22 जुलाई 2026
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जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल हो, जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर न चले: मौलाना रजवी

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जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल हो, जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर न चले: मौलाना रजवी

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने एक साथ तीन विवादित मुद्दों पर मोर्चा खोला — जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा, जौहर यूनिवर्सिटी की सुरक्षा और यूसीसी में सबकी भागीदारी। उनका संदेश स्पष्ट है: सरकार के दावों को उसी की कसौटी पर परखा जाए।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 22 जुलाई को बरेली में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग का समर्थन किया।
उनका तर्क है कि सरकार ने आर्टिकल 370 हटाते समय हालात सामान्य होने पर राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया था।
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानी के नाम की संस्था को नुकसान उचित नहीं।
यूसीसी मसौदे में अनुसूचित जनजातियों को छूट देने पर सवाल उठाया — कहा, तब यह 'समान' संहिता कैसे?
आरोप लगाया कि यूसीसी मसौदा बनाने से पहले धार्मिक और सामाजिक समुदायों से व्यापक परामर्श नहीं किया गया।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 22 जुलाई को बरेली में तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग, रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई का विरोध, और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर गहरी आपत्तियाँ। उनका कहना है कि जब सरकार स्वयं जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने का दावा कर रही है, तो राज्य का दर्जा बहाल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

जम्मू-कश्मीर: राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग

मौलाना रजवी ने कहा कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है, विकास कार्यों में तेज़ी आई है और हालात पहले की तुलना में सामान्य हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया था, तब यह आश्वासन भी दिया गया था कि परिस्थितियाँ सामान्य होने पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। मौलाना रजवी ने कहा कि वे स्वयं इस माँग का समर्थन करते हैं और राजनीतिक दल भी लंबे समय से यही माँग उठाते रहे हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर मौलाना रजवी ने कहा कि यह संस्था स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत का पक्ष प्रभावशाली ढंग से रखा था। उन्होंने यह भी बताया कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर के निधन के बाद उन्हें फिलिस्तीन के बैतुल मुकद्दस (यरुशलम) स्थित मस्जिद अल-अक्सा परिसर में दफनाया गया।

मौलाना रजवी ने तर्क दिया कि यदि विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर आजम खान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो रही है, तो उसकी सजा शिक्षा संस्थान को नहीं मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित संस्था को नुकसान पहुँचाना उचित नहीं होगा।

यूसीसी मसौदे पर गंभीर सवाल

समान नागरिक संहिता के मसौदे पर मौलाना रजवी ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा में पारित मसौदे पर कई गंभीर प्रश्न हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही समिति की अध्यक्ष द्वारा उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे अलग-अलग राज्यों के लिए यूसीसी का मसौदा तैयार करना कितना उचित है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, तो इसे 'समान' नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है।

परामर्श प्रक्रिया पर आपत्ति

मौलाना रजवी ने आरोप लगाया कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने से पहले विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों से व्यापक स्तर पर राय-मशविरा नहीं किया गया। उनके अनुसार, केवल समान विचारधारा वाले लोगों से सलाह लेकर कानून बनाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि देश का मुस्लिम समाज कानून और संविधान का सम्मान करता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के विपरीत किसी कानून को स्वीकार करना उनके लिए कठिन होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर सभी समुदायों से संवाद स्थापित किया जाए ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष की स्थिति न बने।

आगे क्या

मौलाना रजवी के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी उठती रही है और यूसीसी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है। जौहर यूनिवर्सिटी मामले में अदालती और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है, जिसका अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे खारिज करना कठिन बनाता है। जौहर यूनिवर्सिटी मामले में वे व्यक्तिगत जवाबदेही और संस्थागत दंड के बीच की रेखा खींचते हैं — यह कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से विचारणीय प्रश्न है। यूसीसी पर अनुसूचित जनजातियों की छूट वाला सवाल सबसे तीखा है, क्योंकि यह मसौदे की आंतरिक असंगति को उजागर करता है जिस पर मुख्यधारा की बहस अक्सर चूक जाती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे पर क्या कहा?
मौलाना रजवी ने कहा कि आर्टिकल 370 हटाते समय सरकार ने हालात सामान्य होने पर राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। अब जब सरकार स्वयं हालात सामान्य बता रही है, तो राज्य का दर्जा बहाल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध क्यों किया गया?
मौलाना रजवी का कहना है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित शिक्षा संस्था है। यदि आजम खान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो रही है, तो उसकी सजा विश्वविद्यालय को नहीं मिलनी चाहिए।
यूसीसी मसौदे पर मौलाना रजवी की मुख्य आपत्तियाँ क्या हैं?
उन्होंने दो प्रमुख सवाल उठाए — पहला, अनुसूचित जनजातियों को छूट देने के बाद इसे 'समान' संहिता कैसे कहा जा सकता है; दूसरा, मसौदा तैयार करने से पहले सभी धार्मिक और सामाजिक समुदायों से व्यापक परामर्श नहीं किया गया।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर कौन थे?
मौलाना मोहम्मद अली जौहर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने लंदन के गोलमेज सम्मेलन में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत का पक्ष रखा और उनके निधन के बाद उन्हें यरुशलम स्थित मस्जिद अल-अक्सा परिसर में दफनाया गया।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम धार्मिक-सामाजिक संगठन है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी हैं। यह संगठन मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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