19 जुलाई 2026
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भारत-नेपाल सीमा विवाद: बालेंद्र शाह के दावे पर भारत का दो-टूक जवाब, ‘तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं’

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भारत-नेपाल सीमा विवाद: बालेंद्र शाह के दावे पर भारत का दो-टूक जवाब, ‘तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं’

सारांश

नेपाल के PM बालेंद्र शाह के ‘ब्रिटेन और चीन से बातचीत’ वाले बयान पर भारत ने सख्त संदेश दिया — सीमा मामले द्विपक्षीय हैं, तीसरे पक्ष की गुंजाइश नहीं। MEA ने माना कि 98% सीमा तय है, पर गंडक नदी के बहाव-परिवर्तन और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण जैसे मुद्दे अब भी संयुक्त मैपिंग की प्रतीक्षा में हैं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 2 जून को कहा कि भारत-नेपाल सीमा मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं।
भारत-नेपाल सीमा का 98% हिस्सा तय; शेष विवाद गंडक नदी के बहाव-परिवर्तन से जुड़े।
नेपाली PM बालेंद्र शाह ने रविवार को दावा किया था कि भारत और नेपाल दोनों ने एक-दूसरे की जमीन पर कब्जा किया है।
शाह ने यह भी माना कि नेपाल ने सीमा विवाद पर चीन और ब्रिटेन से कूटनीतिक बातचीत की है।
नेपाली विपक्ष और विश्लेषकों ने शाह के बयान को देश की पारंपरिक स्थिति कमज़ोर करने वाला बताया।
लिम्पियाधुरा , लिपुलेक , कालापानी और सुस्ता पर मैपिंग अब भी अधूरी; आधार 1816 की सुगौली संधि ।

भारत ने 2 जून को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सीमा संबंधी हालिया टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मामलों में किसी भी ‘तीसरे पक्ष’ की कोई गुंजाइश नहीं है। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच सभी सीमा-संबंधी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय संवाद और स्थापित तंत्रों के ज़रिए ही किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय की दो-टूक प्रतिक्रिया

नई दिल्ली में मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों और बाद में नेपाली विदेश मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण — दोनों को संज्ञान में लिया है।

जायसवाल ने कहा, “हमने नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत-नेपाल बाउंड्री के बारे में बातें और इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय का बाद में दिया गया बयान देखा है। हालांकि भारत-नेपाल बाउंड्री का लगभग 98 फीसदी हिस्सा तय हो चुका है, लेकिन कुछ हिस्से अभी अनसुलझे हैं। गंडक नदी का रास्ता बदलने की वजह से यह स्थिति बनी है।”

उन्होंने आगे कहा, “सीमा के तय हिस्सों में नो मैन्स लैंड पर सीमा पार से कब्जे के मामले भी हैं, जिनकी अभी मिलकर मैपिंग की जा रही है। हमने सीमा से जुड़े मामलों के सभी पहलुओं से निपटने के लिए द्विपक्षीय सिस्टम बनाए हैं। सभी संबंधित लोगों को यह साफ होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।”

बालेंद्र शाह ने क्या कहा था

विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के रविवार को दिए उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर दावा किया था कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय इलाके पर कब्जा किया हुआ है। हालाँकि शाह ने यह नहीं बताया कि किस स्थान पर नेपाल ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया है।

शाह यह जवाब उन स्थानीय सांसदों को दे रहे थे, जिन्होंने लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी के विवादित क्षेत्रों में भारत के कथित कब्जे को लेकर सवाल पूछे थे। यह इलाका दशकों से व्यावहारिक रूप से भारत के नियंत्रण में है, हालाँकि नेपाल भी इस पर दावा जताता रहा है।

शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि भारत ने न सिर्फ नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले को देखना चाहिए।”

ब्रिटेन-चीन वाला बयान बना विवाद की जड़

नेपाली प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि नेपाल ने भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर चीन और ब्रिटेन से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की है। आलोचकों का कहना है कि यह संभवतः पहली बार है जब किसी नेपाली प्रधानमंत्री ने खुले मंच से ब्रिटेन के साथ ऐसी बातचीत की पुष्टि की हो।

शाह के अनुसार, “हमने न सिर्फ भारत और चीन से बल्कि ब्रिटेन सरकार से भी बात की है। हमारा मानना है कि ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि यह मामला उस समय का है, जब भारत पर अंग्रेजों का कंट्रोल था।”

इस बयान के बाद नेपाल के विपक्षी दलों, विदेश-नीति विश्लेषकों और सीमा विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री की तीखी आलोचना की। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयानों से भारत के साथ भविष्य की द्विपक्षीय वार्ताओं में नेपाल की पारंपरिक स्थिति कमज़ोर हुई है।

नेपाल सरकार का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने पर नेपाल सरकार ने रविवार को बयान जारी कर सफाई दी कि प्रधानमंत्री का संदर्भ मुख्यतः सीमावर्ती इलाकों में हुए तकनीकी अध्ययन और नो-मैन्स लैंड में अतिक्रमण से जुड़ा था, न कि औपचारिक क्षेत्रीय दावों से।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नदी-सीमा वाले इलाकों में लागू ‘फिक्स्ड बाउंड्री प्रिंसिपल’ की वजह से कुछ स्थानों पर ऐसी स्थिति बनी है, जहाँ नेपाली नागरिक तकनीकी रूप से भारतीय भू-भाग पर खेती करते हैं या बसे हुए हैं, और भारतीय नागरिक नेपाल की ओर पड़ने वाली जमीन का उपयोग करते हैं।

सुगौली संधि और अधूरी मैपिंग

गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच लंबी और खुली सीमा का अधिकांश हिस्सा 1816 की सुगौली संधि से निर्धारित हुआ था। हालाँकि सुस्ता और लिम्पियाधुरा-लिपुलेख-कालापानी जैसे क्षेत्रों में मैपिंग का काम अब भी अधूरा है, जो समय-समय पर राजनयिक तनाव की वजह बनता रहा है।

रबी लामिछाने का भारत दौरा

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने के चल रहे भारत दौरे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के लोगों के बीच करीबी संबंध हैं और दोनों तरफ की पॉलिटिकल पार्टियों के बीच भी संबंध हैं और ये संपर्क जारी हैं।”

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या काठमांडू औपचारिक स्तर पर अपने रुख में नरमी लाता है, और क्या दोनों पक्ष लंबित मैपिंग प्रक्रिया को तेज़ करने पर सहमत होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों मोर्चों पर ‘द्विपक्षीयता’ की दीवार ऊँची करने का अवसर देता है। नई दिल्ली का जवाब संयमित है, पर संदेश साफ़ है: कालापानी-लिपुलेख जैसे मुद्दों पर किसी पूर्व-औपनिवेशिक शक्ति की ‘रुचि’ स्वीकार्य नहीं। दिलचस्प यह है कि शाह को घर में ही विपक्ष और विशेषज्ञों की आलोचना झेलनी पड़ रही है, जो मानते हैं कि उन्होंने नेपाल का सौदेबाजी का पत्ता खुद कमज़ोर कर दिया। असली कसौटी अब यह है कि क्या दोनों पक्ष लंबित संयुक्त मैपिंग को राजनीतिक शोर से अलग कर तकनीकी ट्रैक पर आगे बढ़ा पाएँगे।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नेपाल सीमा विवाद पर भारत ने क्या कहा है?
भारत ने 2 जून को साफ कर दिया कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि समाधान केवल स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से ही होगा।
बालेंद्र शाह ने सीमा को लेकर क्या दावा किया था?
नेपाली PM बालेंद्र शाह ने रविवार को संसद में कहा था कि भारत ने नेपाली जमीन पर कब्जा किया है और नेपाल ने भी कई जगह भारतीय जमीन पर कब्जा किया हुआ है। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस स्थान पर नेपाल ने भारतीय भू-भाग पर कब्जा किया है।
कालापानी, लिपुलेक और लिम्पियाधुरा विवाद क्या है?
ये उत्तराखंड से सटे वे क्षेत्र हैं जिन पर भारत और नेपाल दोनों दावा करते हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह इलाका दशकों से भारत के नियंत्रण में है। नेपाल ने 2020 में अपने नक्शे में इन्हें शामिल किया था, जिसके बाद से विवाद और तीखा हो गया।
क्या नेपाल ने सच में ब्रिटेन और चीन से सीमा पर बात की है?
बालेंद्र शाह ने स्वयं स्वीकार किया कि नेपाल ने भारत के साथ-साथ चीन और ब्रिटेन से भी कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की है। उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिटेन की दिलचस्पी इसलिए होनी चाहिए क्योंकि विवाद की जड़ अंग्रेजी शासन काल की है।
भारत-नेपाल सीमा का कितना हिस्सा अभी तय नहीं है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार लगभग 98 प्रतिशत सीमा का सीमांकन पूरा हो चुका है, और शेष 2 प्रतिशत हिस्से में विवाद मुख्यतः गंडक नदी के बहाव-परिवर्तन तथा नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण से जुड़ा है। इन क्षेत्रों की संयुक्त मैपिंग प्रक्रिया अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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