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समावेशी शिक्षा अभियान: 60 हजार स्कूल और 72 लाख शिक्षक प्रशस्त पोर्टल से जुड़े

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समावेशी शिक्षा अभियान: 60 हजार स्कूल और 72 लाख शिक्षक प्रशस्त पोर्टल से जुड़े

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का समावेशी शिक्षा अभियान तेज़ी से फैल रहा है — 60 हजार स्कूल और 72 लाख शिक्षक प्रशस्त पोर्टल से जुड़ चुके हैं। यह सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, NEP 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को ज़मीन पर उतारने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से देशव्यापी समावेशी शिक्षा अभियान शुरू किया है।
अब तक 60 हजार से अधिक स्कूल इस पहल में भाग ले चुके हैं और 72 लाख से अधिक शिक्षक संवेदनशील बनाए जा चुके हैं।
कार्यक्रम 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसकी अवधि 30 मिनट है।
शिक्षकों के अलावा आया, ड्राइवर, क्लर्क और छात्रावास वार्डन जैसे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।
यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप है।
अक्टूबर में और अधिक स्कूलों के जुड़ने की उम्मीद; पिछले तीन महीनों से अभियान जारी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक व्यापक देशव्यापी अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से देशभर के स्कूलों में 30 मिनट के जागरूकता एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब तक 60 हजार से अधिक स्कूल इस पहल में भाग ले चुके हैं और 72 लाख से अधिक शिक्षकों को संवेदनशील बनाया जा चुका है।

अभियान का उद्देश्य और दायरा

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने यह पहल इसलिए शुरू की है ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों को शिक्षक, विशेष शिक्षक और स्कूल के अन्य कर्मचारी बेहतर ढंग से समझ सकें। यह कार्यक्रम 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जो इसे देश के दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचाने में सहायक है।

उल्लेखनीय यह है कि इस अभियान में केवल शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रमुखों, विशेष शिक्षकों के साथ-साथ आया, ड्राइवर, क्लर्क और छात्रावास के वार्डन जैसे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है — यह दर्शाता है कि समावेशन की जिम्मेदारी पूरे विद्यालय परिवार की है।

प्रशस्त पोर्टल की भूमिका

प्रशस्त एक स्कूल-आधारित डिजिटल माध्यम है, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आने वाली संभावित दिव्यांगता की स्थितियों वाले बच्चों की प्रारंभिक पहचान में मदद करता है। इसमें दो-चरणीय जाँच सूची है — पहले चरण में शिक्षक बच्चों में दिखाई देने वाले संकेतों के आधार पर प्रारंभिक जाँच करते हैं, और दूसरे चरण में विशेष शिक्षक संबंधित मामलों की पुष्टि करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय जाँच के लिए भेजने की प्रक्रिया में भी यह पोर्टल मदद करता है।

मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन महीनों से इस पोर्टल के माध्यम से सामान्य शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है।

व्यावहारिक प्रशिक्षण का तरीका

कार्यक्रम को व्यावहारिक उदाहरणों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इनके जरिए स्कूल कर्मचारियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ उचित और सम्मानजनक व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई है। मंत्रालय का जोर इस बात पर है कि कक्षा से लेकर कार्यालय, परिवहन और स्कूल के अन्य सामान्य स्थानों तक बच्चे का हर अनुभव उसके समावेशन को प्रभावित करता है।

नीतिगत ढाँचा और आगे की राह

मंत्रालय के मुताबिक, यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप सभी बच्चों के लिए समान, सुगम और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। अक्टूबर माह के दौरान और अधिक स्कूलों के इस पहल से जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे यह संख्या और बढ़ेगी।

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश में दिव्यांग बच्चों की स्कूली शिक्षा में समावेश को लेकर नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों में व्यापक चर्चा हो रही है। शिक्षा मंत्रालय का यह कदम उस दिशा में एक ठोस और मापनीय प्रयास माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 30 मिनट का ऑनलाइन सत्र दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में कितना कारगर होगा। गैर-शिक्षण कर्मचारियों को शामिल करना एक सराहनीय और अलग सोच है, क्योंकि दिव्यांग बच्चों का अनुभव कक्षा तक सीमित नहीं होता। मगर जब तक स्कूलों में बुनियादी भौतिक सुगम्यता — रैंप, सुलभ शौचालय, ब्रेल सामग्री — नहीं होगी, संवेदनशीलता प्रशिक्षण अधूरा रहेगा। यह पहल NEP 2020 के समावेशी लक्ष्यों को ज़मीन पर उतारने की दिशा में सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी सफलता का मूल्यांकन नामांकन और उपस्थिति के ठोस आँकड़ों से होना चाहिए, न केवल प्रतिभागियों की संख्या से।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिक्षा मंत्रालय का समावेशी शिक्षा अभियान क्या है?
यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक देशव्यापी पहल है, जिसमें प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से स्कूल कर्मचारियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है। अब तक 60 हजार से अधिक स्कूल और 72 लाख से अधिक शिक्षक इससे जुड़ चुके हैं।
प्रशस्त पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
प्रशस्त एक स्कूल-आधारित डिजिटल माध्यम है जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांगता की संभावित स्थितियों वाले बच्चों की प्रारंभिक पहचान में मदद करता है। इसमें दो-चरणीय जाँच सूची है — पहले शिक्षक प्रारंभिक जाँच करते हैं, फिर विशेष शिक्षक मामले की पुष्टि कर आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय जाँच के लिए भेजते हैं।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से कर्मचारी शामिल हैं?
इस अभियान में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रमुख, विशेष शिक्षक, आया, ड्राइवर, क्लर्क और छात्रावास वार्डन सहित सभी गैर-शिक्षण कर्मचारी भी शामिल हैं। यह कार्यक्रम 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
यह अभियान किन नीतियों के तहत चलाया जा रहा है?
यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य सभी बच्चों के लिए समान, सुगम और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
इस पहल का भविष्य में विस्तार कैसे होगा?
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2026 के दौरान और अधिक स्कूलों के इस अभियान से जुड़ने की उम्मीद है। पिछले तीन महीनों से यह अभियान जारी है और भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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