केरल में बाढ़-भूस्खलन का कहर: 11 की मौत, 7,674 लोग राहत शिविरों में; CM सतीशन ने बुलाई आपातकालीन बैठक
सारांश
मुख्य बातें
केरल में 3 अगस्त 2026 को लगातार मूसलाधार बारिश के चलते राज्यव्यापी बाढ़ और भूस्खलन की गंभीर स्थिति बन गई है — 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, 7,674 विस्थापित नागरिक राज्य भर के 273 राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं, और मूझियार बांध का जलस्तर रेड अलर्ट स्तर तक पहुँच गया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार को जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें बचाव अभियान और राहत कार्यों की समीक्षा की गई।
आपातकालीन बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री सतीशन की अध्यक्षता में हुई इस हाई-लेवल ऑनलाइन बैठक में गृह मंत्री, राजस्व मंत्री, सभी जिलों के प्रभारी मंत्री, मुख्य सचिव और जिला कलेक्टर शामिल हुए। बैठक में राज्यभर में बारिश की स्थिति, राहत शिविरों के संचालन, बचाव अभियानों की प्रगति और एहतियाती उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और मज़बूत करने के लिए आगे के निर्देश जारी किए।
मौसम विभाग की चेतावनी और बारिश का कारण
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को केरल के सभी 14 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और तेज हवाओं तथा आँधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है। IMD के अनुसार, बारिश का यह दौर दक्षिण गुजरात तट से लेकर उत्तर केरल तट तक फैले एक तटीय गर्त की वजह से आया है। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 5 अगस्त से भारी बारिश का एक और दौर शुरू होने की संभावना है।
मूझियार बांध और नदियों का खतरनाक जलस्तर
सबसे बड़ी चिंता मूझियार बांध को लेकर है, जहाँ जलग्रहण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के कारण जलाशय का स्तर रेड अलर्ट सीमा यानी 190 मीटर तक पहुँच गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जलस्तर अधिकतम क्षमता 192.63 मीटर तक पहुँचा, तो बांध के शटर खोलकर पानी कक्काट्टार नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ेगा। पम्बा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते पथानामथिट्टा जिले के रानी और कोझेनचेरी तालुकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। कक्काट्टार और पम्बा नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को नदियों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
नुकसान और राहत कार्यों की स्थिति
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 30 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 293 घरों को आंशिक नुकसान पहुँचा है। 7,674 लोगों को 273 राहत शिविरों में रखा गया है — इनमें पथानामथिट्टा में 75, कोट्टायम में 64 और कोझिकोड में 36 शिविर शामिल हैं। हालाँकि, कुछ शिविरों से बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई की कमी की शिकायतें भी सामने आई हैं। समुद्र में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण केरल के तट पर मछली पकड़ने और जल-पर्यटन गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गई है।
2018 की बाढ़ की यादें और आगे की चुनौती
यह ऐसे समय में आया है जब केरल अभी तक 2018 की विनाशकारी बाढ़ की मनोवैज्ञानिक और बुनियादी ढाँचागत छाप से पूरी तरह उबरा नहीं है। गौरतलब है कि वायनाड में कुछ राहत मिली है, जबकि मलप्पुरम में रुक-रुक कर बारिश जारी है। थमारासेरी घाट पास और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पाबंदियाँ लागू हैं, और कोझिकोड शहर में भारी जलभराव की समस्या बनी हुई है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा मौसम प्रणाली, पानी से भरे जलग्रहण क्षेत्र और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अत्यधिक सतर्कता जरूरी है — भले ही मौसम वैज्ञानिक 2018 जैसी अभूतपूर्व स्थिति की सीधी पुनरावृत्ति की आशंका अभी नहीं जता रहे।