28 जुलाई 2026
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भारत-चीन सीमा व्यापार बहाली: लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला से होगी शुरुआत, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

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भारत-चीन सीमा व्यापार बहाली: लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला से होगी शुरुआत, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

सारांश

चार साल की व्यावहारिक बाधा के बाद भारत और चीन तीन ऐतिहासिक दर्रों — लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला — से सीमा व्यापार बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। अगस्त 2025 की सहमति अब ज़मीन पर उतर रही है — और यह केवल व्यापार नहीं, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की परीक्षा भी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 28 जुलाई को पुष्टि की कि भारत-चीन लिपुलेख , शिपकी ला और नाथू ला दर्रों से सीमा व्यापार बहाल करने पर अमल तेज कर रहे हैं।
यह कदम 19 अगस्त 2025 की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में हुई सहमति के अनुरूप है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की।
जयशंकर ने मनीला में आसियान बैठकों के दौरान वांग यी से मिलकर स्पष्ट किया कि सीमा शांति संबंध सामान्यीकरण की पहली शर्त है।
तीनों दर्रे 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से व्यावहारिक रूप से बंद थे; अक्टूबर 2024 से कूटनीतिक संपर्क बहाल हुए।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 28 जुलाई को पुष्टि की कि भारत और चीन तीन निर्धारित सीमा व्यापारिक मार्गों — लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला दर्रों — के ज़रिए व्यापार बहाल करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। यह कदम 19 अगस्त 2025 को जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में हुई सहमति के अनुरूप उठाया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि 19 अगस्त 2025 की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में दोनों देशों ने तीनों निर्धारित मार्गों से सीमा व्यापार पुनः शुरू करने पर सहमति जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह फैसला उसी समय लिया गया था और उस दौरान हुई चर्चाओं की जानकारी भी साझा की गई थी। अब उसी समझ के अनुरूप आगे की प्रक्रिया को अमल में लाया जा रहा है।'

गौरतलब है कि अगस्त 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (SR) की वार्ता की थी। उसी दौरान वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।

उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्क

इसी कड़ी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी मौजूदा चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों के समस्त पहलुओं की समीक्षा की और व्यापार, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

इससे पूर्व पिछले सप्ताह फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान बैठकों के दौरान जयशंकर और वांग यी के बीच भी मुलाकात हुई थी। इस बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति, द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

सीमा शांति — पहली और अनिवार्य शर्त

मनीला बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत-चीन संबंधों के सामान्य होने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अक्टूबर 2024 से दोनों देश इस उद्देश्य की दिशा में काम कर रहे हैं और संबंधित तंत्र को निरंतर मज़बूत बनाए रखने की ज़रूरत है। दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए सीमा क्षेत्रों में स्थायी शांति अनिवार्य है।

आम जनता और व्यापारियों पर असर

सीमा व्यापार की बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय व्यापारियों और निवासियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। लिपुलेख (उत्तराखंड), शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश) और नाथू ला (सिक्किम) — ये तीनों दर्रे ऐतिहासिक रूप से भारत-चीन सीमा व्यापार के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से व्यावहारिक रूप से बाधित थे।

आगे की राह

विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमा व्यापार की बहाली दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख गतिरोध के समाधान के बाद से कूटनीतिक संपर्क लगातार बढ़ रहे हैं। उच्च स्तरीय बैठकों की यह श्रृंखला संकेत देती है कि दोनों पक्ष संबंधों को व्यावहारिक धरातल पर स्थिर करने के प्रति गंभीर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और गहराई में है — 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से इन दर्रों पर व्यापार लगभग ठप रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में चीन का विकल्प बनने की कोशिश कर रहा है, और सीमा व्यापार की बहाली उस रणनीतिक संदेश को जटिल बना सकती है। विदेश मंत्रालय की भाषा सावधान और प्रक्रिया-केंद्रित है — 'अमल तेज हो रहा है' का अर्थ अभी व्यापार शुरू होना नहीं है। जब तक तीनों दर्रों पर वास्तविक वाणिज्यिक गतिविधि शुरू नहीं होती, यह सहमति केवल राजनयिक प्रगति का संकेत है, ज़मीनी बदलाव नहीं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-चीन सीमा व्यापार बहाली किन दर्रों से होगी?
भारत और चीन तीन निर्धारित मार्गों — लिपुलेख (उत्तराखंड), शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश) और नाथू ला (सिक्किम) — के ज़रिए सीमा व्यापार पुनः शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह सहमति 19 अगस्त 2025 की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज की गई थी।
19 अगस्त 2025 की भारत-चीन सहमति क्या थी?
19 अगस्त 2025 को जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में दोनों देशों ने लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला दर्रों से सीमा व्यापार बहाल करने पर सहमति जताई थी। यह सहमति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच नई दिल्ली में हुई विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के दौरान बनी थी।
विक्रम मिस्री की चीन यात्रा का क्या महत्व है?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की, जिसमें भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं — व्यापार, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क — की समीक्षा की गई। यह यात्रा सीमा व्यापार बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के व्यापक कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है।
सीमा व्यापार बहाली के लिए भारत की मुख्य शर्त क्या है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मनीला में स्पष्ट कहा कि भारत-चीन संबंधों के सामान्य होने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों देश इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
सीमा व्यापार कब से बंद था और अब क्यों बहाल हो रहा है?
2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद से भारत-चीन सीमा व्यापार व्यावहारिक रूप से ठप था। अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख गतिरोध के समाधान के बाद कूटनीतिक संपर्क बहाल हुए और अगस्त 2025 में उच्च स्तरीय बैठकों में व्यापार पुनः शुरू करने पर सहमति बनी, जिसे अब अमल में लाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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