केरल बाढ़: CM सतीशन बोले- 'प्रबंधन में कोई चूक नहीं', हेलीकॉप्टर विवाद पर भी दिया करारा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 3 अगस्त को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में बाढ़ प्रबंधन में कोई भी प्रशासनिक चूक नहीं हुई। उन्होंने विपक्ष पर आपदा के दौरान भ्रामक नैरेटिव फैलाने का आरोप लगाया और सरकारी हेलीकॉप्टर के उपयोग को लेकर उठे विवाद पर भी सीधा जवाब दिया।
बाढ़ की मौजूदा स्थिति
मुख्यमंत्री सतीशन ने बताया कि केरल में बाढ़ की स्थिति अधिकांश जिलों में नियंत्रण में है। पथानामथिट्टा एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ बाढ़ का पानी अभी भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। राज्यभर में 316 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें 11,018 लोगों को आश्रय दिया गया है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग अभी भी लापता हैं।
बचाव अभियान के तहत कोल्लम से पथानामथिट्टा के लिए 14 बचाव नौकाएँ भेजी गई हैं। सुलूर से 2 हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर हैं, एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं और कन्नूर व वायनाड में सेना की टुकड़ियाँ आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
पूर्व तैयारी और मौसम की अप्रत्याशितता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को भारी बारिश की आशंका पहले से थी और इसी के मद्देनज़र 30 जुलाई व 1 अगस्त को जिला कलेक्टरों की बैठकें बुलाई गई थीं। उन्हें निर्देश दिया गया था कि बारिश तेज होने से पहले राहत शिविर और आपातकालीन व्यवस्थाएँ पूरी तरह तैयार कर ली जाएँ।
वर्षा की तीव्रता का उल्लेख करते हुए सतीशन ने बताया कि वडासेरिकारा समेत कुछ स्थानों पर 350 मिमी और कई अन्य क्षेत्रों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई — जबकि 200 मिमी से अधिक वर्षा को 'अत्यधिक बारिश' की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने कहा, 'मैंने मौसम विभाग के विशेषज्ञों से पूछा कि बादल फटने जैसी बारिश का पहले से पता क्यों नहीं चल पाया। उन्होंने बताया कि यह बढ़ते तापमान के कारण मौसम की एक नई घटना थी और इसका पूर्वानुमान लगाना मुश्किल था।'
किसानों को नुकसान और मुआवज़ा
बाढ़ से 3,000 से अधिक किसानों की लगभग 165 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। कैबिनेट जल्द ही मुआवज़े पर निर्णय ले सकती है। घर छोड़ने पर मजबूर परिवारों को तत्काल राहत के रूप में ₹10,000 दिए जाएँगे। अंतिम संस्कार के खर्च के लिए भी ₹10,000 मंजूर किए गए हैं। मृतकों के परिजनों को कुल ₹8 लाख की सहायता मिलेगी — जिसमें एसडीआरएफ से ₹4 लाख, सीएमडीआरएफ से ₹2 लाख और पीएमआरएफ से ₹2 लाख शामिल हैं।
अफवाहों पर कड़ी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने केरल के बाँधों के ओवरफ्लो होने की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा, 'आपदा के समय गलत सूचनाओं के ज़रिए घबराहट फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है। सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।' तटीय कटाव वाले क्षेत्रों पर भी निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
हेलीकॉप्टर और लंच विवाद पर सफाई
अपने बीमार ससुर से मिलने के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर के उपयोग पर उठे सवालों के जवाब में सतीशन ने पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मैंने पिनाराई विजयन की तरह राजनीतिक बैठकों में शामिल होने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं किया। यह हेलीकॉप्टर एक अनुबंध के तहत है जिसके लिए सरकार 25 उड़ान घंटों के लिए ₹80 लाख का मासिक रिटेनर देती है। मेरी यात्रा से सरकारी खजाने पर एक रुपए का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा।'
लंच विवाद पर उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के एक दिवंगत नेता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने गए थे और वहाँ उन्हें दोपहर के भोजन का अनुरोध किया गया था। उन्होंने पूछा, 'क्या 2018 और 2019 की बाढ़ के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री उपवास पर थे?' मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि संकट के दौरान हर तीन घंटे में मीडिया को अपडेट जारी किए जा रहे थे और राजस्व मंत्री ने दिनभर कई प्रेस ब्रीफिंग कीं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केरल में मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन और राजनीतिक जवाबदेही दोनों पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।