भारत-चीन व्यापार लिपुलेख दर्रे से 7 साल बाद फिर से शुरू, पिथौरागढ़ प्रशासन ने बनाई कार्ययोजना
सारांश
Key Takeaways
- लिपुलेख दर्रा के माध्यम से व्यापार 2026 में पुनः शुरू होगा।
- पिछली बार 265 ट्रेड पास जारी किए गए थे।
- व्यापार की अवधि जून से सितम्बर तक निर्धारित की गई है।
- आयात में ऊन और रेशम शामिल हैं, जबकि निर्यात में कपड़ा और कृषि उपकरण हैं।
- पिथौरागढ़ प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का आश्वासन दिया है।
पिथौरागढ़, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार 7 साल के अंतराल के बाद पुनः आरंभ होने जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों द्वारा कई वर्षों से इस व्यापार को शुरू करने की मांग उठाई जा रही थी।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत–चीन सीमा व्यापार को वर्ष 2026 में फिर से शुरू करने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्रालय द्वारा लिपुलेख दर्रे के माध्यम से इस व्यापार को पुनः आरंभ करने की मंजूरी मिल गई है और आगामी व्यापार सत्र की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि भारत–चीन समझौते के अनुसार व्यापार की अवधि जून से सितम्बर तक निर्धारित है, हालाँकि मौसम की स्थिति के आधार पर इसे बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं पर्यटन कार्यालय के संचालन के लिए स्थानीय व्यक्तियों की संविदा पर नियुक्ति और व्यापार अवधि के दौरान पीआरडी स्वयंसेवकों की तैनाती को लेकर भी चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने व्यापार पास और यात्रा पास जारी करने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि वर्ष 2026 में व्यापारियों को ट्रेड पास जारी किए जाएंगे। पिछली बार कुल 265 ट्रेड पास जारी किए गए थे और इस बार मांग बढ़ने की संभावना है।
अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि व्यापार अवधि के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की शाखा द्वारा नकद एवं मुद्रा विनिमय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस वर्ष भी इस सुविधा को सुनिश्चित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सीमा व्यापार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सीमा शुल्क विभाग बरेली से कस्टम स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि व्यापार आरंभ होने से पूर्व निरीक्षण चौकियों पर कार्मिक मौजूद रहें।
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि भारत–चीन सीमा व्यापार समझौते के अनुसार आयात में ऊन, नमक, रेशम, और निर्यात में कपड़ा, मसाले, एवं कृषि उपकरण शामिल हैं।
उपजिलाधिकारी ने बताया कि पिछले व्यापार अवधि में इस क्षेत्र से लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और 1.90 करोड़ रुपए का आयात किया गया था।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वर्ष 2026 में सीमा व्यापार को पूर्व की भांति संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर, मार्ग व्यवस्था, एवं सुरक्षा को समय से तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि वर्ष 2026 का भारत–चीन सीमा व्यापार सुचारू और सुरक्षित तरीके से सम्पन्न हो सके।