नेपाल की भारत से अपील: सीमा पार यात्रा में राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) को मिले मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल ने औपचारिक रूप से भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह सीमा पार यात्रा के लिए नेपाल के राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) को एक वैध यात्रा दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करे। डिपार्टमेंट ऑफ इमिग्रेशन के महानिदेशक राम चंद्र तिवारी ने पुष्टि की कि यह प्रस्ताव जून 2026 के अंत में भारत सरकार को भेजा गया था। इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को सुगम बनाना और पहचान सत्यापन व सुरक्षा को और मज़बूत करना है।
NID क्या है और यह क्यों अलग है
नेपाल का राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) भारत के आधार कार्ड की तर्ज़ पर तैयार किया गया एक बायोमेट्रिक दस्तावेज़ है। इसमें फिंगरप्रिंट, चेहरे की तस्वीर और आईरिस स्कैन जैसी बहुस्तरीय पहचान जानकारी संग्रहीत होती है।
तिवारी के अनुसार, "नागरिकता सर्टिफिकेट सिर्फ एक कागज़ी दस्तावेज़ है जिसमें बायोमेट्रिक जानकारी नहीं होती, जबकि NID पहचान का एक सुरक्षित और भरोसेमंद माध्यम है। इसकी स्वीकृति से नेपाल और भारत — दोनों के लिए सुरक्षा इंतज़ाम बेहतर होंगे।"
भारत की मौजूदा नीति और प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
वर्तमान में भारत नेपाली नागरिकों के लिए पासपोर्ट और नागरिकता सर्टिफिकेट को आधिकारिक पहचान दस्तावेज़ के रूप में मान्यता देता है। नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा की व्यवस्था है, जिसके तहत दोनों देशों के नागरिक बिना पासपोर्ट या वीज़ा के स्थलीय सीमा पार कर सकते हैं।
हवाई मार्ग से नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों को अभी पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र या केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी पहचान पत्र इस्तेमाल करने की अनुमति है। नेपाल चाहता है कि उसका NID भी हवाई यात्रा और सीमा पार आवाजाही — दोनों के लिए मान्य हो।
भारतीय दूतावास की अनौपचारिक पूछताछ
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हाल ही में नेपाल के इमिग्रेशन अधिकारियों से NID के तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं के बारे में जानकारी माँगी है। तिवारी ने स्पष्ट किया, "यह कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं थी, बल्कि जानकारी का लेन-देन था।" यह अनौपचारिक संवाद इस बात का संकेत है कि भारत इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
NID का विस्तार और डिजिटल बदलाव
नेपाल सरकार ने पासपोर्ट आवेदन, भूमि पंजीकरण, बैंक खाता खोलने और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए NID को अनिवार्य कर दिया है। नेशनल आईडी एवं सिविल रजिस्ट्रेशन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, अब तक 45 लाख से अधिक नेपाली नागरिकों को NID जारी किया जा चुका है, जबकि लगभग 2 करोड़ लोगों ने इसके लिए नामांकन कराया है।
नेपाल की वर्तमान सरकार पुराने नागरिकता सर्टिफिकेट को धीरे-धीरे डिजिटल रूप से पठनीय पहचान पत्रों से प्रतिस्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। भारत की मान्यता इस डिजिटल परिवर्तन को व्यापक स्वीकृति दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
आगे क्या होगा
भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूतावास की अनौपचारिक पूछताछ को विशेषज्ञ एक सकारात्मक प्रारंभिक संकेत मान रहे हैं। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय यात्रा नीति में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव होगा और लाखों नेपाली नागरिकों की सीमा पार यात्रा को और सरल बना देगा।