सायोनी घोष का बयान: '2021 में माफी माँग चुकी हूँ', भाजपा पर जान से मारने की धमकी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सायोनी घोष ने 20 मई 2026 को कोलकाता में स्पष्ट किया कि साल 2015 की एक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर वह 2021 में ही सार्वजनिक रूप से माफी माँग चुकी हैं और उनका किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पुराने विवाद का इस्तेमाल अब उन्हें राजनीतिक रूप से दबाने के लिए किया जा रहा है।
सायोनी घोष का पक्ष
घोष ने दावा किया कि विवादित पोस्ट उन्होंने स्वयं नहीं किया था — उनके अनुसार उस समय उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा से यही कहती आई हूँ कि वह पोस्ट मैंने नहीं किया था। 2021 में जब यह मामला दोबारा सामने आया, तब मैंने सार्वजनिक रूप से माफी भी माँगी थी। कोई भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहता। मैं खुद एक हिंदू हूँ।'
घोष ने यह भी बताया कि 2015 में वह मात्र 22 वर्ष की थीं और उस समय 'एक्स' (तत्कालीन ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म उनके लिए नए थे। उनका कहना है कि न तो उन्होंने वह कार्टून बनाया और न ही उसे पोस्ट किया।
जाँच की माँग और पोस्ट हटाने की बात
घोष ने कहा, 'अगर किसी की जाँच होनी चाहिए तो उस व्यक्ति की होनी चाहिए जिसने वह कार्टून बनाया। जब 2021 में यह मामला मेरे संज्ञान में आया, तब मैंने तुरंत वह पोस्ट हटवा दिया और सार्वजनिक रूप से माफी भी माँगी।' उनके खिलाफ उस दौरान पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं।
भाजपा पर जान से मारने की धमकी का आरोप
घोष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोग खुलेआम कह रहे हैं कि जो सायोनी घोष का सिर काटेगा, उसे ₹1 करोड़ का इनाम दिया जाएगा। भाजपा नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से ऐसी बातें कर रहे हैं। दूसरी तरफ वही लोग महिला आरक्षण और महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं। क्या ये दोनों बातें साथ चल सकती हैं? बिल्कुल नहीं।'
घोष का आरोप है कि वह संसद के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, 'भाजपा को विरोध की आवाज पसंद नहीं है — उन्हें लोकतंत्र में विपक्ष का अस्तित्व पसंद नहीं है।'
बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का हवाला
घोष ने कहा कि भाजपा महिलाओं की आवाज उठाने को पसंद नहीं करती, जबकि बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से महिलाओं को मजबूत और मुखर रहने की रही है। यह विवाद ऐसे समय में फिर उभरा है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा और TMC के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।
आगे क्या
घोष ने संकेत दिया कि वह धमकियों के मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी सांसद ने सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं पर इस प्रकार के आरोप लगाए हों — यह मामला संसदीय सुरक्षा और महिला जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ला सकता है।