17 जुलाई 2026
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नेपाल PM बलेंद्र शाह का संसद में ऐलान: भारत से सीमा विवाद कूटनीति और वार्ता से सुलझाएंगे

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नेपाल PM बलेंद्र शाह का संसद में ऐलान: भारत से सीमा विवाद कूटनीति और वार्ता से सुलझाएंगे

सारांश

नेपाल के PM बलेंद्र शाह ने संसद में पहली बार बोलते हुए भारत से सीमा विवाद को कूटनीति से सुलझाने का भरोसा दिलाया। भारत ने संयुक्त इतिहासकार-विशेषज्ञ टीम बनाने का प्रस्ताव दिया है। लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी पर तनाव कम करने की यह पहल दोनों देशों के रिश्तों के लिए अहम मोड़ हो सकती है।

मुख्य बातें

नेपाल के PM बलेंद्र शाह ने 31 मई 2026 को प्रतिनिधि सभा में सत्ता संभालने के बाद पहली बार संसद को संबोधित किया।
शाह ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा विवाद कूटनीतिक वार्ता और द्विपक्षीय प्रयासों से शीघ्र सुलझाया जाएगा।
लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी विवाद पर भी कूटनीतिक बातचीत से समाधान का आश्वासन दिया।
नेपाल के आधिकारिक कूटनीतिक नोट के जवाब में भारत ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाने का प्रस्ताव दिया।
शाह ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर यूनाइटेड किंगडम सरकार से भी बात की है।
संसद में प्रश्नोत्तर की प्रक्रिया को लेकर कुछ सांसदों ने संसदीय नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए।

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने रविवार, 31 मई 2026 को काठमांडू में प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत-नेपाल सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता और द्विपक्षीय प्रयासों के ज़रिए शीघ्र सुलझाया जाएगा। सत्ता संभालने के बाद यह उनका संसद में पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसे प्रतिनिधि सभा से सीधे प्रसारित किया गया।

संसद में क्या बोले प्रधानमंत्री शाह

एक सांसद के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि यह केवल भारत द्वारा नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण का मामला नहीं है। उन्होंने कहा, 'दोनों पक्षों को बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।' एक अन्य सवाल में लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों से होकर भारत-चीन व्यापार के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि इन विवादों का समाधान भी कूटनीतिक बातचीत से निकाला जाएगा।

कूटनीतिक नोट और भारत का जवाब

प्रधानमंत्री शाह ने सदन को बताया कि नेपाल ने इस मामले पर भारत को आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेजा है और भारत की ओर से जवाब भी प्राप्त हुआ है। उस जवाब में कहा गया है कि 'दोनों देश इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर बातचीत के ज़रिए समाधान निकालेंगे।' इसके अतिरिक्त, शाह ने बताया कि उन्होंने इस सीमा विवाद को लेकर यूनाइटेड किंगडम की सरकार से भी बात की है।

संसदीय प्रक्रिया पर उठे सवाल

सदन में प्रधानमंत्री ने सभापति डीपी आर्यल से सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए समय माँगा। हाथ उठाकर किए गए इस अनुरोध को सभापति ने स्वीकार किया और उन्हें हाउस रोस्ट्रम का उपयोग करने की अनुमति दी। हालाँकि, कुछ सांसदों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए कि यह संसदीय नियमों के अनुरूप है या नहीं। गौरतलब है कि पिछली परंपरा के अनुसार सभापति प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नकाल के लिए विशेष समय निर्धारित करते थे और सांसद पहले से लिखित प्रश्न जमा करते थे।

विवाद की पृष्ठभूमि

लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्र वर्षों से भारत और नेपाल के बीच विवाद का केंद्र रहे हैं। 2020 में नेपाल ने इन क्षेत्रों को अपने नए राजनीतिक मानचित्र में शामिल किया था, जिसे भारत ने अस्वीकार किया था। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं।

आगे की राह

प्रधानमंत्री शाह के इस संसदीय बयान को नेपाल की ओर से एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों और इतिहासकारों की संयुक्त टीम के गठन का प्रस्ताव यदि अमल में आता है, तो यह दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक ठोस कदम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें ठोस समयसीमा या तंत्र का अभाव है — जो नेपाल-भारत सीमा वार्ताओं की पुरानी कमज़ोरी रही है। 2020 के मानचित्र विवाद के बाद से दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय सीमा वार्ता ठप पड़ी है, और 'विशेषज्ञ टीम' का प्रस्ताव नया नहीं है — इसी तरह के प्रस्ताव पहले भी आए और अमल में नहीं आए। असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार दोनों सरकारें टीम का गठन, बैठक की तारीख और पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र तय करती हैं — या यह भी एक और संसदीय आश्वासन बनकर रह जाता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल PM बलेंद्र शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने 31 मई 2026 को नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता और द्विपक्षीय प्रयासों से शीघ्र सुलझाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल ने भारत को आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेजा है और भारत की ओर से सकारात्मक जवाब मिला है।
लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी विवाद क्या है?
लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी भारत-नेपाल सीमा पर स्थित विवादित क्षेत्र हैं जिन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। 2020 में नेपाल ने इन्हें अपने नए राजनीतिक मानचित्र में शामिल किया था, जिसे भारत ने अस्वीकार किया था, और तब से यह विवाद द्विपक्षीय संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
भारत ने नेपाल के कूटनीतिक नोट का क्या जवाब दिया?
भारत ने नेपाल के आधिकारिक कूटनीतिक नोट के जवाब में कहा है कि दोनों देश इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर बातचीत के ज़रिए समाधान निकालेंगे। यह जानकारी स्वयं प्रधानमंत्री शाह ने संसद में दी।
क्या नेपाल ने किसी तीसरे देश से भी इस मामले में बात की है?
हाँ, प्रधानमंत्री शाह ने संसद में बताया कि उन्होंने सीमा विवाद के संदर्भ में यूनाइटेड किंगडम की सरकार से भी बात की है। हालाँकि, उन्होंने उस बातचीत का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया।
नेपाल की संसद में इस सत्र की प्रक्रिया पर विवाद क्यों हुआ?
कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को सभापति की अनुमति से सीधे हाउस रोस्ट्रम पर बुलाकर सवालों के जवाब देने की प्रक्रिया संसदीय नियमों के अनुरूप है या नहीं। पिछली परंपरा में सांसद पहले से लिखित प्रश्न जमा करते थे और प्रश्नकाल के लिए विशेष समय निर्धारित होता था।
राष्ट्र प्रेस
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