21 सितंबर 2026
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मौलाना शहाबुद्दीन की माँग: सपा 2027 में मुस्लिम CM चेहरा घोषित करे, हामिद अंसारी के बयान से असहमति

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मौलाना शहाबुद्दीन की माँग: सपा 2027 में मुस्लिम CM चेहरा घोषित करे, हामिद अंसारी के बयान से असहमति

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने सपा के पीडीए फॉर्मूले में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव से 2027 में मुस्लिम CM चेहरे की घोषणा की माँग की। साथ ही उन्होंने हामिद अंसारी के बयान से असहमति जताई और धर्म को आतंकवाद से अलग रखने की अपील की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन ने अखिलेश यादव से 2027 के UP विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की माँग की।
उन्होंने सपा के पीडीए फॉर्मूले में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की अस्पष्टता पर सवाल उठाए।
मौलाना ने दावा किया कि करीब दो महीने पहले लिखे पत्र का अखिलेश यादव की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान से असहमति जताई और कहा कि किसी धर्म को आतंकवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
मुस्लिम आबादी को करीब 22 प्रतिशत बताते हुए उन्होंने आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग की।
2027 में मुस्लिम मतदाता उम्मीदवारों और नेतृत्व में अपनी हिस्सेदारी देखकर वोट देंगे — मौलाना का दावा।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने 21 सितंबर 2026 को बरेली में समाजवादी पार्टी (सपा) से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की खुली माँग की। साथ ही उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हालिया बयान से असहमति जताते हुए कहा कि किसी भी धर्म को आतंकवाद या कट्टरपंथ से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

पीडीए फॉर्मूले पर सवाल

सपा सांसद इकरा हसन द्वारा पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को पार्टी की ताकत बताए जाने के बाद मौलाना शहाबुद्दीन ने इस फॉर्मूले में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की नज़र में पीडीए में 'मुस्लिम' शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। उनका तर्क था कि यदि मुस्लिम समुदाय को अलग पहचान के साथ इसमें शामिल किया जाता, तो इसका नाम 'पीडीएम' क्यों नहीं रखा गया।

मौलाना ने यह भी कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच पीडीए की व्याख्या अलग-अलग तरीके से करते हैं — ओबीसी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम समाज के बीच इस फॉर्मूले का राजनीतिक अर्थ बदलता रहता है। उनके अनुसार प्रदेश में अभी तक पीडीए को लेकर स्पष्टता नहीं बन पाई है।

अखिलेश यादव से जवाब की माँग

मौलाना शहाबुद्दीन ने खुलासा किया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले अखिलेश यादव को पत्र लिखकर 2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम चेहरे की घोषणा करने की माँग की थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों पर वक्फ संपत्तियों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जाँच को लेकर उठाए गए सवालों का भी जवाब नहीं मिला।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाने से पहले उनके द्वारा रखे गए सवालों का जवाब देना चाहिए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सपा 2027 के चुनाव के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रही है।

हामिद अंसारी के बयान पर असहमति

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हालिया बयान पर मौलाना ने कहा कि वह अंसारी को देश की बड़ी और विद्वान शख्सियत मानते हैं जिन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की है, लेकिन वह उनके बयान के पूरे हिस्से से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार किसी एक धर्म को कट्टरपंथ या आतंकवाद से जोड़कर बात करना उचित नहीं है।

मौलाना ने स्पष्ट किया कि हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन या कोई भी धर्म अपने आप में आतंकवादी या साम्प्रदायिक नहीं होता। उनका कहना था कि समाज में कुछ व्यक्ति हिंसा और कट्टरता फैलाने का प्रयास कर सकते हैं, परंतु उनके कृत्य को पूरे धर्म या समुदाय से जोड़ना न्यायसंगत नहीं है।

मुस्लिम प्रतिनिधित्व और 2027 की रणनीति

मौलाना शहाबुद्दीन ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 22 प्रतिशत और यादव आबादी करीब 7 प्रतिशत है, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में इन अनुपातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम उम्मीदवारों को पर्याप्त टिकट देने की माँग भी दोहराई।

उन्होंने कहा कि 2027 में मुस्लिम मतदाता केवल राजनीतिक नारों के आधार पर फैसला नहीं करेंगे, बल्कि उम्मीदवारों, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में अपनी हिस्सेदारी को भी परखेंगे। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब विपक्षी दल 2027 के चुनाव के लिए गठबंधन और सीट-बँटवारे की बातचीत में जुटे हैं।

सामाजिक एकता का आह्वान

मौलाना ने कट्टरपंथ की समस्या को सामाजिक बताते हुए कहा कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को मिलकर ऐसी विचारधाराओं का मुकाबला करना होगा, क्योंकि इससे पूरे समाज और देश को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि राजनीतिक या धार्मिक पहचान से परे, कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई ज़रूरी है।

आने वाले महीनों में सपा की प्रतिक्रिया और मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक रुख पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी, क्योंकि 2027 का चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, प्रतिनिधित्व का यह सवाल और भी तीखा होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब यही लचीलापन बोझ बनता दिख रहा है। असली सवाल यह है कि क्या सपा मुस्लिम CM चेहरे की माँग को स्वीकार करने की स्थिति में है, जबकि ऐसा करने पर ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं की नाराज़गी का खतरा है। दूसरी ओर, हामिद अंसारी के बयान पर असहमति जताकर मौलाना ने एक संतुलित सांप्रदायिक रेखा खींची है जो उन्हें किसी एक पाले का न दिखाकर व्यापक स्वीकार्यता देती है। 2027 से पहले यह बहस तय करेगी कि मुस्लिम वोट एकजुट रहेगा या बिखरेगा।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन ने सपा से क्या माँग की है?
मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी से माँग की है कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करे। साथ ही उन्होंने मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में पर्याप्त मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की भी माँग रखी है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने हामिद अंसारी के बयान पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वह पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान के पूरे हिस्से से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार किसी भी धर्म को आतंकवाद या कट्टरपंथ से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए और इस समस्या का मुकाबला सभी समुदायों को मिलकर करना चाहिए।
सपा के पीडीए फॉर्मूले में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर क्या विवाद है?
मौलाना शहाबुद्दीन का कहना है कि पीडीए में 'मुस्लिम' शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता और अखिलेश यादव अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच इस फॉर्मूले की व्याख्या अलग-अलग तरीके से करते हैं। उनके अनुसार इससे मुस्लिम समाज में यह धारणा बन रही है कि उन्हें आबादी के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल रही।
मौलाना ने अखिलेश यादव को पत्र कब लिखा और उसका क्या जवाब आया?
मौलाना शहाबुद्दीन के अनुसार उन्होंने करीब दो महीने पहले अखिलेश यादव को पत्र लिखकर 2027 के चुनाव में मुस्लिम CM चेहरे की घोषणा की माँग की थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने वक्फ संपत्तियों से जुड़े कथित अनियमितताओं की जाँच पर भी सवाल उठाए थे, जिनका भी जवाब नहीं आया।
2027 के UP चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका क्या होगी?
मौलाना शहाबुद्दीन के अनुसार उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 22 प्रतिशत है और 2027 में मुस्लिम मतदाता केवल राजनीतिक नारों पर नहीं, बल्कि उम्मीदवारों, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में अपनी हिस्सेदारी देखकर वोट देंगे। यह संकेत है कि कौन-सी पार्टी कितना प्रतिनिधित्व देती है, यह निर्णायक कारक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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