2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

<b>संस्कृत को राष्ट्र की आत्मा मानते हुए आरएसएस प्रमुख ने लोगों से इसे सीखने का किया आग्रह</b>

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
<b>संस्कृत को राष्ट्र की आत्मा मानते हुए आरएसएस प्रमुख ने लोगों से इसे सीखने का किया आग्रह</b>

सारांश

आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत को भारत की आत्मा बताते हुए इसे सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यह भाषा हमारे सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है।

मुख्य बातें

संस्कृत को भारत की आत्मा माना जाता है।
संस्कृत भारती ने नई रुचि पैदा की है।
संस्कृत सीखने का सरलतम तरीका संवाद है।
संस्कृत भारतीय संस्कृति की नींव है।
भाषा का अध्ययन केवल पाठ्यपुस्तकों से नहीं, बल्कि संवाद से होता है।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को संस्कृत के अध्ययन के महत्व पर बल देते हुए इसे भारत की "आत्मा" और देश की सभ्यतागत निरंतरता का एक अनिवार्य तत्व बताया।

मोहन भागवत ने दिल्ली में संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत को आधुनिक संचार का माध्यम बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।

सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, "संस्कृत एक भाषा है, लेकिन यह केवल एक भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत राष्ट्र की आत्मा है क्योंकि यह विचार, जीवन और संस्कृति की सबसे प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है, जो आज भी जीवंत है।"

उन्होंने भारत के दार्शनिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा, "भारत का अस्तित्व केवल एक भौगोलिक तथ्य नहीं है, यह एक जीवंत परंपरा है, जिसके आधार पर जीवन की निरंतरता टिकी हुई है।"

संस्कृत के विषय में अपने अनुभव साझा करते हुए, भागवत ने कहा, "बचपन में जब मैं स्कूल में संस्कृत पढ़ता था, तो यह कठिन लगती थी। पाठ्यक्रम में श्लोकों को याद करना अनिवार्य था, जिससे यह धारणा बनी कि संस्कृत एक कठिन भाषा है। लेकिन जब मैंने उन्हीं श्लोकों को घर पर सहजता से बोलते हुए सुना, तो मुझे यह कठिन नहीं लगी।"

उन्होंने कहा, "यह समस्या आज भी बनी हुई है, छात्र संस्कृत को एक कठिन भाषा मानते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह इतनी कठिन क्यों लगती है? वास्तव में, किसी भाषा को सीखने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से नहीं, बल्कि बातचीत के माध्यम से है।"

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाषा सीखने का सबसे सरल तरीका उसमें पूरी तरह डूब जाना और नियमित रूप से उसका उपयोग करना है।

उन्होंने कहा, "जब मैं भारत के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करता हूं, तो भले ही मुझे क्षेत्रीय भाषाओं की विशेष शब्दावली का ज्ञान न हो, फिर भी मैं अंतर्निहित भाव और अर्थ को समझ पाता हूं। निरंतर सुनने और बोलने से भाषा सहजता से सीखी जा सकती है। इसलिए, भाषा सीखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उस भाषा को बोलने वाले लोगों के बीच रहें।"

आरएसएस प्रमुख ने संस्कृत में रुचि को पुनर्जीवित करने में संस्कृत भारती की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने "पूरे देश में संस्कृत में नई रुचि पैदा करने" में सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 15 वर्षों में संस्कृत के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में आया परिवर्तनकारी बदलाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई पीढ़ी के लिए भाषाई कौशल को बढ़ावा देने का भी एक प्रयास है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत को सीखने का महत्व क्या है?
संस्कृत भारतीय संस्कृति और विचारधारा की नींव है, इसे समझने से हम अपने इतिहास और परंपराओं को बेहतर तरीके से जान सकते हैं।
संस्कृत को कठिन क्यों माना जाता है?
बहुत से छात्र इसे कठिन मानते हैं क्योंकि पाठ्यक्रम में श्लोकों को याद करना अनिवार्य होता है, लेकिन संवाद के माध्यम से इसे सहजता से सीखा जा सकता है।
संस्कृत भारती का क्या योगदान है?
संस्कृत भारती ने पिछले 15 वर्षों में संस्कृत में रुचि को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संस्कृत को सीखने के लिए सबसे अच्छा तरीका क्या है?
संस्कृत को सीखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उस भाषा को बोलने वाले लोगों के बीच रहें और संवाद करें।
आरएसएस प्रमुख की इस पहल का क्या महत्व है?
यह पहल भारतीय संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने का एक प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले