संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन: मोहन भागवत ने किया भाषाई समृद्धि का आह्वान

Click to start listening
संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन: मोहन भागवत ने किया भाषाई समृद्धि का आह्वान

सारांश

संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया। इस समारोह में नेताओं ने संस्कृत भाषा के महत्व को उजागर किया। क्या संस्कृत को मिलेगी राष्ट्रभाषा का दर्जा? जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में।

Key Takeaways

  • मोहन भागवत ने संस्कृत भारती का केंद्रीय कार्यालय खोला।
  • संस्कृत का महत्व भारत और विश्व के लिए प्राचीन धरोहर है।
  • संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की मांग उठी।
  • कार्यक्रम में कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।
  • संस्कृत का ज्ञान विभिन्न भाषाओं का आधार है।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश के कई प्रमुख नेताओं और विद्वानों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "यदि देश में अधिकांश कार्य संस्कृत में होने लगे, तो यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। संविधान निर्माण के समय डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रयास किया था। जोशी के अनुसार संस्कृत न केवल भारत की, बल्कि पूरे विश्व की प्राचीन धरोहर है।"

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, "इंद्रप्रस्थ का विकास पांडवों की मेहनत से हुआ था, इसलिए इसे इंद्रप्रस्थ नाम पर विचार करना चाहिए।"

दिनेश चंद्र ने कहा, "संस्कृत को दुनिया की मूल भाषा माना जाता है। कई भारतीय और वैश्विक भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। संस्कृत भारती का उद्देश्य दुनिया में संस्कृत का प्रचार करना है। वेदों जैसे मूलभूत ग्रंथों से लेकर अन्य शास्त्रीय कृतियों तक, ज्ञान संस्कृत में ही संरक्षित है।"

दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, "संस्कृत भारती का आज दिल्ली में उद्घाटन हो रहा है। यह सौभाग्य की बात है कि संचालक द्वारा इसका उद्घाटन किया जा रहा है। संस्कृत का एक बड़ा स्थान है। विश्व की अनेक भाषाएं संस्कृत से निकली हैं और लोग इसे अपनी दिनचर्या में धीरे-धीरे उपयोग करने लगे हैं, जो हमारे लिए गर्व की बात है।"

उन्होंने कहा कि इससे संस्कृति को देश में बढ़ाने और इसके महत्व को बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान होगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि यहां से इतनी शक्ति मिले कि पूरे देश के लोग इसे अपनी दिनचर्या में उपयोग करें।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी कहते हैं, "संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है; यह एक सेतु है और हमारी ज्ञान परंपरा का स्रोत है। आज के ज्ञान-युग में संस्कृत का अत्यंत महत्व है।"

लाल बहादुर शास्त्री नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक कहते हैं, "शिक्षा में संस्कृत का बहुत महत्व है, क्योंकि भौतिक प्रगति की ओर बढ़ते हुए यदि हम अपने नैतिक मूल्यों को संरक्षित नहीं रखते, तो मानवता सुरक्षित नहीं रह सकती।"

Point of View

जो यह दर्शाता है कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने का प्रयास हो रहा है।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहन भागवत ने किस कार्यालय का उद्घाटन किया?
मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया।
संस्कृत का महत्व क्या है?
संस्कृत न केवल भारत की, बल्कि विश्व की प्राचीन धरोहर है और कई भाषाओं की उत्पत्ति इसी से हुई है।
कार्यक्रम में किन नेताओं ने भाग लिया?
कार्यक्रम में मुरली मनोहर जोशी, दिनेश चंद्र, प्रवेश वर्मा और अन्य प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।
क्या संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलेगा?
इस पर चर्चा की गई है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।
संस्कृत भारती का उद्देश्य क्या है?
संस्कृत भारती का उद्देश्य दुनिया भर में संस्कृत का प्रचार करना है।
Nation Press