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आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और 'केसरी' के पूर्व संपादक एमए कृष्णन का 97 वर्ष की आयु में निधन

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आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और 'केसरी' के पूर्व संपादक एमए कृष्णन का 97 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

केरल में आरएसएस की सांस्कृतिक जड़ें मजबूत करने वाले एमए कृष्णन अब नहीं रहे। 1954 से प्रचारक, 1964 से 'केसरी' के संपादक और 'बालगोकुलम' के संस्थापक — उनका सात दशक लंबा सफर केरल की वैचारिक और सांस्कृतिक धारा को आकार देने की अनथक कोशिश की कहानी है।

मुख्य बातें

एमए कृष्णन का निधन 29 सितंबर को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में 97 वर्ष की आयु में हुआ।
वे 1954 में आरएसएस प्रचारक बने और प्रांत बौद्धिक प्रमुख तथा प्रचार प्रमुख जैसी जिम्मेदारियाँ निभाईं।
1964 में 'केसरी' के मुख्य संपादक बने और दशकों तक सांस्कृतिक-वैचारिक लेखन जारी रखा।
'बालगोकुलम' और 'तपस्या कला साहित्य वेदी' के संस्थापक के रूप में बाल-संस्कृति के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया।
BJP प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने उनके निधन को केरल के सांस्कृतिक जीवन की अपूरणीय क्षति बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और मलयालम पत्रिका 'केसरी' के पूर्व मुख्य संपादक एमए कृष्णन का मंगलवार, 29 सितंबर को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। 'एमए सर' के नाम से लोकप्रिय कृष्णन केरल में संघ परिवार की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के एक प्रमुख स्तंभ माने जाते थे।

संगठनात्मक यात्रा और योगदान

एमए कृष्णन ने 1954 में आरएसएस प्रचारक के रूप में अपना सफर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने संगठन में प्रांत बौद्धिक प्रमुख और प्रचार प्रमुख जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। केरल में आरएसएस के विस्तार और उससे जुड़ी सांस्कृतिक पहलों को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका को अग्रणी माना जाता है।

गौरतलब है कि उनका कार्यकाल केवल संगठनात्मक ढाँचे तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने साहित्य, बाल-संस्कृति और सामाजिक जागरण के मोर्चे पर भी अमिट छाप छोड़ी।

मीडिया और साहित्यिक क्षेत्र में पहचान

1964 में कृष्णन ने 'केसरी' के संपादक के रूप में पत्रकारिता में कदम रखा। अपने लेखों और संपादकीय दृष्टि के माध्यम से उन्होंने सांस्कृतिक, सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर निरंतर अपनी बात रखी। उनकी रचना 'निलायुदे इतिहासम' केरल के सांस्कृतिक-सामाजिक परिदृश्य के प्रति उनकी गहरी समझ और प्रतिबद्धता का प्रमाण मानी जाती है।

सांस्कृतिक पहलों के सूत्रधार

कृष्णन 'बालगोकुलम' और 'तपस्या कला साहित्य वेदी' के संस्थापक और मुख्य प्रेरक शक्ति थे। इसके अलावा उन्होंने अमृताभारती, बालसंस्कारकेंद्रम, बालसाहिति प्रकाशन, इंटरनेशनल श्रीकृष्ण सेंटर और सौरक्षिका जैसी पहलों का भी नेतृत्व किया।

केरल में बच्चों के बीच 'उन्नीकृष्णन' (छोटे कृष्ण) के किरदार को लोकप्रिय बनाने और पूरे राज्य में 'श्री कृष्ण जयंती शोभायात्रा' को स्थापित करने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

राजनीतिक और सामाजिक शोक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्रीय आंदोलनों और केरल के सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। चंद्रशेखर ने कहा कि संगठनात्मक, साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए कृष्णन का प्रभाव बेजोड़ था और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

विरासत और आगे की राह

लगभग सात दशकों तक केरल की सांस्कृतिक और वैचारिक धारा को आकार देने वाले कृष्णन का निधन संघ परिवार के लिए एक युग के अंत जैसा है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सांस्कृतिक और वैचारिक विमर्श पहले से कहीं अधिक सक्रिय है। उनके द्वारा स्थापित संगठनों और पहलों की निरंतरता ही उनकी सबसे बड़ी विरासत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल में संघ विचार को जमीनी स्तर पर सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में स्थापित करने की एक पूरी पीढ़ी की विदाई है। जिस दौर में केरल वैचारिक रूप से वाम-प्रभुत्व में था, उस समय 'बालगोकुलम' और 'तपस्या' जैसी पहलों के जरिए बच्चों और युवाओं तक पहुँचना एक दीर्घकालिक सांस्कृतिक रणनीति थी — जिसके परिणाम आज केरल की बदलती राजनीतिक जमीन में दिखते हैं। मुख्यधारा की श्रद्धांजलियाँ प्रायः उनके संगठनात्मक कद पर रुक जाती हैं, लेकिन असली विरासत यह है कि उन्होंने विचारधारा को उत्सव और बाल-संस्कृति के माध्यम से समाज में उतारा — यह कौशल दुर्लभ है और इसका मूल्यांकन अभी बाकी है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमए कृष्णन का निधन कब और कहाँ हुआ?
उनका निधन 29 सितंबर को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में 97 वर्ष की आयु में हुआ।
'बालगोकुलम' से एमए कृष्णन का क्या संबंध था?
एमए कृष्णन 'बालगोकुलम' के संस्थापक और मुख्य प्रेरक शक्ति थे। यह बच्चों की सांस्कृतिक गतिविधियों पर केंद्रित एक संगठन है जिसे उन्होंने केरल के विभिन्न हिस्सों में स्थापित करने में मदद की।
राजीव चंद्रशेखर ने एमए कृष्णन के निधन पर क्या कहा?
BJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने उनके निधन को राष्ट्रीय आंदोलनों और केरल के सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि कृष्णन का प्रभाव संगठनात्मक, साहित्यिक और सांस्कृतिक — तीनों स्तरों पर बेजोड़ था।
एमए कृष्णन ने 'केसरी' के अलावा और किन पहलों का नेतृत्व किया?
उन्होंने 'तपस्या कला साहित्य वेदी', अमृताभारती, बालसंस्कारकेंद्रम, बालसाहिति प्रकाशन, इंटरनेशनल श्रीकृष्ण सेंटर और सौरक्षिका जैसी पहलों का नेतृत्व किया। केरल में 'श्री कृष्ण जयंती शोभायात्रा' को लोकप्रिय बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राष्ट्र प्रेस
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