3 अगस्त 2026
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हरदोई में गंगा स्नान के दौरान हादसा: तीन कांवड़िए बहे, एक बचाया गया, नारद और ऋषि की तलाश जारी

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हरदोई में गंगा स्नान के दौरान हादसा: तीन कांवड़िए बहे, एक बचाया गया, नारद और ऋषि की तलाश जारी

सारांश

सावन के पहले सोमवार की आस्था हरदोई में दर्दनाक हादसे में बदल गई। कुसुमखोर गंगा घाट पर तीन कांवड़िए तेज बहाव में बह गए — एक को ग्रामीणों ने बचाया, नारद और ऋषि अभी भी लापता हैं। एसडीआरएफ और पुलिस की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

3 अगस्त 2026 को सुबह 7:30 बजे हरदोई के कुसुमखोर गंगा घाट पर तीन कांवड़िए तेज बहाव में बह गए।
तीनों युवक — नारद , ऋषि और शिवम — चौसार गाँव , अरवल थाना क्षेत्र के निवासी हैं।
ग्रामीणों की बहादुरी से शिवम को सुरक्षित बाहर निकाला गया; नारद और ऋषि अभी भी लापता हैं।
एसडीआरएफ , स्थानीय गोताखोर और पुलिस की संयुक्त टीम तलाश अभियान में जुटी है।
अपर पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने लोगों से केवल चिह्नित घाटों पर स्नान करने की अपील की।

सावन के पहले सोमवार को हरदोई जिले के अरवल थाना क्षेत्र स्थित कुसुमखोर गंगा घाट पर गंगा स्नान के दौरान तीन कांवड़िए नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। 3 अगस्त 2026 की सुबह करीब 7:30 बजे हुई इस घटना में ग्रामीणों की सूझबूझ से एक युवक को बचा लिया गया, जबकि दो लापता कांवड़ियों की तलाश अभी भी जारी है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

चौसार गाँव (अरवल थाना क्षेत्र) निवासी नारद, ऋषि और शिवम सोमवार को कन्नौज के प्रसिद्ध गौरी शंकर मंदिर में गंगाजल अर्पित करने गए थे। पूजा-अर्चना के बाद लौटते समय तीनों कुसुमखोर घाट पर स्नान के लिए रुके। इसी दौरान गंगा की तेज धारा में उनका संतुलन बिगड़ गया और तीनों डूबने लगे।

घाट पर उपस्थित ग्रामीणों ने तत्काल साहस दिखाते हुए शिवम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालाँकि, नारद और ऋषि तेज धारा में बह गए और अभी तक लापता हैं।

प्रशासन और बचाव दल की प्रतिक्रिया

सूचना मिलते ही सवायजपुर के उप जिलाधिकारी अंकित तिवारी, थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह, नायब तहसीलदार राजेश कुमार पटेल और फायर इंस्पेक्टर चौहान गौतम सहित पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुँच गईं। स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम के साथ मिलकर तलाश अभियान चलाया जा रहा है।

अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने बताया कि तीनों युवक स्नान के दौरान नदी की मुख्य धारा में चले गए, जिसके बाद पुलिस और स्थानीय गोताखोरों ने बचाव प्रयास शुरू किए। उन्होंने कहा कि शिवम को सुरक्षित निकाल लिया गया है और शेष दोनों की तलाश के लिए सभी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

परिजनों की स्थिति और घाट पर माहौल

हादसे की खबर फैलते ही घाट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लापता कांवड़ियों के परिजन गहरे सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर परिजनों को ढाढस बँधाने का प्रयास किया।

प्रशासन की अपील और सुरक्षा निर्देश

अपर पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि इस समय गंगा का जलस्तर ऊँचा है, इसलिए केवल पुलिस द्वारा चिह्नित घाटों पर ही स्नान करें। प्रशासन ने भी आम जनता से अनुरोध किया है कि तेज बहाव वाले क्षेत्रों में स्नान से बचें और सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सावन के महीने में लाखों कांवड़िए गंगाजल लेने के लिए घाटों पर उमड़ते हैं। गौरतलब है कि हर वर्ष इस अवधि में नदियों में बढ़े जलस्तर के कारण कई दुखद हादसे सामने आते हैं। तलाश अभियान जारी है और आगे की जानकारी मिलने पर स्थिति स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो असुरक्षित घाटों पर स्नान रोकने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग और जीवन-रक्षक दल पहले से तैनात क्यों नहीं होते। अपील और निर्देश हादसे के बाद जारी होते हैं — जबकि ज़रूरत है कि ये उससे पहले लागू हों।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरदोई के कुसुमखोर घाट पर क्या हुआ?
3 अगस्त 2026 को सावन के पहले सोमवार की सुबह हरदोई के कुसुमखोर गंगा घाट पर स्नान के दौरान तीन कांवड़िए — नारद, ऋषि और शिवम — गंगा की तेज धारा में बह गए। ग्रामीणों ने शिवम को बचा लिया, जबकि नारद और ऋषि अभी भी लापता हैं।
लापता कांवड़ियों की तलाश के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
एसडीआरएफ, स्थानीय गोताखोर, पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम लगातार तलाश अभियान चला रही है। उप जिलाधिकारी अंकित तिवारी और थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
तीनों कांवड़िए घाट पर क्यों आए थे?
नारद, ऋषि और शिवम कन्नौज के गौरी शंकर मंदिर में गंगाजल अर्पित करने गए थे। वापसी के दौरान वे कुसुमखोर घाट पर स्नान के लिए रुके, जहाँ यह हादसा हुआ।
प्रशासन ने लोगों को क्या सलाह दी है?
अपर पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने अपील की है कि गंगा का जलस्तर इस समय ऊँचा है, इसलिए केवल पुलिस द्वारा चिह्नित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें। तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
सावन में गंगा घाटों पर हादसे क्यों बढ़ जाते हैं?
सावन के महीने में मानसून के कारण गंगा का जलस्तर और बहाव दोनों बढ़ जाते हैं, जबकि इसी दौरान लाखों कांवड़िए और श्रद्धालु घाटों पर उमड़ते हैं। इस संयोग से हर वर्ष कई दुखद हादसे सामने आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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