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सबरीमाला गोल्ड स्कैम के आरोपी मुरारी बाबू का कोच्चि में निधन, कैंसर से चल रहा था इलाज

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सबरीमाला गोल्ड स्कैम के आरोपी मुरारी बाबू का कोच्चि में निधन, कैंसर से चल रहा था इलाज

सारांश

सबरीमाला गोल्ड स्कैम के दूसरे आरोपी और TDB के पूर्व अधिकारी मुरारी बाबू का 13 जून को कोच्चि में कैंसर से निधन हो गया। उनकी मौत ऐसे वक्त हुई जब SIT की जांच और कानूनी कार्यवाही अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

मुरारी बाबू , सबरीमाला गोल्ड स्कैम के दूसरे आरोपी, का 13 जून को कोच्चि के अमृता अस्पताल में कैंसर से निधन हुआ।
वे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी थे और आरोपी बनाए जाने के बाद नौकरी से निलंबित कर दिए गए थे।
SIT सबरीमाला मंदिर के दरवाज़ों और 'द्वारपालक' मूर्तियों से सोने की परत वाले पैनलों के कथित गबन की जांच कर रही थी।
विजिलेंस विंग के अनुसार, मुरारी बाबू ने कथित तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान करोड़ों की संपत्ति अर्जित की थी।
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें सबरीमाला में प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया था।
उनके निधन के बाद भी सबरीमाला सोना घोटाले की जांच और कानूनी कार्यवाही जारी है।

त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और सबरीमाला गोल्ड स्कैम में दूसरे आरोपी मुरारी बाबू का शनिवार, 13 जून को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे और अमृता अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन से सबरीमाला सोना घोटाले की जांच एक अहम मोड़ पर आ गई है, जो अभी भी जारी है।

मामले की पृष्ठभूमि

सबरीमाला मंदिर के दरवाज़ों के फ्रेम और 'द्वारपालक' की मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले पैनल कथित तौर पर चोरी होने के आरोप में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मुरारी बाबू की जांच कर रही थी। आरोप था कि सबरीमाला से हटाए गए इन सोने की परत वाले पैनलों का कथित तौर पर गबन किया गया। मुरारी बाबू ने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि सोने के पैनलों को तांबे के पैनल के रूप में दर्ज करने का काम मंदिर के पुजारी के एक पत्र के आधार पर किया गया था।

मुरारी बाबू का करियर और विवाद

चंगनासेरी के पेरुन्ना निवासी मुरारी बाबू 1994 में पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर भर्ती हुए थे, लेकिन प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी। 1997 में वे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) में शामिल हुए और एट्टुमानूर, वाइकोम तथा थिरुनक्कारा जैसे प्रमुख मंदिरों में सेवाएं दीं।

विजिलेंस विंग के अनुसार, TDB में अपेक्षाकृत निचले पद पर रहते हुए भी मुरारी बाबू ने अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की। जांचकर्ताओं ने चंगनसेरी में उनकी पैतृक संपत्ति पर बने एक आलीशान मकान के निर्माण की भी जांच की थी।

अन्य आरोप और न्यायालय का आदेश

विजिलेंस ने प्रमुख मंदिर उत्सवों के दौरान हाथियों के ठेके में कथित अनियमितताओं और मंदिर परिसर से सोने-चांदी की वस्तुएं गायब होने के मामलों की भी जांच की थी। उन पर एट्टुमानूर मंदिर में आग लगने की घटना को संभालने और बिना मंजूरी के सोने की परत चढ़े आभूषण लगवाने के आरोप भी थे।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारियों को सबरीमाला जैसी संवेदनशील जगहों पर तैनात न किया जाए, फिर भी बाद में मुरारी बाबू को वहाँ प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया था। विजिलेंस के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर देवस्वोम बोर्ड को सूचित किए बिना एक निजी कंपनी से द्वारपालक मूर्तियों पर सोना चढ़ाने के काम के संबंध में बातचीत की थी।

अंतिम संस्कार और जांच की स्थिति

मुरारी बाबू का अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर 3 बजे पेरुन्ना स्थित उनके आवास पर किया गया। उनके निधन के बावजूद, सबरीमाला में सोने से जुड़े मामलों की जांच और कानूनी कार्यवाही अभी भी जारी है। SIT यह स्पष्ट करने में जुटी है कि इस मामले में और कौन-कौन से व्यक्ति या संस्थाएं संलिप्त थीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

SIT को अब साक्ष्य-श्रृंखला को और अधिक सावधानी से जोड़ना होगा। यह मामला केवल एक व्यक्ति की कथित संलिप्तता का नहीं है; उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुरारी बाबू को सबरीमाला में तैनात किया जाना TDB की आंतरिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। यह घटना दर्शाती है कि धार्मिक संस्थाओं में प्रशासनिक नियुक्तियों की निगरानी के लिए मौजूदा तंत्र कितना कमज़ोर है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुरारी बाबू कौन थे और सबरीमाला गोल्ड स्कैम से उनका क्या संबंध था?
मुरारी बाबू त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी थे और सबरीमाला गोल्ड स्कैम में दूसरे आरोपी थे। उन पर सबरीमाला मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों और दरवाज़ों से सोने की परत वाले पैनलों के कथित गबन में संलिप्तता का आरोप था।
मुरारी बाबू का निधन कैसे हुआ?
मुरारी बाबू कैंसर से पीड़ित थे और कोच्चि के अमृता अस्पताल में उपचाराधीन थे। 13 जून को उनका वहीं निधन हो गया।
सबरीमाला गोल्ड स्कैम क्या है?
यह मामला सबरीमाला मंदिर के दरवाज़ों के फ्रेम और 'द्वारपालक' मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले पैनलों की कथित चोरी और गबन से जुड़ा है। SIT इस मामले की जांच कर रही है कि ये पैनल कहाँ गए और किसकी संलिप्तता थी।
मुरारी बाबू के निधन के बाद जांच का क्या होगा?
उनके निधन के बावजूद SIT की जांच और कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। एक प्रमुख आरोपी के न रहने से जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है, लेकिन मामला बंद नहीं होगा।
उच्च न्यायालय का आदेश होने के बावजूद मुरारी बाबू को सबरीमाला में क्यों नियुक्त किया गया था?
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारियों को सबरीमाला जैसी संवेदनशील जगहों पर तैनात न किया जाए। इसके बावजूद मुरारी बाबू को वहाँ प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया, जो TDB की आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
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