सबरीमाला गोल्ड स्कैम के आरोपी मुरारी बाबू का कोच्चि में निधन, कैंसर से चल रहा था इलाज
सारांश
मुख्य बातें
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और सबरीमाला गोल्ड स्कैम में दूसरे आरोपी मुरारी बाबू का शनिवार, 13 जून को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे और अमृता अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन से सबरीमाला सोना घोटाले की जांच एक अहम मोड़ पर आ गई है, जो अभी भी जारी है।
मामले की पृष्ठभूमि
सबरीमाला मंदिर के दरवाज़ों के फ्रेम और 'द्वारपालक' की मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले पैनल कथित तौर पर चोरी होने के आरोप में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मुरारी बाबू की जांच कर रही थी। आरोप था कि सबरीमाला से हटाए गए इन सोने की परत वाले पैनलों का कथित तौर पर गबन किया गया। मुरारी बाबू ने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि सोने के पैनलों को तांबे के पैनल के रूप में दर्ज करने का काम मंदिर के पुजारी के एक पत्र के आधार पर किया गया था।
मुरारी बाबू का करियर और विवाद
चंगनासेरी के पेरुन्ना निवासी मुरारी बाबू 1994 में पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर भर्ती हुए थे, लेकिन प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी। 1997 में वे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) में शामिल हुए और एट्टुमानूर, वाइकोम तथा थिरुनक्कारा जैसे प्रमुख मंदिरों में सेवाएं दीं।
विजिलेंस विंग के अनुसार, TDB में अपेक्षाकृत निचले पद पर रहते हुए भी मुरारी बाबू ने अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की। जांचकर्ताओं ने चंगनसेरी में उनकी पैतृक संपत्ति पर बने एक आलीशान मकान के निर्माण की भी जांच की थी।
अन्य आरोप और न्यायालय का आदेश
विजिलेंस ने प्रमुख मंदिर उत्सवों के दौरान हाथियों के ठेके में कथित अनियमितताओं और मंदिर परिसर से सोने-चांदी की वस्तुएं गायब होने के मामलों की भी जांच की थी। उन पर एट्टुमानूर मंदिर में आग लगने की घटना को संभालने और बिना मंजूरी के सोने की परत चढ़े आभूषण लगवाने के आरोप भी थे।
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारियों को सबरीमाला जैसी संवेदनशील जगहों पर तैनात न किया जाए, फिर भी बाद में मुरारी बाबू को वहाँ प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया था। विजिलेंस के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर देवस्वोम बोर्ड को सूचित किए बिना एक निजी कंपनी से द्वारपालक मूर्तियों पर सोना चढ़ाने के काम के संबंध में बातचीत की थी।
अंतिम संस्कार और जांच की स्थिति
मुरारी बाबू का अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर 3 बजे पेरुन्ना स्थित उनके आवास पर किया गया। उनके निधन के बावजूद, सबरीमाला में सोने से जुड़े मामलों की जांच और कानूनी कार्यवाही अभी भी जारी है। SIT यह स्पष्ट करने में जुटी है कि इस मामले में और कौन-कौन से व्यक्ति या संस्थाएं संलिप्त थीं।