इंडिया ब्लॉक बैठक में मुस्लिम मुद्दे नदारद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का विपक्षी गठबंधन पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 30 सितंबर को बरेली से विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में एसआईआर (Special Intensive Revision) और चुनाव आयोग को लेकर तो विस्तृत चर्चा हुई, किंतु मुस्लिम समुदाय से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को एजेंडे में कोई स्थान नहीं मिला।
बैठक में क्या हुआ और क्या नहीं
रजवी के अनुसार, बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी सहित विपक्षी नेताओं ने एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरने की रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत गठबंधन के किसी भी नेता ने मुस्लिम समाज से जुड़े विषयों पर कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं रखा।
कौन-से मुद्दे चर्चा से बाहर रहे
रजवी ने उन विषयों की लंबी सूची गिनाई जो, उनके अनुसार, बैठक में अनदेखे रहे। इनमें समान नागरिक संहिता (UCC) पर जारी बहस, सहारनपुर और उज्जैन की मस्जिदों से जुड़े विवाद, मध्य प्रदेश की भोजशाला विवाद, तथा मस्जिदों और मजारों पर कथित बुलडोजर कार्रवाई शामिल हैं।
इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड में मदरसा एजुकेशन बोर्ड को समाप्त किए जाने, असम में मदरसों को बंद किए जाने और पश्चिम बंगाल में मदरसों की जाँच के आदेश का भी उल्लेख किया। रजवी ने कहा कि ये सभी मुद्दे मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन पर चर्चा होनी चाहिए थी।
विपक्ष पर सत्ता-केंद्रित राजनीति का आरोप
रजवी ने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं की वास्तविक प्राथमिकता मुस्लिम समुदाय की समस्याओं को हल करना नहीं, बल्कि सत्ता में वापसी के लिए चुनावी जोड़-तोड़ करना है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन वाकई विभिन्न समुदायों की आवाज़ उठाने का दावा करता है, तो मुस्लिम समाज के मुद्दों को भी उसी प्राथमिकता से उठाया जाना चाहिए।
मुस्लिम समुदाय में उठते सवाल
रजवी के अनुसार, बैठक में इन विषयों की अनुपस्थिति से मुस्लिम समुदाय के बीच यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि विपक्षी गठबंधन उनकी चिंताओं को कितनी गंभीरता से लेता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में मदरसा नीतियों को लेकर विवाद गहरा रहा है और UCC पर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।
आगे क्या
गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से रजवी के इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों के बीच समन्वय का यह सवाल आगामी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।