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भारत-नेपाल सीमा विवाद: बालेंद्र शाह के दावे पर भारत का दो टूक जवाब, ‘तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं’

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भारत-नेपाल सीमा विवाद: बालेंद्र शाह के दावे पर भारत का दो टूक जवाब, ‘तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं’

सारांश

नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह ने सीमा विवाद में ब्रिटेन और चीन से बातचीत का ज़िक्र क्या किया, भारत का रुख़ तीखा हो गया। MEA ने साफ़ कहा कि भारत-नेपाल का सीमा मसला विशुद्ध द्विपक्षीय है—तीसरे पक्ष की कोई गुंजाइश नहीं। 98% सीमा तय है, बाक़ी पर मैपिंग चालू है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 2 जून को साफ़ किया कि भारत-नेपाल के द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार सीमा का 98% हिस्सा तय है, शेष पर मैपिंग चल रही है।
नेपाली पीएम बालेंद्र शाह ने रविवार को कहा कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाक़े पर कब्ज़ा किया है, पर स्थान नहीं बताया।
शाह ने चीन और ब्रिटेन से सीमा मुद्दे पर बातचीत की बात मानी, जिसकी नेपाल में ही कड़ी आलोचना हो रही है।
विवादित क्षेत्र लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी दशकों से भारत के नियंत्रण में हैं; सीमा रेखा 1816 की सुगौली संधि से तय हुई थी।

भारत ने 2 जून को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भारत-नेपाल सीमा को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देशों के द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय संवाद और पहले से स्थापित तंत्रों के ज़रिये ही होगा।

विदेश मंत्रालय का सख़्त रुख़

नई दिल्ली में मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाली प्रधानमंत्री की टिप्पणियाँ और नेपाली विदेश मंत्रालय का बाद का बयान, दोनों देख लिए हैं।

जायसवाल ने कहा, “हमने नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत-नेपाल बाउंड्री के बारे में बातें और इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय का बाद में दिया गया बयान देखा है। हालांकि भारत-नेपाल बाउंड्री का लगभग 98 फीसदी हिस्सा तय हो चुका है, लेकिन कुछ हिस्से अभी अनसुलझे हैं। गंडक नदी का रास्ता बदलने की वजह से यह स्थिति बनी है।”

उन्होंने आगे कहा, “सीमा के तय हिस्सों में नो मैन्स लैंड पर सीमा पार से कब्जे के मामले भी हैं, जिनकी अभी मिलकर मैपिंग की जा रही है। … भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।”

बालेंद्र शाह का वह दावा जिसने विवाद खड़ा किया

विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के रविवार को संसद में दिए गए उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय इलाक़े पर कब्ज़ा किया हुआ है। हालाँकि शाह ने यह नहीं बताया कि वह क्षेत्र विशेष रूप से कहाँ है।

शाह स्थानीय सांसदों के उन सवालों का जवाब दे रहे थे, जो लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी के विवादित इलाक़ों में भारत के कथित कब्ज़े को लेकर पूछे गए थे। ये क्षेत्र दशकों से भारत के नियंत्रण में हैं, जबकि नेपाल भी इन पर दावा करता रहा है।

शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि भारत ने न सिर्फ नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले को देखना चाहिए।”

ब्रिटेन और चीन का ज़िक्र, नेपाल में ही आलोचना

शाह के बयान का सबसे विवादास्पद हिस्सा यह था कि नेपाल ने भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर चीन और ब्रिटेन के साथ कूटनीतिक बातचीत की है। कथित तौर पर यह पहली बार है जब नेपाल ने खुले मंच पर माना कि वह सीमा विवाद को लेकर ब्रिटेन से भी बात कर रहा है।

शाह ने तर्क दिया, “हमने न सिर्फ भारत और चीन से बल्कि ब्रिटेन सरकार से भी बात की है। … यह मामला उस समय का है, जब भारत पर अंग्रेजों का कंट्रोल था।”

आलोचकों का कहना है कि इस तरह तीसरे देशों का ज़िक्र करने से नेपाल की पारंपरिक द्विपक्षीय स्थिति कमज़ोर पड़ी है। नेपाल के विपक्षी दलों, विदेश मामलों के विश्लेषकों और सीमा विशेषज्ञों ने शाह के बयान को कूटनीतिक चूक बताया है।

नेपाल सरकार की सफ़ाई

विवाद बढ़ने पर नेपाल सरकार ने रविवार को सफ़ाई जारी की कि प्रधानमंत्री का संदर्भ मुख्यतः सीमावर्ती इलाक़ों के तकनीकी अध्ययन और नो-मैन्स लैंड में अतिक्रमण से जुड़ा था। नेपाली विदेश मंत्रालय के अनुसार, नदी सीमा वाले क्षेत्रों में अपनाए गए “फिक्स्ड बाउंड्री प्रिंसिपल” के कारण कुछ जगहों पर नेपाली नागरिक तकनीकी रूप से भारतीय भू-भाग पर खेती कर रहे हैं, जबकि कुछ भारतीय नागरिक नेपाली इलाक़े में बसे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

भारत और नेपाल के बीच लंबी और खुली सीमा है, जिसका अधिकांश हिस्सा 1816 की सुगौली संधि से तय हुआ था। हालाँकि सुस्ता और लिम्पियाधुरा-लिपुलेख-कालापानी जैसे क्षेत्रों में मैपिंग अब भी अधूरी है। गौरतलब है कि 2020 में नेपाल द्वारा संशोधित मानचित्र जारी किए जाने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में सीमा का मुद्दा बार-बार उभरता रहा है।

मंगलवार की ब्रीफिंग में जायसवाल ने नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने के चल रहे भारत दौरे का भी ज़िक्र किया और कहा कि दोनों देशों के लोगों तथा राजनीतिक दलों के बीच निकट संपर्क जारी हैं। आगे अब निगाहें इस पर हैं कि क्या काठमांडू पुराने द्विपक्षीय तंत्रों के ज़रिए मैपिंग प्रक्रिया को गति देता है, या यह मुद्दा कूटनीतिक खींचतान का नया अध्याय बनता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह काठमांडू की दशकों पुरानी ‘द्विपक्षीय समाधान’ की स्थिति को कमज़ोर करता है। भारत का जवाब संयमित पर बेहद स्पष्ट है—98% सीमा का निपटारा हो चुका है, बाक़ी तकनीकी मसले हैं, न कि अंतरराष्ट्रीयकरण का बहाना। असली सवाल यह है कि क्या नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता और घरेलू दबाव बार-बार सीमा मुद्दे को राष्ट्रवादी कार्ड में बदलते रहेंगे, जिससे ज़मीनी मैपिंग पीछे छूट जाएगी। मुख्यधारा की कवरेज जिस बात पर कम बात कर रही है, वह है—2020 के नेपाली मानचित्र विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा मौक़ा है जब काठमांडू ने तीसरे पक्ष का इशारा किया।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नेपाल सीमा विवाद पर भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 2 जून को कहा कि भारत और नेपाल के बीच के सभी द्विपक्षीय मामलों, ख़ासकर सीमा मुद्दे, में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि समाधान केवल द्विपक्षीय संवाद और स्थापित तंत्रों के ज़रिए होगा।
बालेंद्र शाह ने ऐसा क्या कहा जिससे विवाद खड़ा हुआ?
नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संसद में कहा कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय इलाक़े पर कब्ज़ा किया है, और यह भी जोड़ा कि नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर चीन तथा ब्रिटेन से कूटनीतिक बातचीत की है। हालाँकि उन्होंने कथित कब्ज़े वाला कोई विशिष्ट स्थान नहीं बताया।
लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी विवाद क्या है?
ये तीन क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा पर विवादित बिंदु हैं, जिन पर दोनों देश दावा करते हैं, हालाँकि ये दशकों से वास्तव में भारत के नियंत्रण में हैं। 2020 में नेपाल द्वारा संशोधित मानचित्र जारी करने के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय सुर्ख़ियों में आया था।
भारत-नेपाल सीमा का कितना हिस्सा अभी तय हो चुका है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा तय हो चुका है। शेष हिस्से, मुख्यतः गंडक नदी के रास्ते में बदलाव और सुस्ता जैसे क्षेत्रों में, अभी संयुक्त मैपिंग के ज़रिए सुलझाए जा रहे हैं।
शाह के बयान पर नेपाल में क्या प्रतिक्रिया हुई?
नेपाल के विपक्षी दलों, विदेश मामलों के विशेषज्ञों और सीमा विश्लेषकों ने शाह के बयान की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि तीसरे देशों का ज़िक्र करके शाह ने सीमा वार्ताओं में नेपाल की पारंपरिक स्थिति को कमज़ोर किया है।
राष्ट्र प्रेस
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