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नीट-यूजी 2025: बिहार के सहरसा में तीन भाई-बहनों ने एकसाथ पास की परीक्षा, झारखंड के ज्ञानेंद्र ने 676 अंकों से किया टॉप

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नीट-यूजी 2025: बिहार के सहरसा में तीन भाई-बहनों ने एकसाथ पास की परीक्षा, झारखंड के ज्ञानेंद्र ने 676 अंकों से किया टॉप

सारांश

बिहार के एक किराना दुकानदार के तीन बच्चों ने कोटा छोड़ सहरसा में रहकर नीट-यूजी पास किया — यह सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या महँगी कोचिंग के बिना भी मेडिकल प्रवेश संभव है। झारखंड के ज्ञानेंद्र गर्व के 676 अंक इस बात की मिसाल हैं।

मुख्य बातें

बिहार के सहरसा जिले के तुलसियाही गाँव के तीन सगे भाई-बहनों — रजनीश कुमार (22) , साक्षी कुमारी (21) और प्रहलाद कुमार (19) — ने नीट-यूजी 2025 एकसाथ उत्तीर्ण की।
तीनों के पिता रोहित कुमार गाँव में किराना दुकान चलाते हैं; परिवार ने सीमित संसाधनों में बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।
रजनीश और साक्षी को तीसरे प्रयास में, जबकि प्रहलाद को पहले ही प्रयास में सफलता मिली।
झारखंड के ज्ञानेंद्र गर्व ने नीट में 676 अंक हासिल कर राज्य टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया।
मध्य प्रदेश की आराध्या गर्ग ने AIR 110 और पंजाब की भाविका गुप्ता ने AIR 56 हासिल की।

नीट-यूजी 2025 के परिणाम घोषित होने के बाद देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों की प्रेरणादायक सफलता की कहानियाँ सामने आ रही हैं। बिहार के सहरसा जिले के तुलसियाही गाँव में एक साधारण किराना व्यापारी के तीन सगे भाई-बहनों ने एकसाथ नीट-यूजी उत्तीर्ण कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वहीं, झारखंड के गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने 676 अंक हासिल कर राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

तुलसियाही के तीन भाई-बहन: सीमित साधन, असीमित हौसला

सहरसा जिले के तुलसियाही गाँव में रहने वाले रोहित कुमार की छोटी-सी किराना दुकान है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके 22 वर्षीय बेटे रजनीश कुमार, 21 वर्षीय बेटी साक्षी कुमारी और 19 वर्षीय बेटे प्रहलाद कुमार — तीनों ने इस वर्ष राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में सफलता प्राप्त की। तीनों की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल में हुई।

रजनीश और साक्षी ने सीबीएसई बोर्ड से मैट्रिक के बाद बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट किया, जबकि सबसे छोटे प्रहलाद ने मैट्रिक और इंटर दोनों बिहार बोर्ड से उत्तीर्ण किए। रजनीश और साक्षी को तीसरे प्रयास में सफलता मिली, वहीं प्रहलाद ने पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

तीनों बच्चों की माँ पूनम देवी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनके बच्चे मेहनत के दम पर परिवार का नाम रोशन करेंगे। पिता रोहित कुमार ने भी बताया कि सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रोकी।

कोटा नहीं, सहरसा में रहकर की तैयारी

साक्षी कुमारी ने बताया कि उन्होंने कोटा या पटना जैसे बड़े शहरों में जाकर कोचिंग नहीं ली। उन्होंने अपने गृह जिले सहरसा में रहकर स्थानीय कोचिंग और स्वाध्याय के माध्यम से तैयारी की। साक्षी का सपना भविष्य में चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करना है।

सबसे बड़े भाई रजनीश कुमार ने कहा कि आर्थिक कमजोरी कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने भी सहरसा में रहकर ही तैयारी की और यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। प्रहलाद कुमार ने परीक्षा परिणाम समय पर जारी होने पर संतोष जताते हुए कहा कि पारदर्शिता से छात्रों की चिंता कम हुई है। प्रहलाद भविष्य में ऑर्थोपेडिक सर्जन बनकर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं।

झारखंड टॉपर: गढ़वा के ज्ञानेंद्र गर्व ने हासिल किए 676 अंक

झारखंड के गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने नीट-यूजी में 676 अंक हासिल कर राज्य टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। ज्ञानेंद्र गढ़वा के एसडीएम मयंक भूषण के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रांची के डीएवी श्यामली स्कूल से पूरी की, जहाँ वे हमेशा बेहतर प्रदर्शन करते रहे।

गौरतलब है कि नीट की पिछली परीक्षा रद्द होने के बाद ज्ञानेंद्र कुछ समय के लिए निराश हुए थे, लेकिन परिवार और मित्रों के सहयोग से उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और शानदार परिणाम हासिल किया। ज्ञानेंद्र ने कहा कि उनका लक्ष्य एक अच्छा डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उनके पिता मयंक भूषण ने कहा, 'एक अभिभावक के लिए इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती कि उसका बच्चा अपना लक्ष्य हासिल करे।'

देशभर से और भी शानदार प्रदर्शन

नीट-यूजी 2025 में देश के अन्य हिस्सों से भी उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। मध्य प्रदेश की आराध्या गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक 110 हासिल की। पंजाब की भाविका गुप्ता ने एआईआर 56 प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके अलावा, तेलंगाना के छात्रों ने भी शीर्ष रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और समय पर परिणाम घोषित करने को लेकर छात्रों और अभिभावकों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। इन सफलताओं ने यह भी साबित किया है कि देश के छोटे शहरों और गाँवों में भी असाधारण प्रतिभाएँ मौजूद हैं, जिन्हें बस अवसर और दृढ़ संकल्प की ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि रजनीश और साक्षी को तीन प्रयास लगे — जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए राह आसान नहीं है। नीट की पारदर्शिता को लेकर प्रहलाद की टिप्पणी पिछले वर्ष की परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि में महत्त्वपूर्ण है — यह संकेत है कि प्रक्रिया-सुधार से छात्रों का भरोसा लौट रहा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के सहरसा के तीन भाई-बहनों ने नीट-यूजी 2025 में कैसे सफलता पाई?
सहरसा जिले के तुलसियाही गाँव के रजनीश कुमार, साक्षी कुमारी और प्रहलाद कुमार ने बिना कोटा या पटना की कोचिंग लिए, स्थानीय स्तर पर स्वाध्याय और कोचिंग से तैयारी कर नीट-यूजी 2025 उत्तीर्ण की। रजनीश और साक्षी को तीसरे प्रयास में, जबकि प्रहलाद को पहले ही प्रयास में सफलता मिली।
झारखंड नीट टॉपर ज्ञानेंद्र गर्व ने कितने अंक हासिल किए?
गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने नीट-यूजी 2025 में 676 अंक हासिल कर झारखंड में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वे गढ़वा के एसडीएम मयंक भूषण के पुत्र हैं और उन्होंने रांची के डीएवी श्यामली स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली।
नीट-यूजी 2025 में मध्य प्रदेश और पंजाब के किन छात्रों ने शीर्ष रैंक हासिल की?
मध्य प्रदेश की आराध्या गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक 110 और पंजाब की भाविका गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक 56 हासिल की। तेलंगाना के छात्रों ने भी शीर्ष रैंक हासिल कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
तुलसियाही के तीन भाई-बहनों के भविष्य के क्या सपने हैं?
प्रहलाद कुमार ऑर्थोपेडिक सर्जन बनकर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं, साक्षी कुमारी का सपना चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनना है, और रजनीश कुमार ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सफलता हासिल कर अन्य छात्रों को प्रेरित करने का संदेश दिया है।
पिछली नीट परीक्षा रद्द होने का ज्ञानेंद्र गर्व पर क्या असर पड़ा?
पिछली नीट परीक्षा रद्द होने के बाद ज्ञानेंद्र गर्व कुछ समय के लिए निराश हुए थे। परिवार और मित्रों के सहयोग से उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और इस बार 676 अंकों के साथ राज्य टॉपर बने।
राष्ट्र प्रेस
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