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इंडिया ब्लॉक बैठक में मुस्लिम मुद्दे नदारद: मौलाना शहाबुद्दीन का विपक्ष पर तीखा हमला

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इंडिया ब्लॉक बैठक में मुस्लिम मुद्दे नदारद: मौलाना शहाबुद्दीन का विपक्ष पर तीखा हमला

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने बरेली से इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा — UCC, मदरसे और धार्मिक स्थलों के विवाद एजेंडे से बाहर रहे। साथ ही सपा से राज्यसभा में मुस्लिम उम्मीदवार न होने और लोहिया ट्रस्ट की जाँच की माँग भी उठाई।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन ने 1 अक्टूबर 2026 को बरेली से इंडिया ब्लॉक की बैठक में मुस्लिम मुद्दों की अनदेखी पर विपक्षी दलों की आलोचना की।
उन्होंने UCC , मदरसा फैसलों और धार्मिक स्थल विवादों पर बैठक में चर्चा न होने को लेकर नाराज़गी जताई।
अखिलेश यादव से सवाल किया कि अबू आसिम आजमी , सलीम इकबाल शेरवानी और आजम खान परिवार जैसे मुस्लिम नेताओं की जगह धनराज नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार क्यों बनाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नशामुक्ति अभियान का समर्थन किया और इसे पूरे देश तक विस्तार देने की माँग की।
PM मोदी से लोहिया ट्रस्ट और सपा से जुड़े खातों की वित्तीय जाँच कराने की माँग की।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने 1 अक्टूबर 2026 को बरेली से इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठक पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के करोड़ों मुसलमानों के सामाजिक और धार्मिक मुद्दे इस गठबंधन की चर्चा से पूरी तरह बाहर रहे। उनके अनुसार, बैठक में नेताओं ने मुख्यतः अपने राजनीतिक हितों और चुनावी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया, न कि समुदाय की वास्तविक चिंताओं पर।

इंडिया ब्लॉक बैठक पर आरोप

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी-अपनी बात रखी, परंतु मुसलमानों से सीधे जुड़े विषयों को कोई स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC), मदरसों पर हुए न्यायिक और प्रशासनिक फैसलों तथा विभिन्न स्थानों पर धार्मिक स्थलों को लेकर उठे विवादों का विशेष उल्लेख किया।

मौलाना ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को मुसलमानों का मत तो चाहिए, लेकिन उनकी समस्याओं और चिंताओं पर विमर्श में रुचि नहीं दिखाई जाती। उन्होंने कहा, 'केवल चुनाव के समय समर्थन माँगना पर्याप्त नहीं है — मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंचों पर भी उठाना होगा।'

सपा और राज्यसभा उम्मीदवारी पर सवाल

उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी सवाल खड़े किए। उनका दावा है कि सपा ने प्रोफेसर राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। मौलाना ने पूछा कि जब पार्टी में अबू आसिम आजमी, सलीम इकबाल शेरवानी और आजम खान के परिवार जैसे मुस्लिम नेतृत्व के नाम मौजूद हैं, तो इनमें से किसी को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा गया।

उन्होंने धनराज नथवानी के नाम को लेकर कथित गुजरात लॉबी से जुड़ाव और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से कथित संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि अखिलेश यादव को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

नशामुक्ति पर अमित शाह के बयान का समर्थन

गौरतलब है कि मौलाना शहाबुद्दीन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब को नशामुक्त करने संबंधी बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नशा न केवल युवाओं, बल्कि पूरे परिवार की पढ़ाई, स्वास्थ्य और प्रगति को प्रभावित करता है। उनके अनुसार यह अभियान केवल पंजाब तक सीमित न रहकर पूरे देश में चलाया जाना चाहिए। मौलाना ने इस्लाम में नशे को प्रतिबंधित बताते हुए मुस्लिम समाज से भी नशे से दूर रहने की अपील की।

लोहिया ट्रस्ट और सपा खातों की जाँच की माँग

मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोहिया ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव सहित सपा परिवार से जुड़े लोगों के वित्तीय खातों की जाँच कराने की माँग भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता है तो वह जाँच के ज़रिए सामने आनी चाहिए।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक के भीतर विभिन्न घटक दलों के बीच समन्वय और एजेंडा-निर्धारण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मौलाना शहाबुद्दीन की यह प्रतिक्रिया मुस्लिम समुदाय के उस व्यापक असंतोष को रेखांकित करती है जो राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीतिगत समर्थन के बीच की खाई को लेकर समय-समय पर सामने आता है। आने वाले दिनों में इंडिया ब्लॉक और सपा की ओर से इन सवालों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि UCC और मदरसा विवाद जैसे मुद्दे समुदाय में गहरी बेचैनी पैदा कर रहे हैं। दूसरी ओर, सपा पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर उठाए सवाल भी दर्शाते हैं कि पारंपरिक 'मुस्लिम-यादव' समीकरण की परीक्षा हो रही है। अमित शाह के बयान के समर्थन जैसे असामान्य कदम से यह भी स्पष्ट है कि मुस्लिम नेतृत्व का एक वर्ग अब सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों पक्षों से समान दूरी बनाते हुए दबाव की नई राजनीति आज़माने लगा है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन ने इंडिया ब्लॉक पर क्या आरोप लगाए?
मौलाना शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में UCC, मदरसा फैसलों और धार्मिक स्थल विवादों जैसे मुस्लिम मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनका कहना है कि नेताओं ने मुख्यतः अपने राजनीतिक हितों और चुनावी एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया।
मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी पर क्या सवाल उठाए?
उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि सपा ने उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाया, जबकि अबू आसिम आजमी, सलीम इकबाल शेरवानी और आजम खान परिवार जैसे मुस्लिम नेता पार्टी में मौजूद हैं। उन्होंने नथवानी के कथित गुजरात लॉबी और BJP से कनेक्शन पर भी स्पष्टीकरण माँगा।
मौलाना शहाबुद्दीन ने लोहिया ट्रस्ट की जाँच की माँग क्यों की?
मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोहिया ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी और सपा परिवार से जुड़े लोगों के वित्तीय खातों की जाँच कराने की माँग की। उनका कहना है कि यदि कोई वित्तीय अनियमितता है तो वह जाँच के ज़रिए सामने आनी चाहिए।
नशामुक्ति पर मौलाना का क्या रुख है?
मौलाना शहाबुद्दीन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब नशामुक्ति बयान का समर्थन किया और कहा कि यह अभियान पूरे देश में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने इस्लाम में नशे को प्रतिबंधित बताते हुए मुस्लिम समाज से भी नशे से दूर रहने की अपील की।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है और मौलाना शहाबुद्दीन कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक धार्मिक-सामाजिक संगठन है जो मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए आवाज़ उठाता है। मौलाना शहाबुद्दीन इस संगठन के अध्यक्ष हैं और बरेली से सक्रिय रहते हैं; वे समय-समय पर राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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