साध्वी ऋतंभरा का सोनिया गांधी पर हमला: 'वंदे मातरम' विवाद पर बोलीं — 'दिल कभी देश के लिए नहीं धड़का'
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा में पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने सोमवार, 18 अगस्त 2025 को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीखा प्रहार किया। यह विवाद स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम' गायन के दौरान सामने आए एक वीडियो से उपजा है, जिसमें कथित तौर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को राष्ट्रगीत के समय आपस में बातें करते देखा गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में कथित तौर पर सोनिया गांधी समेत कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेता 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान आपस में बातचीत करते नज़र आए। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
साध्वी ऋतंभरा के तीखे बोल
साध्वी ऋतंभरा ने इस घटना पर कहा, 'सोनिया गांधी ने बहुत बड़ा अपमान किया है। जब 'वंदे मातरम' गाया जा रहा था, तो उनके हाव-भाव से साफ पता चल रहा था कि वह कितनी असहज और नाराज थीं।' उन्होंने आगे कहा कि ये वे लोग हैं जो देश की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर सकते और उनके दिल कभी भी देश के लिए सच्चे मन से नहीं धड़के।
साध्वी ने यह भी कहा, 'पूरे देश और दुनिया ने यह दृश्य देखा है। उन्हें ऐसी बेचैनी तब दिखानी चाहिए थी जब उनका सामना किसी आतंकवादी से हो रहा हो।' उन्होंने 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों की विरासत बताते हुए इसे अक्षम्य अपराध करार दिया।
जंतर-मंतर विरोध पर टिप्पणी
साध्वी ऋतंभरा ने जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, 'वहाँ जिस तरह का माहौल था, वह भारत की धरती पर शोभा नहीं देता। ऐसे लोगों को भारत का नेतृत्व करने का सपना भी नहीं देखना चाहिए।'
लोकतंत्र और अराजकता पर विचार
साध्वी ने स्पष्ट किया कि मुद्दों पर विरोध करना लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन इसकी एक सीमा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर देश एक विशाल बरगद के पेड़ जैसा है और उसमें दीमक लग गई है, तो माँग दीमक का इलाज करने की होनी चाहिए — पूरे पेड़ को गिराने की नहीं।' उन्होंने 'दिमागी नक्सल' तत्वों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में किसी भी कीमत पर अराजकता नहीं होने दी जाएगी।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत में राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। 'वंदे मातरम' को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के वीडियो को संदर्भ से बाहर करके देखा जाता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रगीत के प्रति आदर हर परिस्थिति में अनिवार्य है। कांग्रेस की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।