जनसंख्या असंतुलन और जनसांख्यिकीय बदलाव से उत्पन्न चिंताओं तथा उनके संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को नशे की लत से बचाने और नशा मुक्ति अभियान को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी मंथन होगा।
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तय किए गए 'पंच परिवर्तन' के पाँच विषय — सामाजिक समरसता, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, 'स्व' का भाव और नागरिक कर्तव्यों का पालन — भी मुख्य एजेंडे में शामिल हैं। विभिन्न संगठनों की इन विषयों में भूमिका और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी।
भारतीय विकास मॉडल पर विमर्श
आंबेकर ने कहा कि विकास की अवधारणा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है — इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय आयाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी समग्र दृष्टिकोण से बैठक में एक 'भारतीय विकास मॉडल' पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा, जिससे संबद्ध संगठन भविष्य की रणनीति तैयार कर सकें। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विकास के पश्चिमी मॉडल की सीमाओं पर बहस तेज हो रही है।
संघ में पंजीकरण की बढ़ती संख्या
बैठक की पूर्व संध्या पर आंबेकर ने संघ के प्रति जन-आकर्षण के आँकड़े भी साझा किए। संघ की वेबसाइट पर 'जॉइन आरएसएस' के माध्यम से जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 55,423 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जो 2026 की इसी अवधि में बढ़कर 1,23,287 हो गया — यानी दोगुने से अधिक की वृद्धि। जुलाई 2025 में 9,718 पंजीकरण की तुलना में जुलाई 2026 में यह संख्या 24,086 रही। उल्लेखनीय यह है कि पंजीकरण कराने वालों में लगभग 65 प्रतिशत युवा 30 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि 85 प्रतिशत लोग 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं।
भाग लेने वाले प्रमुख संगठन
भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी (BJP), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), भारतीय किसान संघ और राष्ट्र सेविका समिति सहित विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री और चयनित कार्यकर्ता बैठक में भाग लेंगे। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दक्षिण मध्य क्षेत्र के सह संघचालक दूसी रामकृष्ण और अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी भी उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय इस बैठक के निष्कर्ष संघ की भविष्य की सामाजिक कार्ययोजना की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।